॥ राधाया दर्शनं पुण्यं कृष्णप्राप्तेः कारणम् ॥
Ram - Karun Bhav
राम - करुण भाव
Bhajans (24)
Meri Vinti Suno Sanware Ram Ji
bhajanShrijirasik
मेरी विनती सुनो साँवरे राम जी,
अपने चरणों की भक्ति का वरदान दो।
तेरे दर्शन बिना मन ये प्यासा रहे,
अब कृपा करके दर्शन का वरदान दो।
जग के झूठे सहारे सभी छूट गए,
जो भी नाते बनाए वो सब टूट गए।
एक तेरा सहारा मिला है मुझे,
थाम लो हाथ मेरा साँवरे राम जी।
तुम हो दीनदयालु, प्यारे घनश्याम,
सबकी बिगड़ी बनाने वाले हो राम।
मेरी नैया भँवर में फँसी है प्रभु,
पार कर दो इसे साँवरे राम जी।
लाख अवगुण भरे हैं मेरे मन में,
फिर भी आस लगी है तेरे दर पे।
पापी तारे हैं तुमने प्यारे राम जी,
अब मुझे तार दो साँवरे राम जी।
मोह-माया के बंधन में उलझा हुआ,
राह भटका हुआ, मैं हूँ अटका हुआ।
थाम लो हाथ मेरा प्यारे राम जी,
अपने चरणों में दे दो शरण राम जी।
जब तलक साँस सीने में चलती रहे,
राम के नाम की ज्योति जलती रहे।
बस यही एक अरदास पूरी करो,
उम्र भर बस तेरा नाम गाता रहूँ।
Hari Ji Meri Lagi Lagan Mat Todna
bhajanShrijirasik
हरि जी मेरी लागी लगन मत तोडना
लागी लगन मत तोडना, प्यारे लागी लगन मत तोडना
खेती बोआई मैंने तेरे नाम की,
मेरे भरोसे मत छोडना
हरि जी मेरी लागी लगन मत तोडना
जल है गहरा, नाव पुरानी,
बीच भवर मत छोडना
हरि जी मेरी लागी लगन मत तोडना
तूही मेरा सेठ है, तू ही साहूकार है
ब्याज पे ब्याज मत जोड़ना
Kaun Kahta Hai Bhagwan Aate Nahi
bhajanShrijirasik
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
बिन बुलाए आएंगे, श्याम रहना पाएंगे
तेरी पीड़ा, तेरे दुख, श्याम सहना पाएंगे
बिन बुलाए आएंगे, श्याम रहना पाएंगे
तेरी पीड़ा, तेरे दुख, श्याम सहना पाएंगे
आस्था से पूरी बंद करके आंखों को दिल से तुम बुलाओ तो सही
कौन कहते हैं भगवान आते नहीं?
लोग मीरा के जैसे बुलाते नहीं
कोई छोटा ना बड़ा, सब बराबर है यहां
राम के हैं हम सभी, राम सबके है यहां
मन में श्रद्धा हो अगर, तो मना वो ना करें
चाहे झूठा ही सही, भोग वो स्वीकार लें
भाव जिसका मन में, राम के लिए पूरा, वो मना करेंगे ही नही
कौन कहते हैं भगवान आते नहीं?
लोग मीरा के जैसे बुलाते नहीं
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेरशबरी के जैसे खिलाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं ||
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं ||
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
तुम गोपी के जैसे नचाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी वल्लभं ||
Datta Tera Mera Pyar Kabhi Na Badle
bhajanShrijirasik
दाता तेरा मेरा प्यार कभी न बदले,
दाता मेरा व्यवहार कभी न बदले,
दाता तेरा मेरा प्यार कभी न बदले,
सतसतंग तेरा छोड़ू कभी न
मुख भी तुमसे मोडू कभी ना,
मेरा यह व्यवहार कभी न बदले
दाता तेरा मेरा.......
द्वारे तेरे आता रहूं मैं,
चरणों में शीश झुकता रहूं मैं,
मन से मन का ये तार कभी न बदले,
दाता तेरा मेरा प्यार कभी न बदले,
अपना हो या हो बेगाना
बदले चाहे सारा ज़माना,
चाहे सारा संसार भले ही बदले,
दाता तेरा मेरा प्यार कभी न बदले....
तुम्हे नित नव भजन सुनाता रहूँ मै
तेरी कृपा से गाता रहूं मैं
चाहे कुछ भी हो मैं कभी ना बदलू ,
दाता तेरा मेरा प्यार कभी न बदले....
Nirbal Hokar Koi
bhajanShrijirasik
निर्बल होकर कोई,
जब उन्हें पुकारा है,
फिर कौन बिगाड़ेगा,
जब राम सहारा है,
निर्बल होकर कोई ॥
पतवार पे हों रघुवर,
तूफ़ान से क्या डरना।
जब काम हो रघुवर का,
तो क्या जीना, क्या मरना।
रघुनाथ के भक्तों का,
वो बुलंद सितारा है ॥
निर्बल होकर कोई...
कोई राम-राम कहता,
कोई शिव-शिव गाता है।
कोई कृष्ण राधे-राधे,
कोई ध्यान लगाता है।
ये भी हमें प्यारा है,
वो भी हमें प्यारा है ॥
निर्बल होकर कोई...
मैंने जीवन सौंप दिया,
रघुनाथ के हाथों में।
कब पार लगाएंगे
नैया मेरी हाथों से।
रघुनाथ के भक्तों का,
कोई कुछ न बिगाड़ा है ॥
निर्बल होकर कोई...
तकलीफ़ें जीवन में
आनी और जानी हैं।
डरना मुसीबत से,
तेरी नादानी है।
Bhaav Mere Tere siva
bhajanShrijirasik
भाव मेरे तेरे सिवा,
कौन जान पाएगा,
मुझको पता है तू,
मुझे भी अपनाएगा,
ना जाने कब तुमसे,
मिलना होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
तेरी गलियों में प्यारे,
जिस दिन आऊंगा,
आँखों में छुपा के तुझे,
साथ ले जाऊंगा,
जन्मों जन्म संग,
रहना होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
देखते ही प्यारे तुझे,
आँख भर आएगी,
बातें वो तमाम जाने,
कैसे हो पाएगी,
ना जाने कब ये,
हसीन दिन होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
भाव का ही खेल प्यारे
भाव तुझे प्यारे है,
मेरे जैसे प्यारे तूने,
कितने सवारे है,
मिलकर कभी ना,
बिछड़ना होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
तुझको निहारूंगा मैं,
गीत तेरे गाऊंगा,
भावों की वो डोरी वाला,
पालना झुलाऊंगा,
जितना दीवाना ये,
तन मन होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
रोज सुबह शाम तेरे,
भजन मैं गाऊंगा,
तुझको रिझाऊंगा,
मैं तुझको मनाऊंगा,
कितना सुहाना,
हर पल होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
मेरा विश्वास है तू,
मेरी कहानी है,
तेरी ही कृपा से प्यारे,
मेरा दाना पानी है,
हर स्वास में नाम,
तेरा होगा,
जीवन सफल ये,
उसी दिन होगा।।
Dar Par Tumhare Aaya
bhajanShrijirasik
दर पर तुम्हारे आया ठुकराओ या उठा लो,
करुणा की सिंधु मैया अपनी बिरद बचा लो,
दर पर तुम्हारे आया....
मीरा या शबरी जैसा पाया हृदय ना मैंने,
जो है दिया तुम्हारा लो अब इसे सम्भालो,
दर पर तुम्हारे आया....
दिन रात अपना-अपना करके बहुत फसाया,
कोई हुआ ना अपना अब अपना मुझे बना लो,
दर पर तुम्हारे आया....
दोषी हूँ मैं या सारा ये खेल तुम्हारा,
जो हूँ समर्थ हो तुम चाहे गजब जुठालो,
दर पर तुम्हारे आया....
बस याद अपनी देदो सब कुछ भले ही ले लो,
विषमय करील पर अब करुणा की दृष्टि डालो,
दर पर तुम्हारे आया...
Prabhu Chah M Chah Milane Ko Bhagwan Ki Bhakti Kahte Hai
bhajanShrijirasik
प्रभु चाह में चाह मिलाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
आँखों से झलकते आँसू हों, अधरों पे सदा मुस्कान रहे।
एक संग में रोने गाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
ना शिकवा हो किस्मत से कोई, ना दुनिया की कोई आस रहे।
जो मिल जाए उसमें मगन रहे, उसे प्रभु का ही परसाद कहे॥
हर हाल में शुक्र मनाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
ना मंदिर की दीवारों में, ना पत्थरों के आकारों में।
उस सांवरिया को हर पल ही, बस अपने दिल में पाने को॥
भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
जहाँ 'मैं' मिटकर 'तू' बन जाए, जहाँ बूंद समंदर हो जाए।
अपने ही अहंकार की आहुति, चरणों में दे जाने को॥
भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
दुख आए तो मुस्काना है, सुख आए तो झुक जाना है।
हर मोड़ पे उस सांवरे की, बस रज़ा में ही रम जाने को॥
भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
Raji Hai Hum Usi M Jisme Tere Rja Hai
bhajanShrijirasik
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है,
हम क्या बताएं तुमको सब कुछ तुझे खबर है,
हर हाल में हमारी तेरी तरफ नजर है,
किस्मत है वो हमारी जो तेरा फैंसला है,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
हाथो को दुआ की खातिर मिलाएं केसे ,
सजदे में तेरे आकर सर को झुकाएं केसे,
मजबूरियां हमारी बस तू ही जानता है ,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
रो करकहे या हंस कर कटती है जिंदगानी,
तू गम दे या ख़ुशी दे सब तेरी मेहेरबानी,
तेरी ख़ुशी समहजकर सब गम भुला दिया है,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
दुनिया बना के मालिक जाने कहाँ छिपा है,
आता नहीं नजर तू बस इक यही गिला है,
भेजा इस जहाँ में जो तेरा शुक्रिया है ,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है
सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है
Agar Naath Dekhoge Awgun Hamare
bhajanShrijirasik
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
गणिका अजामिल को पल में उबारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
माना अगम है अपावन कुटिल है,
सबकुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
Jo Prem Gali M Aaye Nahi
bhajanShrijirasik
जो प्रेम गली में आए नहीं,
प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,
जिसने कभी प्रेम किया ही नहीं,
वो प्रेम निभाना क्या जानें,
जो प्रेम गली में आए नही ॥
जो वेद पढ़े और भेद करे,
मन में नहीं निर्मलता आए,
कोई कितना भी चाहे ज्ञान कहे,
भगवान को पाना क्या जाने,
जो प्रेम गली में आये नहीं,
प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,
जो प्रेम गली में आये नहीं ॥
ये दुनिया गोरख धंधा है,
सब जग माया में अँधा है,
जिस अंधे ने प्रभु को देखा नहीं,
वो रूप बताना क्या जाने,
जो प्रेम गली में आये नहीं,
प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,
जो प्रेम गली में आये नहीं ॥
जिस दिल में ना पैदा दर्द हुआ,
वो जाने पीर पराई क्या,
मीरा है दीवानी मोहन की,
संसार दीवाना क्या जाने,
जो प्रेम गली में आये नहीं,
प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,
जो प्रेम गली में आये नहीं ॥
जो प्रेम गली में आए नहीं,
प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,
जिसने कभी प्रेम किया ही नहीं,
वो प्रेम निभाना क्या जानें,
जो प्रेम गली में आए नही ॥
Chale Shyam Sunder Se Milne Sudama
bhajanShrijirasik
चले श्याम सुंदर से मिलने सुदामा,
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा,
हरे कृष्ण रामा, हरे कृष्ण रामा,
काँधे पे धोती और लोटा लटकाये
तंदुल की पुतली बगल में दबाये,
चलते चलते पहुंचे, द्वारका धामा
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा --
महल के बीच में सुदामा जी आए,
सोने सिंहासन से, हरी उठ आए,
सीने से सीना मिलाये घन श्यामा,
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा --
नहलाया, धुलाया हरी भोजन खिलाया
सोने सिन्हासन पर उनको बिठाया
श्याम दबाए पांव, पंखा करे सत्यभामा
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा --
हस हस के पूछे वो कृष्ण कन्हैया,
दीजे जो भेंट भाभी ने भिज वाया,
तंदुल को चाब हरी दिए धन धामा
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा -
Suno H Ayodhya Ram Bina
bhajanसूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
राम बिना मेरे लखन बिना
सूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
आँगन सून चौक चन्दन बिन
लक्ष्मण बिन ठकुराई
सीता बिना मेरी सूनी रसोइया
ये दुःख सही न जाए
सूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
राम बिना मेरे लखन बिना
हाय राम बिना मेरे लखन बिना
सूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
हाथ में बाण धनुष धार कंधे
लक्ष्मण चले पिछाड़ी
बीच में सीता मैया चलत है
देख रही है दुनिया
सूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
सूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
राम बिना मेरे लखन बिना
हाय राम बिना मेरे लखन बिना
सूनी सूनी है अयोध्या मेरी राम बिना
चौदह बरस भये बनवासी
सावन भादौ बरसे
वृक्ष के नीचे भीगे तीनो
बह रही है पुरवाई
Vinati Suniye Nath Hamari
bhajanShrijirasik
विनती सुनिए नाथ हमारी,
ह्रदय स्वर हरी ह्रदय बिहारी,
मोर मुकुट पीताम्बरधारी,
विनती सुनिए..........
जनम जनम की लगी लगन है,
साक्षी तारों भरा गगन है,
गिन गिन स्वास आस कहती है,
आएंगे श्री कृष्ण मुरारी,
विनती सुनिए..........
सतत प्रतीक्षा अप लक लोचन,
हे भव बाधा विपत्ति विमोचन,
स्वागत का अधिकार दीजिये,
शरणागत है नयन पुजारी,
विनती सुनिए..........
और कहूं क्या अन्तर्यामी,
तन मन धन प्राणो के स्वामी,
करुणाकर आकर ये कहिये,
स्वीकारी विनती स्वीकारी,
विनती सुनिए..........
Sabne Tumhe Pookara Shree Ram Ji
bhajanसब ने तुम्हे पुकारा श्री राम जी देना हमे सहारा श्री राम जी
ज़्यादा जानें
धार्मिक आभूषण
शनि देव
बावा लाल
साईं भजन
सब ने तुम्हे पुकारा श्री राम जी देना हमे सहारा श्री राम जी,
मेरे राम जी हो प्यारे राम जी हो न्यारे राम जी हो,
सब के राम जी हो,
सब ने तुम्हे पुकारा श्री राम जी देना हमे सहारा श्री राम जी,
मन मंदिर में तेरी मूरत तू है सब का सहारा,
सब की नजरो में है राघव तेरा ही है नजारा,
तेरी दुनिया सूंदर लेकिन तू सब से है प्यारा,
नैया भवर में दुब न जाए हम को दिखा किनारा,
सब ने तुम्हे पुकारा श्री राम जी देना हमे सहारा श्री राम जी,
तेरे रूप है लाखो भगवान तू सब की आशा है,
तेरे कितने नाम है राघव तू सबकी भाषा है,
सब का है तू पालनहारा सब की अभिलाषा है,
साँझ सवेरे होठो पर है भगवन नाम तुम्हरा,
सब ने तुम्हे पुकारा श्री राम जी देना हमे सहारा श्री राम जी,
Aaj Ram Mere Ghar Aaye
bhajanShrijirasik
आज राम मेरे घर आए, आज राम मेरे घर आए।
नी मै ऊँचे भाग्य वाली, मेरी कुटिया के भाग्य जगाए॥
नी मै राह में नैन बिछाऊं, और चन्दन तिलक लगाऊं।
नी मैं रज रज दर्शन पाऊं, आज राम मेरे घर आए॥
वो जग का पालनहारा, और दुनिया का रखवाला।
वो सबके दुःख मिटाए, आज राम मेरे घर आए॥
नी मै जिंदगी का फल पाऊं, और चख चख बेर खिलाऊं।
वो हस हस खाते जाए, आज राम मेरे घर आए॥
नी मैं हृदय का थाल बनाऊ, नैनो की ज्योति जलाऊं।
नी मैं आरतियाँ उतारूँ, आज राम मेरे घर आए॥
Hey Ram Hey Ram
bhajanShrijirasik
हे राम
हे राम, हे राम
जग में साचो तेरो नाम
हे राम, हे राम
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही तो है, राधा का श्याम
हे राम, हे राम
तू अंतर्यामी, सबका स्वामी
तू अंतर्यामी, सबका स्वामी
तेरे चरणों में, चारो धाम
हे राम, हे राम
तू ही बिगड़े, तू ही सवारे
तू ही बिगड़े, तू ही सवारे
इस जग के, सारे काम
हे राम, हे राम
तू ही जगदाता, विश्वविधता
तू ही जगदाता, विश्वविधता
तू ही सुबह, तू ही शाम
हे राम, हे राम
हे राम, हे राम
जग में साचो तेरो नाम
हे राम, हे राम
Lakhi Mehfil Jaha M Yu To Teri Mehfil Si Mehfil Nhi H
bhajanShrijirasik
लाखों महिफिल जहां में यूँ तो,
तेरी महफ़िल सी मेहिफिल नहीं है।
स्वर्ग सम्राट हो या हो चाकर,
तेरे दर पे है दर्जा बराबर।
तेरी हस्ती को हो जिसने जाना,
कोई आलम में आखिर नहीं है॥
दरबदर खा के ठोकर जो थक कर,
आ गया गर कोई तेरे दर पर।
तूने नज़रों से जो रस पिलाया,
वो बताने के काबिल नहीं है॥
जीते मरते जो तेरी लगन में,
जलते रहते भी रहते अगन में।
है भरोसा तेरा हे मुरारी,
तू दयालु है कातिल नहीं है॥
तेरा रस्ता लगा चस्का जिसको,
लगता बैकुण्ठ फीका सा उसको।
डूब कर कोई बहार ना आया,
इस में भवरे है साहिल नहीं है॥
कर्म है उनकी निष्काम सेवा,
धर्म है उनकी इच्छा में इच्छा।
सुम दो इनके हाथों में डोरी,
यह ‘कृपालु’ हैं तंग दिल नहीं हैं॥
Na Bhatko Moh Se Pyare Ye Rishte Tut Jayenge
bhajanShrijirasik
न भटको मोह से प्यारे,
ये रिश्ते टूट जाएँगे ।
जिन्हे अपने समझते हो,
कभी वे रूठ जाएँगे ।।
जगत के रिश्ते-नाते सब,
ये छूटेंगे मरोगे जब ।
जिसे दौलत समझते हो,
कभी सब लूट जाएँगे ।।
न भटको.....
सभी विपदा से रोते हैं,
नहीं कोई सुखी जग में ।
अगर प्रभु को सुमिर ले तो,
तेरे गम छूट जाएँगे।।
न भटको.....
सफल नर जन्म करना हो,
तो प्रभु की भक्ति कर लेना ।
कान्त यदि ध्यान यह धरले,
मोह सब छूट जाएँगे ।।
न भटको.....
Bhajan Bin Chain Na Aaye Ram
bhajanShrijirasik
भजन बिना चैन ना आये राम,
कोई ना जाने कब हो जाये,
इस जीवन की शाम ॥
बोलो राम राम राम ॥
मोह-माया की आस तो पगले,
होगी कभी ना पूरी,
करते-करते भजन प्रभु का,
मिट जायेगी दूरी,
हम दूरी के साथ-साथ लो,
सब ही प्रभु का नाम,
भजन बिना चैन ना आये राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
भजन है अमृत रस का प्याला,
शाम सवेरे पीना,
इसको पीकर सारा जीवन,
मस्ती में तू जीना
भक्ति कर तो बन जायेंगे,
अपने बिगड़े काम,
भजन बिना चैन ना आये राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
भजन बिना चैन ना आये राम,
कोई ना जाने कब हो जाये,
इस जीवन की शाम ॥
बोलो राम राम राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
Ham Katha Sunate Ram Sakal Gun Dham Ki Ye Ramayan H Punya Katha Shriram Ki
bhajanShrijirasik
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
(दोहा – ॐ श्री महागणाधिपतये नमः,
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्याय नमः,
वाल्मीकि गुरुदेव के,
पद पंकज सिर नाय,
सुमिरे मात सरस्वती,
हम पर होऊ सहाय,
मात पिता की वंदना,
करते बारम्बार,
गुरुजन राजा प्रजाजन,
नमन करो स्वीकार)
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
जम्बुद्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते भारतवर्षे,
एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,
यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा,
संतति हेतु यज्ञ करवाया,
धर्म यज्ञ का शुभफल पाया,
नृप घर जन्मे चार कुमारा,
रघुकुल दीप जगत आधारा,
चारों भ्रातो के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, रामा….
गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पूरण हुई शिक्षा, रघुवर पूरण काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
मृदु स्वर कोमल भावना,
रोचक प्रस्तुति ढंग,
एक एक कर वर्णन करे,
लव कुश राम प्रसंग,
विश्वामित्र महामुनि राई,
इनके संग चले दोउ भाई,
कैसे राम ताड़का मारी,
कैसे नाथ अहिल्या तारी…
मुनिवर विश्वामित्र तब,
संग ले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर देखने,
पहुचे मिथिला धाम…
जनकपुर उत्सव है भारी,
जनकपुर उत्सव है भारी,
अपने वर का चयन करेगी,
सीता सुकुमारी,
जनकपुर उत्सव है भारी…
जनकराज का कठिन प्रण,
सुनो सुनो सब कोई,
जो तोड़े शिव धनुष को,
सो सीता पति होई…
को तोडे शिव धनुष कठोर,
सब की दृष्टि राम की ओर,
राम विनयगुण के अवतार,
गुरुवर की आज्ञा सिरधार…
सहज भाव से शिव धनु तोड़ा,
जनक सुता संग नाता जोड़ा…
रघुवर जैसा और ना कोई,
सीता की समता नहीं होई,
जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की….
सब पर शब्द मोहिनी डारी,
मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी,
यों दिन रैन जात है बीते,
लव कुश ने सब के मन जीते,
वन गमन, सीता हरन, हनुमंत मिलन,
लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन…
सविस्तार सब कथा सुनाई,
राजा राम भए रघुराई,
राम राज आयो सुख दायी,
सुख समृद्धि श्री घर घर आई…
काल चक्र ने घटना क्रम में,
ऐसा चक्र चलाया,
राम सिया के जीवन में फिर,
घोर अंधेरा छाया….
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया,
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने,
मिथ्या दोष लगाया,
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया….
चल दी सिया जब तोड़ कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाषाण हृदयो में ना,
अंगारे जगे विद्रोह के…
ममतामयी माँओ के आँचल,
भी सिमट कर रह गए,
गुरुदेव ज्ञान और नीति के,
सागर भी घट कर रह गए…
ना रघुकुल ना रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
मानवता को खो बैठे जब,
सभ्य नगर के वासी,
तब सीता को हुआ सहायक,
वन का ऐक सन्यासी….
उन ऋषि परम उदार का,
वाल्मीकि शुभ नाम,
सीता को आश्रय दिया,
ले आए निज धाम….
रघुकुल में कुलदीप जलाए,
राम के दो सूत सिय ने जाए…
(श्रोता गण, जो एक राजा की पुत्री है,
एक राजा की पुत्रवधू हैं,
और एक चक्रवर्ती राजा की पत्नी है,
वही महारानी सीता,
वनवास के दुखो में,
अपने दिन कैसे काटती हैं,
अपने कुल के गौरव और,
स्वाभिमान की रक्षा करते हुए,
किसी से सहायता मांगे बिना,
कैसे अपने काम वो स्वयं करती है,
स्वयं वन से लकड़ी काटती है,
स्वयं अपना धान कूटती है,
स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं,
और अपनी संतान को,
स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देती है,
अब उसकी करुण झांकी देखिये)
जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की,
राज-रानी होके दिन वन में बिताती हैं…
रहते थे घेरे जिसे दास-दासी आठो याम,
दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है…
धरम प्रवीन सती परम कुलिन सब,
विधि दोशहीन जीना दुख में सिखाती हैं,
जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है…
कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया काटती है,
करम लिखे को पर काट नहीं पाती है…
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था,
दुख भरे जीवन का बोज वो उठाती है…
अर्धागिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भर्ती है नीर, नीर नैन में ना लाती है,
जिसकी प्रजा के अपवादों कुचक्र में वो,
पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है,
पालती है बच्चो कों वो कर्म योगिनी की भांति,
स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं,
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते,
निठुर नियति को दया भी नहीं आती है….
ओ…उस दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सूत श्री राम तिहारे…
ओ… सीता माँ की आँख के तारे,
लव-कुश है पितु नाम हमारे…
हे पितु भाग्य हमारे जागे,
राम कथा कही राम के आगे ||
Na Jane Kaun Se Gun Par Dayanidhi Reejh Jate H
bhajanShrijirasik
ना जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥
नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
न आये मधुपुरी से गोपियों की दु:ख व्यथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ॥
न रोये बन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आँसु बहाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥
नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
न आये मधुपुरी से गोपियों की, दु: ख कथा सुनकर ।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ॥
न रोये बन गमन में , श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में , आँसु बहाते हैं ॥
कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ'बिन्दु'विधि हर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
M Nahi Mera Nhi Yah Tan Kisi Ka H Diya
bhajanShrijirasik
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
देने वाले ने दिया, वह भी दिया किस शान से।
"मेरा है" यह लेने वाला, कह उठा अभिमान से
"मैं", ‘मेरा’ यह कहने वाला, मन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो मिला है वह हमेशा, पास रह सकता नहीं।
कब बिछुड़ जाये यह कोई, राज कह सकता नहीं।
जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया।..
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जग की सेवा खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये।
जिन्दगी का राज है, यह जानकर जी लीजिये।
साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है द
जो भी अपने पास है, वह सब किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
Dil Ki Har Dhakan Se Tera Naam Nikalta Hai
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दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
जन्मों पे जनम लेकर मैं हार गया मोहन
दर्शन बिन व्यर्थ हुआ हर बार मेरा जीवन
अब धैर्य नहीं मुझमे इतना तू परखता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
क्या खेल सजाया है मोहरो की तरह हमको
क्या खूब नचाया है कठपुतली सा हमको
ये खेल तेरे न्यारे बस तू ही समझता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
ये दिल पुकारता है एक बार चले आओ
दर्शन देकर प्यारे मेरी बिगड़ी बना जाओ
प्रियतम मेरे दिल में अरमान मचलता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
कर भी दो दया मोहन हम भी तो तुम्हारे हैं
एक बार तो अपना लो जन्मों से तुम्हारे हैं
तेरे नित्य मिलन को अब जीवन तरसता है
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
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