॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Ram - Devotional Bhav
राम - भक्तिमय भाव

॥ राधे राधे ॥

Shrijirasik
प्रभु चाह में चाह मिलाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
आँखों से झलकते आँसू हों, अधरों पे सदा मुस्कान रहे।
एक संग में रोने गाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
ना शिकवा हो किस्मत से कोई, ना दुनिया की कोई आस रहे।
जो मिल जाए उसमें मगन रहे, उसे प्रभु का ही परसाद कहे॥
हर हाल में शुक्र मनाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
ना मंदिर की दीवारों में, ना पत्थरों के आकारों में।
उस सांवरिया को हर पल ही, बस अपने दिल में पाने को॥
भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
जहाँ 'मैं' मिटकर 'तू' बन जाए, जहाँ बूंद समंदर हो जाए।
अपने ही अहंकार की आहुति, चरणों में दे जाने को॥
भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
दुख आए तो मुस्काना है, सुख आए तो झुक जाना है।
हर मोड़ पे उस सांवरे की, बस रज़ा में ही रम जाने को॥
भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
Shrijirasik
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है,
हम क्या बताएं तुमको सब कुछ तुझे खबर है,
हर हाल में हमारी तेरी तरफ नजर है,
किस्मत है वो हमारी जो तेरा फैंसला है,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
हाथो को दुआ की खातिर मिलाएं केसे ,
सजदे में तेरे आकर सर को झुकाएं केसे,
मजबूरियां हमारी बस तू ही जानता है ,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
रो करकहे या हंस कर कटती है जिंदगानी,
तू गम दे या ख़ुशी दे सब तेरी मेहेरबानी,
तेरी ख़ुशी समहजकर सब गम भुला दिया है,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है,
दुनिया बना के मालिक जाने कहाँ छिपा है,
आता नहीं नजर तू बस इक यही गिला है,
भेजा इस जहाँ में जो तेरा शुक्रिया है ,
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है
सारे जहाँ के मालिक तेरा ही आसरा है
राजी हैं हम उसी में जिस में तेरी रजा है
Shrijirasik
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी ना कभी
दुःख हारी हर दुखियाँ जन के दुःख कलेश हरेगे कभी न कभी,
यदि नाथ का नाम दया निधि है
जिस अंग की शोभा सुहावनी है,
जिस सवाली रंग में मोहनी है,
उस रूप सुधा के सनेहियो के,
दीर्घ प्याले भरे गे कभी न कभी न,
करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हे,
चरणामित पान करवाया जिन्हे,
सरकार अदालत में गवाह सभी गुजरे गे कभी न कभी,
हम द्वार पे आप के आके पड़े,
मुदत से इसी जिद पे है अड़े,
भव सिंधु तरे जो बड़े जो बड़े,
बिंदु तरे गे कभी न कभी,
यदि नाथ का नाम दयानिधि है तो दया भी करेंगे कभी ना कभी
Shrijirasik
हरि का भजन करो हरि है हमारा,
हरि नाम गाने वाला सबका है प्यारा,
हरि नाम से तेरा काम बनेगा,
हरि नाम ही तेरे साथ चलेगा,
हरि नाम लेने वाला,
हरि का है प्यारा,
कोई काहे राधेश्याम, कोई काहे सीताराम,
कोई गिरिधर गोपाल, कोई राधामाधव लाल,
वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, नमो बारम्बारा,
सुख़ दुःख भोगे जाओ, लेखा सब मिटाते जाओ,
हरि गुण जाओ, हरि को रिझाते जाओ,
वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, सब का है प्यारा,
दीनो पर दया करो, बने तो सेवा भी करो,
मोह सब दूर करो, प्रेम हरि ही से करो,
यही भक्ति यही योग, यही ज्ञान सारा ,
Shrijirasik
राम दरबार है जग सारा, राम ही तीनों लोक के राजा।
सबके पालनहार, सबके आधार — राम दरबार है जग सारा॥
राम का भेद न पाया वेद-निगम ने, “नेति-नेति” उचारा।
राम दरबार है जग सारा, राम दरबार है जग सारा॥
रमापति राम, उमापति शंभु — एक दूजे का नाम उर धारा।
राम दरबार है जग सारा, राम दरबार है जग सारा॥
तीनों लोक में राम का सजा हुआ दरबार,
जो जहाँ सुमिरे वहीं दरस दें उसे राम उदार।
जय जय राम सियाराम,
जय जय राम सियाराम,
जय जय राम सियाराम,
जय जय राम सियाराम।
राम दरबार है जग सारा,
राम दरबार है जग सारा॥
राम में सर्व, राम में सब माहीं — रूप विराट राम सम नाहीं।
जितने भी ब्रह्मांड रचे हैं, सब विराट प्रभु माहीं बसे हैं।
रूप विराट धरे तो चौदह भुवन में न समाते हैं,
सिमटें तो हनुमान हृदय में सीता सहित समाते हैं।
पतित उद्धारन, दीन बंधु, पतितों को पार लगाते हैं,
बेर-बेर शबरी के हाथों बेर प्रेम से खाते हैं।
योग-जतन कर योगी जिनको जनम-जनम नहिं पाते हैं,
भक्ति के बस में होकर के वे बालक भी बन जाते हैं।
योगी के चिंतन में राम, मानव के मंथन में राम,
तन में राम, मन में राम, सृष्टि के कण-कण में राम।
आती-जाती श्वास में राम, अनुभव में आभास में राम,
नहिं तर्क के पास में राम, बसते हैं विश्वास में राम।
राम तो हैं आनंद के सागर, भर लो जिसकी जितनी गागर,
कीजो क्षमा दोष-त्रुटि स्वामी, राम नमामि नमामि नमामि।
अनंता, अनंत, अभेदा, अभेद — अगम, अगोचर, पार को पारा।
राम दरबार है जग सारा,
राम दरबार है जग सारा॥
Shrijirasik
भक्त हम बाला जी के रक्त में राम है
भगवा पहचान हमारी जान श्री राम है
अरे राम के पीछे इस नाम के पीछे
राम के पीछे पीछे चलता सारा हिंदुस्तान है
सारा हिंदुस्तान है
भक्त हम बाला जी के …..
शेर सनातन के अब ऐसे दहाड़ेंगे
चीर दुश्मन की छाती हाँ भगवा गाड़ेंगे
अरे वंश वही है अंश वही है
हम में ही श्री कृष्ण हैं बसते और हम में ही राम हैं
भक्त हम बाला जी के……
स्त्य सनातन का अब हाँ डंका बाजेगा
जाग रहा है हिंदू और भी जागेगा
सुनो हिंदुओं उठो हिंदुओं
हम है परशुराम का परसा
हम में परशुराम हैं
भक्त हम बाला जी के……
प्रकाश के शब्दों से खुशी गुणगान करे
जितना गुणगान करे वो राम का नाम करे
देश हमारा हो सबसे प्यारा
विश्व गुरु अब बनेगा भारत
इसमें हमारी शान है
भक्त हम बाला जी के……
Shrijirasik
मईया री मईया एक खिलौना छोटा सा दिलवा दे,
चाभी भर कर जब मैं छोड़ू तो एक ही रटन लगावे,
बोले राम राम राम बोले राम राम राम
सुन मइयां सुन मइयां मुझे एक खिलौना दिलवादे,
बोले राम राम राम
ना मैं चाहू हाथी घोड़ा ना कोई बाजे वाला,.
मुझको तो बस आज दिलादे दादा सोनटे वाला
बटन दबाते ही वो झट से अपनी पूछ घुमावे,
चाभी भर कर जब मैं छोड़ू तो एक ही रटन लगावे,
बोले राम राम राम ... बोले राम राम राम
श्री उत्तरमुखी बालाजी मेरा मेरे मन वस जाए,
संकट पकड़े उन्हें नचावे मस्ती में खो जाए
संकट उनके दर पर झूमे चीखें और चिल्लाए
दादा मेरा सोंटे मारे एक ही रटन लगावे,
बोले राम राम राम।बोले राम रामराम
श्री उत्तरमुखी बालाजी को अपना आज बना लूं
प्रकाश महंत से मिलकर मैया अपना भाग जगा लूं
देर करो मत अब मेरी मइयां जल्दी से मिलवा दे,
चाभी भर कर जब मैं छोड़ू तो एक ही रटन लगावे,
बोले राम राम राम बोले राम राम राम
Shrijirasik
जानकी नाथ सहाय करें जब
कौन बिगाड़ करे नर तेरो ॥
सुरज मंगल सोम भृगु सुत
बुध और गुरु वरदायक तेरो ।
राहु केतु की नाहिं गम्यता
संग शनीचर होत हुचेरो ॥
दुष्ट दु:शासन विमल द्रौपदी
चीर उतार कुमंतर प्रेरो ।
ताकी सहाय करी करुणानिधि
बढ़ गये चीर के भार घनेरो ॥
जाकी सहाय करी करुणानिधि
ताके जगत में भाग बढ़े रो ।
रघुवंशी संतन सुखदायी
तुलसीदास चरनन को चेरो ॥
Shrijirasik
हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं,
हम तुम्हारे ही रहेंगे मेरे प्रियतम....
तुम्हे छोड़ सुन नन्द दुलारे कोई ना मीत हमारो,
किसके द्वारे जाए पुकारूँ और ना कोई सहारो,
अब तो आके बांह पकड़ लो ओ मेरे प्रियतम,
तुम हमारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो,
तुम हमारे ही रहोगे ओ मेरे प्रियतम......
तेरे कारण सब जग छोड़ा तुम संग नाता जोड़ा,
एक बार प्रभु बस ये कह दो मैं तेरा तू मेरा,
साँची प्रीत की रीत निभा दो ओ मेरे प्रियतम,
हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं,
हम तुम्हारे ही रहेंगे मेरे प्रियतम.....
तुम हमारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो,
तुम हमारे ही रहोगे ओ मेरे प्रियतम.....
Shrijirasik
तुम्हें देखती हूं तो,लगता है ऐसे
के जैसे युगों से,तुम्हे जानती हूं
अगर तुम हो सागर.....
अगत तुम हो सागर,मैं प्यासी नदी हूं
अगर तुम हो सावन,मैं जलती कली हूं
के जैसे युगों से,तुम्हें जानती हूं
तुम्हें देखती....
1. मुझे मेरी नींदें,मेरा चैन दे दो
मुझे मेरी सपनों,की इक रैंन दे दो न
यही बात पहले....
यही बात पहले भी,तुमसे कही थी
के जैसे युगों से,तुम्हें जाती हूं
तुम्हें देखती....
2. तुम्हें छूके पल में,बने धूल चन्दन -2
तुम्हारी महक से,महकने लगे तन
मेरे पास आओ.…
मेरे पास आओ,गले से लगाओ
पिया और तुमसे मैं,क्या चाहती हूं
के जैसे युगों से, तुम्हें जानती हूं
तुम्हें देखती....
3. मुरलिया समझकर,मुझे तुम उठा लो
बस इक बार होंठों से,अपने लगा लो न
कोई सुर तो जागे....
कोई सुर तो जागे,मेरी धड़कनों में
के मैं अपनी सरगम से,रूठी हुई हूँ
के जैसे युगों से,तुम्हें जानती हूं
तुम्हें देखती हूं तो,लगता है ऐसे
के जैसे युगों से,तुम्हें जानती हूं
तुम्हें देखती....
Shrijirasik
चले श्याम सुंदर से मिलने सुदामा,
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा,
हरे कृष्ण रामा, हरे कृष्ण रामा,
काँधे पे धोती और लोटा लटकाये
तंदुल की पुतली बगल में दबाये,
चलते चलते पहुंचे, द्वारका धामा
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा --
महल के बीच में सुदामा जी आए,
सोने सिंहासन से, हरी उठ आए,
सीने से सीना मिलाये घन श्यामा,
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा --
नहलाया, धुलाया हरी भोजन खिलाया
सोने सिन्हासन पर उनको बिठाया
श्याम दबाए पांव, पंखा करे सत्यभामा
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा --
हस हस के पूछे वो कृष्ण कन्हैया,
दीजे जो भेंट भाभी ने भिज वाया,
तंदुल को चाब हरी दिए धन धामा
जपते जपते मनमे हरे कृष्ण रामा -- हरे कृष्ण रामा -
Shrijirasik
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
प्रभु नाम के मोती,
महिमा राम नाम की होती,
मन हो जाये मतवाला..
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला...
जिसकी कृपा से रत्नाकर भी,
रामायण लिख जावें,
जिसकी कृपा से नयनहीन भी,
सूर श्याम कहलाये,
मीरा जोगन हो जावे,
गिरधर के रंग रंगाये,
पीये दीवानी विष प्याला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला.......
धूप दीप अर्चन साधन न,
जोग कोई बतलाये,
चरण शरण ही जा बैठे,
और भव सागर तर जाए,
काशी काबा न जाए,
चाहे गंगा न नहाये,
बस राम की फेरे माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला......
जनम जनम के इस चक्कर से,
खुद को आज बचा ले,
राम नाम का हो जा प्राणी,
राम नाम अपना ले,
अरे बन जा सवाली,
भर ले झोली तू खाली,
सारे जग का वो रखवाला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला......
Shrijirasik
जिहना पीते ने प्याले हरि नाम दे,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया धन्ने भगत नू,
उन्हे पथरा चो श्याम नू पाया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया मीरा बाई नू,
उन्हे जहरा चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया भीलनी माई नू,
उन्हे बेरा चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया द्रौपता माई नू,
उन्हा साड़िया चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
Shrijirasik
विनती सुनिए नाथ हमारी,
ह्रदय स्वर हरी ह्रदय बिहारी,
मोर मुकुट पीताम्बरधारी,
विनती सुनिए..........
जनम जनम की लगी लगन है,
साक्षी तारों भरा गगन है,
गिन गिन स्वास आस कहती है,
आएंगे श्री कृष्ण मुरारी,
विनती सुनिए..........
सतत प्रतीक्षा अप लक लोचन,
हे भव बाधा विपत्ति विमोचन,
स्वागत का अधिकार दीजिये,
शरणागत है नयन पुजारी,
विनती सुनिए..........
और कहूं क्या अन्तर्यामी,
तन मन धन प्राणो के स्वामी,
करुणाकर आकर ये कहिये,
स्वीकारी विनती स्वीकारी,
विनती सुनिए..........
Shrijirasik
पावन शुभ दिन है आया,आनंद उत्सव घर छाया,
हिवड़े मन मोद समाया, लागे सभी को मनभावना,
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
१. स्वागत करांला इनकी पलक बिछाकर के जी.. पलक बिछाकर..
बाट जोई थी जिनकी,आस लगाकरके जी,आस लगाकर
धन हुए भाग्य हमारे, मिट गए दुखड़े सारे,
चमके जीवन के सितारे, बाकी नहीं कुछ कामना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
२. आंगन में सुंदर सुंदर आसन लगवायाजी हो..आसन लगवाया...
दिल के भावों से इनको खूब सजाया जी हो...खूब सजाया...
बैठे मनमोहन प्यारे,आंखों के बन के तारे,
झूमे नर नारी सारे, मन को करे हैं लुभावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
३. सोहनी सूरत इनकी लागे अति प्यारी जी हो ...लागे अति प्यारी...
प्रिया प्रियतम की छवि पर जाएं बलिहारी जी हो.. जाएं बलिहारी...
देखूं तो मन हरषावे,नैनन में रूप समावे,
दूजो ना कोई भावे,लागे प्यारे से हमको पावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
४. कंचन के दीप जलाकर आरती गाओ जी हो... आरती गाओ...
सेवा में चंवर डुलाकर, भोग लगाओ जी हो...भोग लगाओ..
सर्वेश्वर मंडल गावे, चरणों में बलि बलि जावे,
आनंद का पार न पावे, उत्सव मनावे सुहावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना..
पावन शुभ दिन है आया, आनंद उत्सव घर छाया, हिवडे मन मोद समाया, लागे सभी को मन भावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना..
तू प्रेम से ओढ़ले प्यारी चुनरियाँ चुनरियाँ राम नाम की भली,
इस चादर की ओट तान के सब की नाव चली,
चुनरियाँ राम नाम की भली,
राम नाम की सहज चुनरियाँ दास कबीर ने ओहडी,
तुलसी दास ने ोहड़ के पाई राम लखन की जोड़ी,
यही चुनरियाँ पहन के मीरा निकली प्रेम गली,
चुनरियाँ राम नाम की भली,
जिसके सिर चादर ये सोहे भाग उसी का जागे,
जग का बंधन उसे न बांधे लग्न राम की लागे,
रोम रोम लहराए तन का मन की खली कली,
चुनरियाँ राम नाम की भली,
राम चदरियाँ काँधे लेके हनुमत सागर लांगे,
लंका चारि सिया सुधि लाये प्राण लखन के राखे,
राम नाम सिर मुकट सिरोमनि कर बजरंग बलि,
चुनरियाँ राम नाम की भली,
ये विजय है प्रभु राम की
अब तो ये फैसला हो गया।।
है अयोध्या प्रभु राम की
है अयोध्या श्री राम की
फर्ज अपना अदा हो गया।।
ये विजय है प्रभु राम की
अब तो ये फैसला हो गया ।।
सारे मुरझाये चेहरे खिले हैं
हो गया खत्म वनवास है।।
धर्म और सत्य के साथ
मैं जीता हिंदू का विश्वास है।।
आगयी आज वह शुभ घड़ी
भक्तो का सपना सच हो गया।।
ये विजय है प्रभु राम की
अब तो ये फैसला हो गया।।
छोड़ तम्बु चलेंगे महल में
प्रभु श्री राम संग जानकी
साधु संतो की भी जीत है ये
जीत है गौरव सम्मान की
रात दीवाली दिनों में होली
सातो रंग आसमा हो गया।।
ये विजय है प्रभु राम की
अब तो ये फैसला हो गया।।
है अयोध्या श्री राम की
अब तो ये फैसला हो गया।।
है अयोध्या श्री राम की
फर्ज अपना अदा हो गया।।
ये विजय है प्रभु राम की
अब तो ये फैसला हो गया
राम जी का नाम चाहे सुबह लो या शाम,
अब तो उनका मौसम है,
है राम भक्त साथ छाई खुशियों की सौगात
भक्ति भरा मौसम है।।
राम जी का नाम चाहे सुबह लो या शाम,
भक्ति भरा मौसम है,
राम जी का नाम चाहे सुबह लो या शाम
अब तो उनका मौसम है ॥
मिल जाए रघुवर जो तेरा सहारा
तो भूलू मैं सारा जहान,
सिया राम बोलो जय सिया राम बोलो
राधे श्याम बोलो बिगड़े बनेगे सारे काज रे।।
सिया राम बोलो राजा राम बोलो राधे श्याम बोलो
बिगड़े बनेगे सारे काज रे।।
एक सहारा राम तेरा और कोई नही साथ
मिल जाए रघुवर जो तेरा सहारा तो बुलु मैं सारा जहान,
सिया राम बोलो राजा राम बोलो राधे श्याम बोलो,
बिगड़े बनेगे सारे काज रे।।
सिया राम बोलो जय सिया राम बोलो
राधे श्याम बोलो बिगड़े बनेगे सारे काज रे।।
सिया राम बोलो राजा राम बोलो राधे श्याम बोलो
बिगड़े बनेगे सारे काज रे।।
Shrijirasik
शिवजी के डमरू से निकला
शिवजी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद की वीणा से निकला पतित पावन सीताराम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…..
अर्जुन के गाँढिव से निकला जय मधुसुधन जय घनश्याम,
द्रोपदी की आह से निकला भक्त के रक्षक हे भगवान,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम….
शबरी के बैरो से निकला भाव के भूखे हे भगवान,
भक्त प्रहलाद के मुख से निकला तुझमें राम मुझमें राम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…
बृज की कुंज गली से निकला जय गुरुदाता जय गुरुनाम,
चार वेद छः शास्त्र पुकारे हरि ओम हरि ओम सीताराम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…..
शंकर के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,
नारद की वीणा से निकला पतित पावन सीताराम,
शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…..
Shrijirasik
तेरे पूजन को भगवान....
तेरे पूजन को भगवान
बना मन मंदिर आलीशान
किसने जानी तेरी माया
किसने भेद तुम्हारा पाया
हारे ऋषि मुनि धर ध्यान
बना मन मंदिर आलीशान
तू ही जल में तू ही थल में
तू ही तन में तू ही मन में
तेरा रूप अनूप महान
बना मन...
तू हर गुल में तू बुलबुल में
तू हर डाल के हर पातन में
तू हर दिल में मूरतिमान
बना मन...
तूने राजा रंक बनाए
तूने भिक्षुक राज बिठाए
तेरी लीला अजब महान
बना मन...
झूठे जग की झूठी माया
मूरख उसमें क्यों भरमाया
कर कुछ जीवन का कल्याण
बना मन...
अयोध्या की शान रघुपति राजा राम
सरयू के तट पर विराजे भगवान
दशरथ नंदन कौशल्या के लाला
भरत शत्रुघ्न लक्ष्मण के साथी प्याले
रामराज्य की महिमा गाएं सब
अयोध्या नगरी धन्य हुई
जय श्री राम जय जय राम
अयोध्या के राजा जय जय राम
मिथिला की राज दुलारी सीता मैया
जनक जी की प्यारी बेटी राम की दुल्हनिया
स्वयंवर में धनुष तोड़ा श्री राम ने
सीता जी का वरण किया प्रभु ने
मिथिला में बाजे बधाई के नगाड़े
राम विवाह का उत्सव मनाया
जय जय सीता माता राम पिता मेरे
मिथिला की शान हो तुम सीता मैया
चले आना प्रभु जी...
कभी राम बनके, कभी श्याम बनके चले आना
प्रभु जी चले आना ॥ टेक ॥
तुम राम रूप में आना
सीता साथ लेके धनुष हाथ लेके
चले आना प्रभु जी चले आना...
तुम श्याम रूप में आना
राधा साथ लेके वंशी हाथ लेके
चले आना प्रभु जी चले आना...
तुम शिव रूप में आना
गौरा साथ लेके डमरू हाथ लेके
चले आना प्रभुजी चले आना...
तुम विष्णु रूप में आना
लक्ष्मी साथ लेके चक्र हाथ लेके चले आना प्रभु जी चले आना...
तुम गणपति रूप में आना रिद्धि साथ लेके सिद्धि साथ लेके चले आना प्रभु जी चले आना...
오
इस घोर नरक माये जीवन से उधार हमारा कब होगा,
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
जिस और नजर ढालो धरती अनाचार से त्रस्त याहा
जनता घुट घुट जीने की हो चुकी इधर अब व्यस्त याहा,
इन जनजा वातो से आखिर अपना छुटकारा कब होगा
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
तुम जिसे शिंगासन सोंप चले वो सता मध में चूर हुआ
हो गया कराहों से विरख आहो से कोसो दूर हुआ
अब तुम्ही कहो इस अन्य तंत्र पर वार करारा कब होगा
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
बाली ने पटनी छीनी है सुगरीव वातित है रो रो कर
अंगद नल नील भीभीशन सब जीते है रावन से डर कर
गजेंदर इस लंका का फिर वारा न्यारा कब होगा
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
जिसकी नईया राम भरोसे, जिसकी नईया राम भरोसे
डोल भले सकती है डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है
जिसकी नईया राम भरोसे
डोल भले सकती है डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
मत घबराना तू (आ आ)
संकट आऐगे (आ आ)
संकट भी एक दिन (आ आ)
जाने बिछाऐंगे (आ आ)
मत घबराना तू (आ आ)
संकट आऐगे (आ आ)
संकट भी एक दिन (आ आ)
जाने बिछाऐंगे (आ आ)
तू है प्रेमी राम लला का
तू है प्रेमी राम लला का
तूझ पर असर ना होगा बाल ना बांका होगा
हो ओ देर भले हो जाऐ गाड़ी छुट नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
हम्म हम्म हम्म हम्म
हो हो हो हो
सुनहू भरत भावे प्रबल
आ आ आ आ
बिलखी कह्यु मुन्नी नाथ
आ आ आ आ
हानी लाभ जीवन मरण
आ आ आ आ
यश अपयश विधि हाथे
आ आ आ आ
सुनहू भरत भावे प्रबल
आ आ आ आ
बिलखी कह्यु मुन्नी नाथ
आ आ आ आ
हानी लाभ जीवन मरण
आ आ आ आ
यश अपयश विधि हाथे
आ आ आ आ
कहै हनुमन्त विपती प्रभु सोई
जब तब सुमिरन भजन ना होई
जेहि विधि होई नाथ हित मोरा करहू सो देगी दास मैं तोहरा
हो ओ कैलाश देवेन्द्र साथ रहेगे गुरु वृजमोहन से देर ना हो सकती
देर नहीं हो सकती
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
जिसकी नईया राम भरोसे
डोल भले सकती है डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
ना राम नाम लीनो तेने भरी जवानी में, तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में ,
ना राम नाम लीनो तेने भरी जवानी में,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में ,
क्या लायो आटी में मिल जायगो माटी में,
एक दिन काया तेरी मिल जाएगी काठी में,
पानी का बबूला है, मिल जायेगो पानी में,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में,
क्यों करता मेरा मेरा यहाँ कुछ भी नहीं है तेरा,
एक दिन होगा भैया तेरा मरघट में डेरा ,
कछु कमाई के लेजा रे ऐसी जिंदगानी में,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में,
कर सच्ची भक्ति है भक्ति में शक्ति है,
या भक्ति से भैया मिल जाएगी मुक्ति है ,
तेने बालापन खोयो यो आनाकानी में ,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी
एक का मतलब एक राम है दो से दुनिया दारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
चार से चारो धाम पांच से पांचो तख्त बलधारी,
जैसे छाओ धुप साथ से साधु संगत सारी,
सत्संगी वचनो से सुन कर मन होता सुखहारी ,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
आठ से आठो याम है पूजा नो से शुभ नवराते,
दस से दसो दिशाएं राम की और झूठी सब बाते,
राम शरण में इक दिन जाना सब को बारी बारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
ग्यारा की गिनती से गंगा शिव के शीश विराजी,
बारहा से भरमा और विष्णु हो जाते है राजी,
भागी रथ के जैसा घर में बन देख पुजारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
कभी न साथ निभाये तेरी मोह माया की गिनती,
बन जाएगा काज विरागी करले प्रभु से विनती,
सब के ही भंडार भरे वो सबका है भंडारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो,
चरन हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो।
हो त्याग भरत जैसा,
सीता सी नारी हो,
और लव कुश के जैसी
संतान हमारी हो।
श्रद्धा हो श्रवण जैसी,
शबरी सी भक्ति हो,
और हनुमान के जैसे
निष्ठा और शक्ति हो।
मेरी जीवन नैया हो,
प्रभु राम खेवैया हो,
और राम कृपा की
सदा मेरे सर छाया हो।
कौशल्या माई हो,
लक्ष्मण सा भाई हो,
स्वामी तुम जैसा
मेरा रघुराई हो।
सरयू का किनारा हो,
निर्मल जल धारा हो,
और दर्शन मुझे भगवन,
हर घड़ी तुम्हारा हो।
नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो,
चरन हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो।
आज राम मेरे घर आए, आज राम मेरे घर आए।
नी मै ऊँचे भाग्य वाली, मेरी कुटिया के भाग्य जगाए॥
नी मै राह में नैन बिछाऊं, और चन्दन तिलक लगाऊं।
नी मैं रज रज दर्शन पाऊं, आज राम मेरे घर आए॥
वो जग का पालनहारा, और दुनिया का रखवाला।
वो सबके दुःख मिटाए, आज राम मेरे घर आए॥
नी मै जिंदगी का फल पाऊं, और चख चख बेर खिलाऊं।
वो हस हस खाते जाए, आज राम मेरे घर आए॥
नी मैं हृदय का थाल बनाऊ, नैनो की ज्योति जलाऊं।
नी मैं आरतियाँ उतारूँ, आज राम मेरे घर आए॥
Shrijirasik
नहीं चलाओ बाण व्यंग के ऐह विभीषण
ताना ना सेह पाऊं, क्यों तोड़ी है यह माला,
तुझे ए लंकापति बतलाऊं
मुझ में भी है तुझ में भी है, सब में है समझाऊं
ऐ लंका पति विभीषण ले देख मैं तुझ को आज दिखाऊं
- जय श्री राम -
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
देख लो मेरे मन के नागिनें में ।
मुझ को कीर्ति न वैभव न यश चाहिए,
राम के नाम का मुझ को रस चाहिए ।
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥
अनमोल कोई भी चीज मेरे काम की नहीं
दिखती अगर उसमे छवि सिया राम की नहीं
राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरन करू,
सिया राम का सदा ही मै चिंतन करू ।
सच्चा आंनंद है ऐसे जीने में श्री राम,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥
फाड़ सीना हैं सब को यह दिखला दिया,
भक्ति में हैं मस्ती बेधड़क दिखला दिया ।
कोई मस्ती ना सागर मीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥
Shrijirasik
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया
पुजारी सारी दुनिया
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया
द्वारे पे उसके जाके कोई भी पुकारता
परम कृपा दे अपनी भव से उभारता
ऐसे दीनानाथ पे बलिहारी सारी दुनिया
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम
दो दिन का जीवन प्राणी कर ले विचार तू
कर ले विचार तू
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू
मन में निहार तू
बिना हरी नाम के दुखिआरी सारी दुनिया
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम
नाम का प्रकाश जब अंदर जगायेगा
प्यारे श्री राम का तू दर्शन पायेगा
ज्योति से जिसकी है उजयारी सारी दुनिया
उजयारी सारी दुनिया
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया
Shrijirasik
अयोध्या करती है आव्हान,
ठाट से कर मंदिर निर्माण ॥
अयोध्या करती है आव्हान,
ठाट से कर मंदिर निर्माण,
शीला की जगह लगा दे प्राण,
बिठा दे वहां राम भगवान ।
सजग हो रघुवर की संतान,
ठाट से कर मंदिर निर्माण ।
हिन्दू है तो हिन्दुओ की आन मत जाने दे,
राम लला पे कोई आंच मत आने दे,
कायर विरोधियो को शोर मचाने दे,
जय श्री राम,
कायर विरोधियो को शोर मचाने दे,
लक्ष्य पे रख तू ध्यान ।
अयोध्या करती है आव्हान,
ठाट से कर मंदिर निर्माण ॥
मंदिर बनाने का पुराना अनुंबध है,
सब तेरे साथ पूरा पूरा प्रबंध है,
कार सेवको के बलिदान की सौगंध है,
जय श्री राम,
कार सेवको के बलिदान की सौगंध है,
बढ़ चल वीर जवान ।
अयोध्या करती हैं आव्हान,
ठाट से कर मंदिर निर्माण ॥
इत शिवसेना उत बजरंग दल है,
दुर्गावाहिनी में शक्ति प्रबल है,
प्रण विश्वहिंदू परिषद का अटल है,
जय श्री राम,
प्रण विश्वहिंदू परिषद का अटल है,
जो हिमगिरि की चट्टान ।
अयोध्या करती है आव्हान
ठाट से कर मंदिर निर्माण ।
जिस दिन राम का भवन बन जाएगा,
उस दिन भारत में राम राज आएगा,
राम भक्तो का ह्रदय मुस्काएगा,
जय श्री राम,
राम भक्तो का ह्रदय मुस्काएगा,
खिलते कमल समान ।
अयोध्या करती है आव्हान
ठाट से कर मंदिर निर्माण ।
सजग हो रघुवर की संतान
ठाट से कर मंदिर निर्माण ।
॥ जय श्री राम ॥
Shrijirasik
तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार,
उदासी मन काहे को करे....
नैया तेरी राम हवाले,
लहर लहर हरि आप संभाले,
हरि आप ही उठायें तेरा भार,
उदासी मन काहे को करे....
काबू में मँझधार उसी के,
हाथों में पतवार उसी के,
तेरी हार भी नहीं है तेरी हार,
उदासी मन काहे को करे....
सहज किनारा मिल जायेगा,
परम सहारा मिल जायेगा,
डोरी सौंप के तो देख एक बार,
उदासी मन काहे को करे....
तू ‘निर्दोष’ तुझे क्या डर है,
पग पग पर साथी ईश्वर है,
सच्ची भावना से कर ले पुकार,
उदासी मन काहे को करे....
Shrijirasik
राम नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊं गली गली
राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली ।
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
दोलत के दीवानों सुन लो एक दिन ऐसा आएगा,
धन योवन और रूप खजाना येही धरा रह जाएगा ।
सुन्दर काया माटी होगी, चर्चा होगी गली गली,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
प्यारे मित्र सगे सम्बंधी इक दिन तुझे भुलायेंगे,
कल तक अपना जो कहते अग्नि पर तुझे सुलायेंगे ।
जगत सराय दो दिन की है, आखिर होगी चला चली,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
क्यूँ करता है तेरी मेरी, छोड़ दे अभिमान को,
झूठे धंदे छोड़ दे बन्दे जप ले हरी के नाम को ।
दो दिन का यह चमन खिला है, फिर मुरझाये कलि कलि,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
जिस जिस ने यह हीरे लुटे, वो तो मला माला हुए,
दुनिया के जो बने पुजारी, आखिर वो कंगाल हुए ।
धन दौलत और माया वालो, मैं समझाऊं गली गली,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
Shrijirasik
लाखों महिफिल जहां में यूँ तो,
तेरी महफ़िल सी मेहिफिल नहीं है।
स्वर्ग सम्राट हो या हो चाकर,
तेरे दर पे है दर्जा बराबर।
तेरी हस्ती को हो जिसने जाना,
कोई आलम में आखिर नहीं है॥
दरबदर खा के ठोकर जो थक कर,
आ गया गर कोई तेरे दर पर।
तूने नज़रों से जो रस पिलाया,
वो बताने के काबिल नहीं है॥
जीते मरते जो तेरी लगन में,
जलते रहते भी रहते अगन में।
है भरोसा तेरा हे मुरारी,
तू दयालु है कातिल नहीं है॥
तेरा रस्ता लगा चस्का जिसको,
लगता बैकुण्ठ फीका सा उसको।
डूब कर कोई बहार ना आया,
इस में भवरे है साहिल नहीं है॥
कर्म है उनकी निष्काम सेवा,
धर्म है उनकी इच्छा में इच्छा।
सुम दो इनके हाथों में डोरी,
यह ‘कृपालु’ हैं तंग दिल नहीं हैं॥
भजन बिना चैन ना आये राम,
कोई ना जाने कब हो जाये,
इस जीवन की शाम ॥
बोलो राम राम राम ॥
मोह-माया की आस तो पगले,
होगी कभी ना पूरी,
करते-करते भजन प्रभु का,
मिट जायेगी दूरी,
हम दूरी के साथ-साथ लो,
सब ही प्रभु का नाम,
भजन बिना चैन ना आये राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
भजन है अमृत रस का प्याला,
शाम सवेरे पीना,
इसको पीकर सारा जीवन,
मस्ती में तू जीना
भक्ति कर तो बन जायेंगे,
अपने बिगड़े काम,
भजन बिना चैन ना आये राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
भजन बिना चैन ना आये राम,
कोई ना जाने कब हो जाये,
इस जीवन की शाम ॥
बोलो राम राम राम ॥
बोलो राम राम राम ॥
ना जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥
नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
न आये मधुपुरी से गोपियों की दु:ख व्यथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ॥
न रोये बन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आँसु बहाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥
नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
न आये मधुपुरी से गोपियों की, दु: ख कथा सुनकर ।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ॥
न रोये बन गमन में , श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में , आँसु बहाते हैं ॥
कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ'बिन्दु'विधि हर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये है
लगे कुटिया भी दुल्हन सी
मेरे सरकार आये है
पखारो इन के चरणों को बहा कर प्रेम की गंगा,
बिछा दो अपनी पलकों को मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गुलशन सा अवध में राम आये हैं
सरकार आ गए है मेरे गरीब खाने में
आया दिल को सकूं उनके करीब आने में,
मुदत से प्यासी अखियो को मिला आज वो सागर
भटका था जिसको पाने की खातिर आज जमाने में
उमड़ आई मेरी आंखे देख कर अपने बाबा को
हुई रोशन मेरी गलियां मेरे सरकार आये है
सजा दो घर को गुलशन सा अवध में राम आये हैं
तुम आ कार भी नही जाना
मेरी इस सुनी दुनिया से,
कहू हर दम यही सब से मेरे सरकार आये है,
सजा दो घर को गुलशन सा अवध में राम आये हैं
Shrijirasik
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा,
जहां नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा।
यह जीवन समर्पित चरण में तुम्हारे,
तुम्ही मेरे सर्वस तुम्ही प्राण प्यारे।
तुम्हे छोड़ कर नाथ किससे कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा॥
ना कोई उलाहना, ना कोई अर्जी,
करलो करालो जो है तेरी मर्जी।
कहना भी होगा तो तुम्ही से कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा॥
दयानाथ दयनीय मेरी अवस्था,
तेरे हाथ अब मेरी सारी व्यवस्था।
जो भी कहोगे तुम, वही मैं करूँगा,
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा॥
मेरा छोटा सा संसार,
हरि आ जाओ एक बार ll
हरि आ जाओ, प्रभु आ जाओ l
मेरी नईया, पार लगा जाओ l
*मेरी बिगड़ी, आ के बना जाओ l
भक्तों की, सुनो पुकार,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,
जब याद, तुम्हारी आती है l
रह रह के मुझे, तड़पाती है l
तन मन की, सुध बिसराती है l
दूँ तन मन धन, तुझ पे वार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,
लाखों को दर्श, दिखाया है l
प्रभु मुझको क्यों, तरसाया है l
ये कैसी तुम्हारी, माया है l
नित बहती है, असुवन धार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,
मुझको बिछुड़े, युग बीत गए l
क्यों रूठ मेरे, मन मीत गए l
मै हार गया, तुम जीत गए l
अब दर्शन, दो साकार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,,
इस जग में, कौन हमारा है l
प्रभु तेरा ही, तो सहारा है l
तेरे भक्त ने, तुझे पुकारा है l
मेरी नईया, लगा दो पार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,,
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
देने वाले ने दिया, वह भी दिया किस शान से।
"मेरा है" यह लेने वाला, कह उठा अभिमान से
"मैं", ‘मेरा’ यह कहने वाला, मन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो मिला है वह हमेशा, पास रह सकता नहीं।
कब बिछुड़ जाये यह कोई, राज कह सकता नहीं।
जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया।..
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जग की सेवा खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये।
जिन्दगी का राज है, यह जानकर जी लीजिये।
साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है द
जो भी अपने पास है, वह सब किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
राम जैसा नगीना नहीं,
सारे जग की बजरिया में,
नीलमणि ही जड़ाऊँगी,
अपने मन की मुंदरियाँ मे,
राम जैसा नगीना नही,
सारे जग की बजरिया में॥
राम का नाम प्यारा लगे,
रसना पे बिठाऊँगी मैं,
मृदु मूरत बसाऊँगी,
नैनों की पुतरिया में,
राम जैसा नगीना नही,
सारे जग की बजरिया में॥
है झूठे सभी रिश्ते,
और झूठे सभी नाते,
दूजा रंग न चढ़ाऊँगी,
अपनी श्यामल चदरिया में,
राम जैसा नगीना नही,
सारे जग की बजरिया में॥
जल्दी से जतन करके,
राघव को रिझाना है,
कुछ दिन ही तो रहना है,
काया की कोठरिया में,
राम जैसा नगीना नही,
सारे जग की बजरिया में....
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