॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Ram - Peaceful Bhav
राम - शांत भाव
Bhajans (19)
Janki Nath Sahaye Kare Jab
bhajanShrijirasik
जानकी नाथ सहाय करें जब
कौन बिगाड़ करे नर तेरो ॥
सुरज मंगल सोम भृगु सुत
बुध और गुरु वरदायक तेरो ।
राहु केतु की नाहिं गम्यता
संग शनीचर होत हुचेरो ॥
दुष्ट दु:शासन विमल द्रौपदी
चीर उतार कुमंतर प्रेरो ।
ताकी सहाय करी करुणानिधि
बढ़ गये चीर के भार घनेरो ॥
जाकी सहाय करी करुणानिधि
ताके जगत में भाग बढ़े रो ।
रघुवंशी संतन सुखदायी
तुलसीदास चरनन को चेरो ॥
Jiski Naiya Ram Barose
bhajanजिसकी नैया राम भरोसे डोल भले सकती है
डूब नही सकती है ,
जिसकी नैया राम भरोसे डोल भले सकती है
मत गबराना तू संकट आये है,
संकट भी इक दिन जाल बिछाएगे,
तू है प्रेमी राम लला का तुझपर असर न होगा
बाल न बांका होगा
देर भले हो जाए गाडी छुट नही सकती है
डूब नही सकती है ,
सुनहु भरत भाबी प्रबल दिल की कहू मुनि नाथ,
हानि लाभ जीवन मरन यश उप्वश विधि आ गेयु,
कहे हनुमंत विपति प्रबु सोही जब तब सुमिरन भजन न होई
जई विधि होई नाथ हित मोरा करहु सोवेग दास मैं तोरा
केलाश देवेंदर साथ रहेगे गुरु बिर्ज मोहन से देर न हो सकती
डूब नही
Ram Ji Ke Sang Jab Hanuman Mil Gaye
bhajanबगिया के सूखे सारे,
फूल खिल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे,
दुनिया जहां के सारे,
पाप धुल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे ।।
राम जी से जुड़े जैसे,
मेरे हनुमान हैं,
कष्ट सारे हर ले वो,
ऐसे मेरे राम हैं,
तेरी कृपा से बाबा,
बना मेरा काम है,
सबसे निराला जग में,
बाबा तेरा नाम है,
बगिया के सूखे सारे,
फूल खिल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे ।।
मेरे साथ-साथ,
राम राम गाइए,
राम जी पुकारे,
हनुमान आइए,
उसका ही सहारा है,
वो पार भी लगाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे,
बगिया के सूखे सारे,
फूल खिल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे ।।
दुनिया जहां के सारे,
पाप धुल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे ll
बगिया के सूखे सारे,
फूल खिल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल जाएंगे,
दुनिया जहां के सारे,
पाप धुल जाएंगे,
राम जी के संग,
हनुमान मिल
Kripa Ke Bina Kaam Banta Nahin Hai
bhajanपरिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,
कृपा के बिना काम चलता नहीं है,
निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक,
दया भानु जब तक निकलता नहीं है,
अमित वासनाये अमित रूप ले कर,
अंत करण में उपद्रव मचाती,
तब फिर कृपासिंधु श्री राम जी के,
अनुग्रह बिना मन सम्बलता नहीं है,
म्रगवारी जैसे असत इस जगत से,
पुरुषार्थ के बल पर बचना है मुश्किल,
श्री हरि के सेवक जो छल छोड़ बनते,
उन्हें फिर ये संसार छलता नहीं है,
सद्गुरू शुभाशीष पाने से पहले,
जलता नहीं ग्यान दीपक भी घर में,
बहती न तब तक समर्पण की धारा,
अहंकार जब तक घलता नहीं है
राजेश्वरानन्द आनंद अपना,
पाकर ही लगता है ये जग जाल सपना,
तन बदले कितने भी पर प्रभु भजन बिन,
कभी जन का जीवन बदलता नहीं
श्रेणी
Jiski Naiya Ram Bharose Doob Nahin Sakti Hai
bhajanजिसकी नईया राम भरोसे, जिसकी नईया राम भरोसे
डोल भले सकती है डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है
जिसकी नईया राम भरोसे
डोल भले सकती है डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
मत घबराना तू (आ आ)
संकट आऐगे (आ आ)
संकट भी एक दिन (आ आ)
जाने बिछाऐंगे (आ आ)
मत घबराना तू (आ आ)
संकट आऐगे (आ आ)
संकट भी एक दिन (आ आ)
जाने बिछाऐंगे (आ आ)
तू है प्रेमी राम लला का
तू है प्रेमी राम लला का
तूझ पर असर ना होगा बाल ना बांका होगा
हो ओ देर भले हो जाऐ गाड़ी छुट नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
हम्म हम्म हम्म हम्म
हो हो हो हो
सुनहू भरत भावे प्रबल
आ आ आ आ
बिलखी कह्यु मुन्नी नाथ
आ आ आ आ
हानी लाभ जीवन मरण
आ आ आ आ
यश अपयश विधि हाथे
आ आ आ आ
सुनहू भरत भावे प्रबल
आ आ आ आ
बिलखी कह्यु मुन्नी नाथ
आ आ आ आ
हानी लाभ जीवन मरण
आ आ आ आ
यश अपयश विधि हाथे
आ आ आ आ
कहै हनुमन्त विपती प्रभु सोई
जब तब सुमिरन भजन ना होई
जेहि विधि होई नाथ हित मोरा करहू सो देगी दास मैं तोहरा
हो ओ कैलाश देवेन्द्र साथ रहेगे गुरु वृजमोहन से देर ना हो सकती
देर नहीं हो सकती
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
जिसकी नईया राम भरोसे
डोल भले सकती है डूब नहीं सकती है
डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है, डूब नहीं सकती है
Na Ram Naam Leeno Tene Bhari Jawani Mein
bhajanना राम नाम लीनो तेने भरी जवानी में, तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में ,
ना राम नाम लीनो तेने भरी जवानी में,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में ,
क्या लायो आटी में मिल जायगो माटी में,
एक दिन काया तेरी मिल जाएगी काठी में,
पानी का बबूला है, मिल जायेगो पानी में,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में,
क्यों करता मेरा मेरा यहाँ कुछ भी नहीं है तेरा,
एक दिन होगा भैया तेरा मरघट में डेरा ,
कछु कमाई के लेजा रे ऐसी जिंदगानी में,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी में,
कर सच्ची भक्ति है भक्ति में शक्ति है,
या भक्ति से भैया मिल जाएगी मुक्ति है ,
तेने बालापन खोयो यो आनाकानी में ,
तू डूब के मर जा रे चुल्लू भर पानी
Ram Ki Mahima Nyari Teenon Lok Mein Chalat Hai Bhav: Mahima Bhav / Sant
bhajanएक का मतलब एक राम है दो से दुनिया दारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
चार से चारो धाम पांच से पांचो तख्त बलधारी,
जैसे छाओ धुप साथ से साधु संगत सारी,
सत्संगी वचनो से सुन कर मन होता सुखहारी ,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
आठ से आठो याम है पूजा नो से शुभ नवराते,
दस से दसो दिशाएं राम की और झूठी सब बाते,
राम शरण में इक दिन जाना सब को बारी बारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
ग्यारा की गिनती से गंगा शिव के शीश विराजी,
बारहा से भरमा और विष्णु हो जाते है राजी,
भागी रथ के जैसा घर में बन देख पुजारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
कभी न साथ निभाये तेरी मोह माया की गिनती,
बन जाएगा काज विरागी करले प्रभु से विनती,
सब के ही भंडार भरे वो सबका है भंडारी,
तीन से तीनो लोक चलत है राम की महिमा न्यारी,
Kaam Hoga Wahi Jo Tum Chahoge, Ram Apne Swami Ko Sevak Kya Samjhayega
bhajanकाम होगा वही जिसे चाहोगे राम,
अपने स्वामी को सेवक क्या समजाये गा
सागर में तैर रही पत्थर ये सारे,
इन में वसे है श्री राम हमारे,
वही डूब गये पत्थर नहीं जिस में राम,
अपने स्वामी को सेवक क्या समजाये गा
लंका जलाये छोटा सा बानर,
असुरो को मार दिया पार कियाँ सागर,
बड़ी महिमा है नाम की तुम्हारे हे राम,
अपने स्वामी को सेवक क्या समजाये गा
हां भगति में कहे हनुमान जी,
तो सीने से अपने लगाए है राम जी,
भगत तुम सा नहीं कोई बोले है राम,
अपने स्वामी को सेवक क्या समजाये गा
श्रेणीराम भजन
Jaise Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko
bhajanShrijirasik
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
भटका हुआ मेरा मन था कोई, मिल ना रहा था सहारा।
लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा। मिल ना रहा हो किनारा।
इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी।
उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी। जो थी अमावस अँधेरी।
युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया।
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ।
फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ। मैं ना कबी डगमगाऊ।
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया।
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...
Mangal Bhavan Amangal Haari
bhajanShrijirasik
मंगल भवन अमंगल हारी
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी
.
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
.
हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी
.
जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू
.
हो, जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरति देखी तिन तैसी
.
रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई
.
हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता
राम सिया राम, सिया राम जय जय राम।
“meri Jhopdi Ke Bhaag Aaj Khul Jayenge
bhajanShrijirasik
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे….(2)
राम आएँगे आएँगे,
राम आएँगे…..(2)
मेरी झोपडी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे….(2)
राम आएँगे तो,
अंगना सजाऊँगी,
दिप जलाके,
दिवाली में मनाऊँगी….(2)
मेरे जन्मो के सारे,
पाप मिट जाएंगे
राम आएँगे,
मेरी झोपडी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे…
राम झूलेंगे तो,
पालना झुलाऊँगी,
मीठे मीठे मैं,
भजन सुनाऊँगी….(2)
मेरी जिंदगी के,
सारे दुःख मिट जाएँगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपडी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥
मैं तो रूचि रूचि,
भोग लगाऊँगी,
माखन मिश्री मैं,
राम को खिलाऊंगी….(2)
प्यारी प्यारी राधे,
प्यारे श्याम संग आएँगे,
श्याम आएँगे,
राम आएँगे….(2)
राम आएँगे आएँगे,
राम आएँगे…..(2)
मेरी झोपडी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥
मेरा जनम सफल,
हो जाएगा,
तन झूमेगा और,
मन गीत गाएगा…..(2)
राम सुन्दर मेरी,
किस्मत चमकाएंगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे…
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे,
राम आएँगे आएँगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपडी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे…
Lakhi Mehfil Jaha M Yu To Teri Mehfil Si Mehfil Nhi H
bhajanShrijirasik
लाखों महिफिल जहां में यूँ तो,
तेरी महफ़िल सी मेहिफिल नहीं है।
स्वर्ग सम्राट हो या हो चाकर,
तेरे दर पे है दर्जा बराबर।
तेरी हस्ती को हो जिसने जाना,
कोई आलम में आखिर नहीं है॥
दरबदर खा के ठोकर जो थक कर,
आ गया गर कोई तेरे दर पर।
तूने नज़रों से जो रस पिलाया,
वो बताने के काबिल नहीं है॥
जीते मरते जो तेरी लगन में,
जलते रहते भी रहते अगन में।
है भरोसा तेरा हे मुरारी,
तू दयालु है कातिल नहीं है॥
तेरा रस्ता लगा चस्का जिसको,
लगता बैकुण्ठ फीका सा उसको।
डूब कर कोई बहार ना आया,
इस में भवरे है साहिल नहीं है॥
कर्म है उनकी निष्काम सेवा,
धर्म है उनकी इच्छा में इच्छा।
सुम दो इनके हाथों में डोरी,
यह ‘कृपालु’ हैं तंग दिल नहीं हैं॥
Insaf Ka Dar H Tera Ye Hi Soch Ke Aata Hu
bhajanShrijirasik
इंसाफ का दर है तेरा येही सोच के आता हु,
हर वार तेरे दर से खाली ही जाता हु,
आवाज लगाता हु क्यों जवाब नहीं मिलता,
दानी हो सबसे बड़े मुझको तो नहीं लगता,
शायद किस्मत में नहीं दिल को समजता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
जज्बात दिलो के प्रभु धीरे से सुनाता हु,
देखे न कही कोई हालत छुपाता हु,
सब हस्ते है मुझ पर मैं आंसू बहाता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
देने को सताने का अंदाज़ पुराना है,
देरी से आने का बस एक बहाना है,
खाली जाने से प्रभु दिल में शर्माता हु,
इंसाफ का दर है तेरा.....
हैरान हु प्रभु तुम में दुखियो को लौटाया है,
फिर किस के लिए तुमने दरबार लगाया है,
वनवारी महिमा तेरी कुछ समज न पाता हु
इंसाफ का दर है तेरा......
Na Bhatko Moh Se Pyare Ye Rishte Tut Jayenge
bhajanShrijirasik
न भटको मोह से प्यारे,
ये रिश्ते टूट जाएँगे ।
जिन्हे अपने समझते हो,
कभी वे रूठ जाएँगे ।।
जगत के रिश्ते-नाते सब,
ये छूटेंगे मरोगे जब ।
जिसे दौलत समझते हो,
कभी सब लूट जाएँगे ।।
न भटको.....
सभी विपदा से रोते हैं,
नहीं कोई सुखी जग में ।
अगर प्रभु को सुमिर ले तो,
तेरे गम छूट जाएँगे।।
न भटको.....
सफल नर जन्म करना हो,
तो प्रभु की भक्ति कर लेना ।
कान्त यदि ध्यान यह धरले,
मोह सब छूट जाएँगे ।।
न भटको.....
Jis Bhajan Me Ram Ka Naam Na Ho
bhajanShrijirasik
जिस भजन में राम का नाम ना हो, उस भजन को गाना ना चाहिए।
चाहे बेटा कितना प्यारा हो, उसे सर पे चढ़ाना ना चाहिए।
चाहे बेटी कितनी लाडली हो, घर घर ने घुमाना ना चाहिए॥
जिस माँ ने हम को जनम दिया, दिल उसका दुखाना ना चाहिए।
जिस पिता ने हम को पाला है, उसे कभी रुलाना चाहिए॥
चाहे पत्नी कितनी प्यारी हो, उसे भेद बताना ना चाहिए।
चाहे मैया कितनी बैरी हो, उसे राज़ छुपाना ना चाहिए॥
Ham Katha Sunate Ram Sakal Gun Dham Ki Ye Ramayan H Punya Katha Shriram Ki
bhajanShrijirasik
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
(दोहा – ॐ श्री महागणाधिपतये नमः,
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्याय नमः,
वाल्मीकि गुरुदेव के,
पद पंकज सिर नाय,
सुमिरे मात सरस्वती,
हम पर होऊ सहाय,
मात पिता की वंदना,
करते बारम्बार,
गुरुजन राजा प्रजाजन,
नमन करो स्वीकार)
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
जम्बुद्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते भारतवर्षे,
एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,
यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा,
संतति हेतु यज्ञ करवाया,
धर्म यज्ञ का शुभफल पाया,
नृप घर जन्मे चार कुमारा,
रघुकुल दीप जगत आधारा,
चारों भ्रातो के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, रामा….
गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पूरण हुई शिक्षा, रघुवर पूरण काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….
मृदु स्वर कोमल भावना,
रोचक प्रस्तुति ढंग,
एक एक कर वर्णन करे,
लव कुश राम प्रसंग,
विश्वामित्र महामुनि राई,
इनके संग चले दोउ भाई,
कैसे राम ताड़का मारी,
कैसे नाथ अहिल्या तारी…
मुनिवर विश्वामित्र तब,
संग ले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर देखने,
पहुचे मिथिला धाम…
जनकपुर उत्सव है भारी,
जनकपुर उत्सव है भारी,
अपने वर का चयन करेगी,
सीता सुकुमारी,
जनकपुर उत्सव है भारी…
जनकराज का कठिन प्रण,
सुनो सुनो सब कोई,
जो तोड़े शिव धनुष को,
सो सीता पति होई…
को तोडे शिव धनुष कठोर,
सब की दृष्टि राम की ओर,
राम विनयगुण के अवतार,
गुरुवर की आज्ञा सिरधार…
सहज भाव से शिव धनु तोड़ा,
जनक सुता संग नाता जोड़ा…
रघुवर जैसा और ना कोई,
सीता की समता नहीं होई,
जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की….
सब पर शब्द मोहिनी डारी,
मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी,
यों दिन रैन जात है बीते,
लव कुश ने सब के मन जीते,
वन गमन, सीता हरन, हनुमंत मिलन,
लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन…
सविस्तार सब कथा सुनाई,
राजा राम भए रघुराई,
राम राज आयो सुख दायी,
सुख समृद्धि श्री घर घर आई…
काल चक्र ने घटना क्रम में,
ऐसा चक्र चलाया,
राम सिया के जीवन में फिर,
घोर अंधेरा छाया….
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया,
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने,
मिथ्या दोष लगाया,
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया….
चल दी सिया जब तोड़ कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाषाण हृदयो में ना,
अंगारे जगे विद्रोह के…
ममतामयी माँओ के आँचल,
भी सिमट कर रह गए,
गुरुदेव ज्ञान और नीति के,
सागर भी घट कर रह गए…
ना रघुकुल ना रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
मानवता को खो बैठे जब,
सभ्य नगर के वासी,
तब सीता को हुआ सहायक,
वन का ऐक सन्यासी….
उन ऋषि परम उदार का,
वाल्मीकि शुभ नाम,
सीता को आश्रय दिया,
ले आए निज धाम….
रघुकुल में कुलदीप जलाए,
राम के दो सूत सिय ने जाए…
(श्रोता गण, जो एक राजा की पुत्री है,
एक राजा की पुत्रवधू हैं,
और एक चक्रवर्ती राजा की पत्नी है,
वही महारानी सीता,
वनवास के दुखो में,
अपने दिन कैसे काटती हैं,
अपने कुल के गौरव और,
स्वाभिमान की रक्षा करते हुए,
किसी से सहायता मांगे बिना,
कैसे अपने काम वो स्वयं करती है,
स्वयं वन से लकड़ी काटती है,
स्वयं अपना धान कूटती है,
स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं,
और अपनी संतान को,
स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देती है,
अब उसकी करुण झांकी देखिये)
जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की,
राज-रानी होके दिन वन में बिताती हैं…
रहते थे घेरे जिसे दास-दासी आठो याम,
दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है…
धरम प्रवीन सती परम कुलिन सब,
विधि दोशहीन जीना दुख में सिखाती हैं,
जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है…
कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया काटती है,
करम लिखे को पर काट नहीं पाती है…
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था,
दुख भरे जीवन का बोज वो उठाती है…
अर्धागिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भर्ती है नीर, नीर नैन में ना लाती है,
जिसकी प्रजा के अपवादों कुचक्र में वो,
पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है,
पालती है बच्चो कों वो कर्म योगिनी की भांति,
स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं,
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते,
निठुर नियति को दया भी नहीं आती है….
ओ…उस दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सूत श्री राम तिहारे…
ओ… सीता माँ की आँख के तारे,
लव-कुश है पितु नाम हमारे…
हे पितु भाग्य हमारे जागे,
राम कथा कही राम के आगे ||
Bhaj Man Ram Charan Sukhdayi
bhajanभजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
जिहि चरननसे निकसी सुरसरि
संकर जटा समाई ।
जटासंकरी नाम परयो है
त्रिभुवन तारन आई ॥
भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
जिन चरननकी चरनपादुका
भरत रह्यो लव लाई ।
सोइ चरन केवट धोइ लीने
तब हरि नाव चलाई/चढ़ाई ॥
भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
सोइ चरन संत जन सेवत
सदा रहत सुखदाई ।
सोइ चरन गौतमऋषि-नारी
परसि परमपद पाई ॥
भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
दंडकबन प्रभु पावन कीन्हो
ऋषियन त्रास मिटाई ।
सोई प्रभु त्रिलोकके स्वामी
कनक मृगा सँग धाई ॥
भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
कपि सुग्रीव बंधु भय-ब्याकुल
तिन जय छत्र फिराई/धराई ।
रिपु को अनुज बिभीषन निसिचर
परसत लंका पाई ॥
भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
सिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक
सेष सहस मुख गाई ।
तुलसीदास मारुत-सुतकी प्रभु
निज मुख करत बड़ाई ॥
भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥
Ram Ka Gungaan Kariye I
bhajanराम का गुणगान करिये,
राम का गुणगान करिये,
राम प्रभु की भद्रता का,
सभ्यता का ध्यान धरिये, ध्यान धरिये ।
राम का गुणगान करिये,
राम का गुणगान करिये,
राम प्रभु की भद्रता का,
सभ्यता का ध्यान धरिये, ध्यान धरिये ।
राम के गुण गुणचिरंतन,
राम के गुण गुणचिरंतन,
राम…राम…राम…राम…
हो राम के गुण गुणचिरंतन,
राम गुण सुमिरन रतन धन,
मनुजता को कर विभूषित,
मनुज को धनवान करिये, ध्यान धरिये ।
राम का गुणगान करिये,
राम का गुणगान करिये…
सगुण ब्रह्म स्वरुप सुन्दर,
सगुण ब्रह्म स्वरुप सुन्दर,
सुजन रंजन रूप सुखकर,
हो सुजन रंजन रूप सुखकर,
राम आत्माराम,
आत्माराम का सम्मान करिये, ध्यान धरिये ।
राम का गुणगान करिये,
राम का गुणगान करिये,
राम प्रभु की भद्रता का,
सभ्यता का ध्यान धरिये, ध्यान धरिये ।
M Nahi Mera Nhi Yah Tan Kisi Ka H Diya
bhajanमैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
देने वाले ने दिया, वह भी दिया किस शान से।
"मेरा है" यह लेने वाला, कह उठा अभिमान से
"मैं", ‘मेरा’ यह कहने वाला, मन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो मिला है वह हमेशा, पास रह सकता नहीं।
कब बिछुड़ जाये यह कोई, राज कह सकता नहीं।
जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया।..
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जग की सेवा खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये।
जिन्दगी का राज है, यह जानकर जी लीजिये।
साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है द
जो भी अपने पास है, वह सब किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
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