॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Krishna - Peaceful Bhav
कृष्ण - शांत भाव

॥ राधे राधे ॥

Shrijirasik
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले - २
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले
श्री गंगा जी का तट हो,
यमुना का वंशीवट हो
मेरा सांवरा निकट हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
पीताम्बरी कसी हो
छवि मन में यह बसी हो
होठों पे कुछ हसी हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
श्री वृन्दावन का स्थल हो
मेरे मुख में तुलसी दल हो
विष्णु चरण का जल हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
जब कंठ प्राण आवे
कोई रोग ना सतावे
यम दर्शना दिखावे
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
उस वक़्त जल्दी आना
नहीं श्याम भूल जाना
राधा को साथ लाना
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
सुधि होवे नाही तन की
तैयारी हो गमन की
लकड़ी हो ब्रज के वन की
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
एक भक्त की है अर्जी
खुदगर्ज की है गरजी
आगे तुम्हारी मर्जी
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
ये नेक सी अरज है
मानो तो क्या हरज है
कुछ आप का फरज है
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
Shrijirasik
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
Shrijirasik
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
ो हो जाओ तोरे चरण कमल पर वारि
हे गोपाल गोविन्द मुरारि
हे गोपाल गोविन्द मुरारि
शरणागत हूँ बल तिहार
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
कितना घना बना पाना अँधियारा
कितना घना बना पाना अँधियारा
गुलता मैं सारा का सारा
गुलता मैं सारा का सारा
तू ही मेरा एक आधार
आ आ आ आ…
तू ही मेरा एक आधार
शरणागत हुँ बल तिहार
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
सुन नान न्न पवन जकरा
सनं पवन जकरा आता
सनं पवन जकरा आता
हरा मन थकता गबराते
हरा मन थकता गबराते
टूट रहा सांसो का तार
टूट रहा सांसो का तार
शरणागत हुँ बल तिहार
जाऊ तेरे चरण पर वारि
हे गोपाल गोविन्द मुरारि
शरणागत हूँ बल तिहार
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
मोर पंख की किरण जगा कर जगा कर
मोर पंख की किरण जगा कर
अधारु पर मुस्कान उगा कर
अधारु पर मुस्कान उगा कर
हर ले मन की पीर ापर
हर ले मन की पीर ापर
शरणागत हूँ बल तिहार
जाऊ तेरे चरण पर वारि
हे गोपाल गोविन्द मुरारि
शरणागत हूँ बल तिहार
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि
जाऊ तेरे चरण कमल पर वारि.
Shrijirasik
तुमने ठुकराया कान्हा तो कहां पर जाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा,
तुमने ठुकराया कान्हा तो कहां पर जाऊंगा.....
हे दयामय कर दया की भीख दो,
हाथ किसके दर पे जा फैलाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
जिंदगी पापो में सारी कट गई,
किस तरह मुंह आपको दिखलाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
मुझको ना तारो मुझे दो कुछ सजा,
पापियों में नाम मैं कर जाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
हे श्यामा मेरी खता सब माफ कर,
उम्र सारी गीत तेरे गाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
Shrijirasik
जय जय राधा रमण हरी बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
मन तेरा बोले राधेकृष्णा,
तन तेरा बोले राधेकृष्णा,
जिव्हा तेरी बोले राधेकृष्णा,
मुख से निकले राधेकृष्णा,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
पलकें तेरी बोले राधेकृष्णा,
अलके तेरी बोले राधेकृष्णा,
आँखे तेरी बोले राधेकृष्णा,
साँसे तेरी बोले राधेकृष्णा,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
धड़कन बोले राधेकृष्णा,
तड़पन बोले राधेकृष्णा,
अंतर बोले राधेकृष्णा,
रोम रोम बोले राधेकृष्णा,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
पंछी बोले राधेकृष्णा,
भंवरे बोले राधेकृष्णा,
बंशी बोले राधेकृष्णा,
वीणा बोले राधेकृष्णा,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
वृन्दावन में राधेकृष्णा,
बरसाने में राधेकृष्णा,
गोवर्धन में राधेकृष्णा,
नंदगांव में राधेकृष्णा,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
मुनिजन बोले राधेकृष्णा,
गुरुजन बोले राधेकृष्णा,
हम सब बोले राधेकृष्णा,
सब जग बोले राधेकृष्णा,
जय जय राधा रमण हरि बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
जय जय राधा रमण हरी बोल,
जय जय राधा रमण हरि बोल ||
Shrijirasik
तर्ज – सांवली सूरत पे मोहन
हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा,
मेरे इन होठों पे हैं,
नाम प्रियाकांत प्यारा,
मेरे इन होठों पे हैं.......
बांकी छवि बांकी अदा,
बांकी हंसी बांका चलन,
रूबरू बांका नज़ारा,
मेरे इन होठों पे हैं,
नाम प्रियाकांत प्यारा,
मेरे इन होठों पे हैं...........
एक सूरत आपकी,
और दीवाना सारा जहां,
हाल जो होगा हमारा,
मेरे इन होठों पे हैं,
नाम प्रियकांत प्यारा,
मेरे इन होठों पे हैं.........
मेरी आँखों में कटीली,
अपनी आँखे डालकर,
जो किया तुमने इशारा,
मेरे इन होठों पे हैं,
नाम प्रियकांत प्यारा,
मेरे इन होठों पे हैं.........
हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा,
मेरे इन होठों पे हैं,
नाम प्रियाकांत प्यारा,
मेरे इन होठों पे हैं.........
Shrijirasik
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ,चरणों में
थोड़ी जगह चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूं...
अज्ञानता ने डेरा जमाया,किया मन को
चंचल ऐसा लुभाया
ले लो शरण में शरण चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूं...
उठे चाहे अंधी तूफ़ान आये,मेरे मन को
भगवन डिगा नहीं पाए
विश्वाश ऐसा तेरा चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ...
नज़रें कर्मं गर हुई ना तुम्हारी,रहेगी
उजड़ती आशा की क्यारी
खिले फूल गुलशन सदा चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ...
विनती सुनों ना मेरी कन्हैयां,मिले भीख
तेरी दया की कन्हैयां
नंदू दिवाना बनुं चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ...
Shrijirasik
कई जन्मों से बुला रही हु कोई तो रिश्ता जरूर होगा॥
नज़रो से नज़ारे मिला ना पायी मेरी नज़र का कसूर होगा॥
तुम्ही तो मेरे मात पिता हो॥
तुम्ही तो मेरे बंदु सखा हो॥
कितने ही नाते तुम संग जोड़े,
कोई नाता तो जरुर होगा,
कई जन्मों से बुला रही हु........
कभी भुलाते हो वृदावन मे॥
कभी भुलाते हो मधुवन मे॥
अपने तो मै रोज भुलाते
मेरे घर भी आना जरुर होगा
कई जन्मों से बुला रही हु......
तुम्हे तो मेरे आत्मा हो॥
तुम्ही तो मेरे परमात्मा हो॥
तुझी में रह कर तुझी से पर्दा
पर्दा हटना जरुर होगा
कई जन्मों से बुला रही हु......
अखो में बस गई तस्वीर तेरी॥
दिल मेरा हो गया जागीर तेरी॥
दासी की बिनती तुम्हारे आगे
दर्श दिखना जरूर होगा
Shrijirasik
तोरा मन दर्पण...
तोरा मन दर्पण कहलाए
भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाए
तेरा मन दर्पण कहलाए...
मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब-जब फैले जग उजियारा होय
इस उजले दर्पण पे प्राणी धूल न जमने पाए
तोरा मन दर्पण कहलाए...
सुख की कलियां दुख के कांटे मन सबका आधार
मन से कोई बात छिपे ना मन के नैन हजार
जग से कोई भाग ले चाहे, मन से भाग न पाए
तोरा मन दर्पण कहलाए...
तप की दौलत ढलती छाया मन का धन अनमोल
तन के कारण मन के धन को मत माटी में रोल
मन की कदर भुलाने वाला हीरा-जन्म गंवाए तोरा मन दर्पण कहलाए...
ऐसी लागी लगन,
मीरा हो गयी मगन,
वो तो गली गली,
हरी गुण गाने लगी ॥
है आँख वो जो,
श्याम का दर्शन किया करे,
है शीश जो प्रभु चरण में,
वंदन किया करे,
बेकार वो मुख है,
जो रहे व्यर्थ बातों में,
मुख है वो जो हरी नाम का,
सुमिरन किया करे ॥
हीरे मोती से नहीं,
शोभा है हाथ की,
है हाथ जो भगवान का,
पुजन किया करे,
मर कर भी अमर नाम है,
उस जीव का जग में,
प्रभु प्रेम में बलिदान जो,
जीवन किया करे ॥
ऐसी लागी लगन,
मीरा हो गयी मगन,
वो तो गली गली,
हरी गुण गाने लगी,
महलों में पली,
बन के जोगन चली,
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी,
ऐंसी लागी लगन,
मीरा हो गयी मगन। ॥
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी,
बैठ संतो के संग,
रंगी मोहन के रंग,
मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी,
वो तो गली गली,
हरी गुण गाने लगी,
ऐंसी लागी लगन,
मीरा हो गयी मगन ॥
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,
मीरा सागर में सरिता समाने लगी,
दुःख लाखों सहे, मुख से गोविन्द कहे,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी,
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥
ऐसी लागी लगन,
मीरा हो गयी मगन,
वो तो गली गली,
हरी गुण गाने लगी ॥
Shrijirasik
मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको,
बनके जोगन डोलत ब्रज में, बन के जोगन डोलत ब्रज में,
पीवत यमुना जल को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण,
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण,
वृंदावन की कुंज गलिन में, वृन्दावन की कुंज गलिन में,
मिल जाओ प्रभु मुझको,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ...
इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण,
इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण,
अंत समय आनंद मिले मोहे, अंत समय आनंद मिले मोहे,
बस वेणु के रस को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ....
याद में तोरी भई बावरी, सुध लो मोरी कुंज बिहारी,
याद में तोरी भई बावरी, सुध लो मोरी कुंज बिहारी,
अब आओ मेरे प्राण पियारे, अब आओ मेरे प्राण पियारे,
अपनाओ या जन को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको.
मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको,
बनके जोगन डोलत ब्रज में, बन के जोगन डोलत ब्रज में,
पीवत यमुना जल को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ...
Shrijirasik
छीन ले, छीन ले, छीन ले, छीन ले
छीन ले हस के सबका ये मन
सखी रे मेरो राधा रमण
छीन ले हस के सबका ये मन
सखी रे मेरो राधा रमण
राधा रमण मेरो राधा रमण जी
राधा रमण मेरो राधा रमण
राधा रमण मेरो राधा रमण जी
राधा रमण मेरो राधा रमण
छीन ले हस के सबका ये मन
सखी रे मेरो राधा रमण
मुखड़े को देख कोटि चंदा लजाये
घुंघराली लट पे घटायें वारी जाये
मुखड़े को देख कोटि चंदा लजाये
घुंघराली लट पे घटायें वारी जाये
घटायें वारी जाये, घटायें वारी जाये
घटायें वारी जाये, घटायें वारी जाये
याके जादू, याके जादू
याके जादू भरे दो नयन
सखी रे मेरो राधा रमण
पतली कमर किन्तु अंग है रखीले
अधरों पे अमृत है नैना नशीले
पतली कमर किन्तु अंग है रखीले
अधरों पे अमृत है नैना नशीले
नैना नशीले, नैना नशीले
नैना नशीले, नैना नशीले
थोडा बचपन, थोडा बचपन
थोडा बचपन थोडा यौवन
सखी रे मेरो राधा रमण
फूलन की सोहे गले माला वैजन्ती
कमरिया काली और पटका बसंती
फूलन की सोहे गले माला वैजन्ती
कमरिया काली और पटका बसंती
पटका बसंती, पटका बसंती
पटका बसंती, पटका बसंती
याके पैंजनिया, याके पैंजनिया
याके पैंजनिया बाजे झरम
सखी रे मेरो राधा रमण
राधा हृदय में करे रमण बिहारी
दोवन की एक छवि लागे अतिप्यारी
राधा हृदय में करे रमण बिहारी
दोवन की एक छवि लागे अतिप्यारी
लागे अतिप्यारी, लागे अतिप्यारी
लागे अतिप्यारी, लागे अतिप्यारी
राधा बिजली के, राधा बिजली के
राधा बिजली के साथ श्याम घन
सखी रे मेरो राधा रमण
Shrijirasik
जादू करके, जादू करके, जादू करके -2
जादू करके , ओह जादू करके , जादू करके ओ पिया गयो जादू करके
जादू करके , जादू करके, जादू करके ओह जादू करके
कित गयो जादू करके…
नन्दनंदन पिया कपट जो कीनो-2
निकल गयो, निकल गयो छल करके
जादू करके, जादू करके, जादू करके -2
ओ पिया कित गयो जादू करक……
मोर मुकुट पिताम्बर सोहे — 5
कबहु मिले ,कबहु मिले ,कबहु मिले ,
आग भरके जादू करके,
जादू करके -4
ओ पिया कित जादू करके…-2
मीरा दासी शरण जाे आई -5
चरणकमल, चरणकमल ,चरणकमल चित धरके
जादू करके, जादू करके -3
ओ पिया कित गयो जादू करके…
गिरधार नागर कहती मीरा -2
नटवर नागर कहती मीरा -2
गिरधार नागर कहती -2
जादू करके, जादू करके, जादू करके -2
जादू करके , ओह जादू गयो करके , जादू करके ओ पिया गयो जादू करके
जादू करके , जादू करके, जादू करके ओह जादू करके
कित गयो जादू करके…
Shrijirasik
जय प्राणधन राधारमण...
श्री गोपाल भट्ट जू के लाडले...!!
जय श्याम सुन्दर..अधर मुरली,
बजत तानन आडिले
जय प्राणधन राधारमण....!!
जय मोर मुकुट, झुकोये बाँये..
पीत अम्बर राजहि...
जय मकर कुण्डल, श्रवण झूमें ,
गण्ड मंडल भ्राजहि !!
जय प्राणधन राधारमण....
श्री गोपालभट्ट जू के लाडले..
जय बंकनयन, मधुर बैनन ,
मन्द मुस्कनी मुख सजे...
जय वैजयंती माल उर,
कटि किंकणि कल धुन सजे..
जय प्राणधन राधारमण...!!
जय कर कमल लकुटी सुरंगी ,
नव् त्रिभंगी छवि लसै...
जय चरण कमलंन नुपुरन सुर..
मञ्जरी गुण मन बसै..
जय प्राणधन राधारमण
Shrijirasik
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल,
तुम बिन रह्यो न जाय हो ॥
बृजराज लडेतोलाडिले ॥
बंक चिते मुसकाय के लाल,
सुंदर वदन दिखाय ॥
लोचन तल पे मीन ज्यों लाल,
पलछिन कल्प बिहाय हो ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
सप्त स्वर बंधान सों लाल,
मोहन वेणु बजाय ॥
सुरत सुहाइ बांधिके नेक,
मधुरे मधुर स्वर गाय हो ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
रसिक रसीली बोलनी लाल,
गिरि चढि गैयां बुलाय ॥
गांग बुलाइ धूमरी नेंक,
ऊँची टेर सुनाय हो ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
दृष्टि परी जा दिवसतें लाल,
तबते रुचे नहिं आन ॥
रजनी नींद न आवही मोहे,
बिसर्यो भोजन पान हो ॥
दर्शन को यनुमा तपे लाल,
बचन सुनन को कान हो ।
मिलिवे को हीयरो तपे मेरे,
जिय के जीवन प्राण हों ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
मन अभिलाषा ह्वे रही लाल,
लगत नयन निमेष ॥
एकटक देखूं आवतो प्यारो,
नागर नटवर भेष हों ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
पूर्ण शशि मुख देख के लाल,
चित चोट्यो बाही ठोर ॥
रूप सुधारस पान के लाल,
सादर चंद्र चकोर हो ॥
लोक लाज कुल वेद की लाल,
छांड्यो सकल विवेक ॥
कमल कली रवि ज्यों बढे लाल,
क्षणु क्षणु प्रीति विशेष हो ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
मन्मथ कोटिक वारने लाल,
देखी डगमग चाल ॥
युवती जन मन फंदना लाल,
अंबुज नयन विशाल ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
यह रट लागी लाडिले लाल,
जैसे चातक मोर ॥
प्रेम नीर वर्षाय के लाल,
नवघन नंदकिशोर हो ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
कुंज भवन क्रीडा करे लाल,
सुखनिधि मदन गोपाल ॥
हम श्री वृंदावन मालती लाल,
तुम भोगी भ्रमर भूपाल हो ॥
श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल..
युग युग अविचल राखिये लाल,
यह सुख शैल निवास ॥
श्री गोवर्धनधर रूप पें,
बलजाय चतुर्भुज दास ॥
Shrijirasik
मुझको राधा रमन, करदो ऐसा मगन,
रटूं तेरा नाम, मैं आठों याम ।
करुणानिधान मोपे कृपा कर रिझिए,
बृज में बसाके मोहे सेवा सुख दीजिए ।
प्रेम से भरदो मन, गाउँ तेरे भजन,
रटूं तेरा नाम, मैं आठों याम ॥
भाव भरे भूषणो से आपको सजाऊँ मैं,
नितनव् भोज निज हाथों से पवाऊं मैं ।
करो जब तुम शयन, दाबू तुमरे चरण,
रटूं तेरा नाम, मैं आठों याम ॥
जब भी विहार करो, प्यारी संग सांवरे,
फूल बन जाऊं जहां, धरो तुम पाँव रे ।
बनके शीतल पवन छू लूँ तेरा बदन,
रटूं तेरा नाम, मैं आठों याम ॥
तुम्हे देख जीऊं तुम्हे देख मर जाऊं मैं,
जनम जनम तेरा दास ही कहाऊं मैं ।
रख लो अपनी शरण, करदो मन में रमन,
रटूं तेरा नाम, मैं आठों याम ॥
Shrijirasik
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
तेरी मुक्ति का साधन यही है,
गुणी संतो का कहना सही है,
तेरे कष्टों को निवारे,
तुझको तारे हाँ उबारे,
तेरे ही शुभ करम।
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
काल जब आए तुझको ले जाने,
मुँह फेर लेंगे अपने बेगाने,
सच्चा साथी वो ही माटी,
जिसका दुनिया नाम गाती,
प्रभु की ले लो शरण
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
विषयो में मन को तू ना लगाना,
अंत समय में पड़े पछताना,
कीमती ये स्वास तेरी,
लाभ उठा ले कर ना देरी,
यही है तेरा धरम
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
Shrijirasik
लाखों महिफिल जहां में यूँ तो,
तेरी महफ़िल सी मेहिफिल नहीं है।
स्वर्ग सम्राट हो या हो चाकर,
तेरे दर पे है दर्जा बराबर।
तेरी हस्ती को हो जिसने जाना,
कोई आलम में आखिर नहीं है॥
दरबदर खा के ठोकर जो थक कर,
आ गया गर कोई तेरे दर पर।
तूने नज़रों से जो रस पिलाया,
वो बताने के काबिल नहीं है॥
जीते मरते जो तेरी लगन में,
जलते रहते भी रहते अगन में।
है भरोसा तेरा हे मुरारी,
तू दयालु है कातिल नहीं है॥
तेरा रस्ता लगा चस्का जिसको,
लगता बैकुण्ठ फीका सा उसको।
डूब कर कोई बहार ना आया,
इस में भवरे है साहिल नहीं है॥
कर्म है उनकी निष्काम सेवा,
धर्म है उनकी इच्छा में इच्छा।
सुम दो इनके हाथों में डोरी,
यह ‘कृपालु’ हैं तंग दिल नहीं हैं॥
Shrijirasik
इंसाफ का दर है तेरा येही सोच के आता हु,
हर वार तेरे दर से खाली ही जाता हु,
आवाज लगाता हु क्यों जवाब नहीं मिलता,
दानी हो सबसे बड़े मुझको तो नहीं लगता,
शायद किस्मत में नहीं दिल को समजता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
जज्बात दिलो के प्रभु धीरे से सुनाता हु,
देखे न कही कोई हालत छुपाता हु,
सब हस्ते है मुझ पर मैं आंसू बहाता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
देने को सताने का अंदाज़ पुराना है,
देरी से आने का बस एक बहाना है,
खाली जाने से प्रभु दिल में शर्माता हु,
इंसाफ का दर है तेरा.....
हैरान हु प्रभु तुम में दुखियो को लौटाया है,
फिर किस के लिए तुमने दरबार लगाया है,
वनवारी महिमा तेरी कुछ समज न पाता हु
इंसाफ का दर है तेरा......
Shrijirasik
दोहा - भक्तआधीनं, दीनदयालं, राधारमणं हरे हरे ॥
भक्तवत्सलं रसिकनरेशं, राधारमणं हरे हरे ।।
( तर्ज - तुम जो चले गये तो होगी बड़ी ख़राबी )
तुम राधा रमण हो मेरे मैं दास हूं तेरा
कब घर मेरे तुम आओ जहां लगता है तेरा पेहरा
दुनिया से हार कर में तेरी शरण में आया
तरसती है जिससे दुनिया उनका प्यार पाया
जब तक तुम ना मिले थे होता था निराशा चेहरा
कब घर मेरे तुम आओ जहां लगता है तेरा पेहरा
अब तुम मिल गए हो खुशियां ये मिल गई है
सूखी हुई थी बगिया देखो ये खिल गई है
तेरे दर पर मेरा यु ही लगता रहेगा डेरा
कब घर मेरे तुम आओ जहां लगता है तेरा पेहरा
तुमको ही मान अपना लकी है दर पे आया
तेरी छवि को उसने हरपल दिल में बसाया
तुम जो मुस्कुरा दो कटे सारा क्लेश मेरा
कब घर मेरे तुम आओ जहां लगता है तेरा पेहरा
Shrijirasik
न भटको मोह से प्यारे,
ये रिश्ते टूट जाएँगे ।
जिन्हे अपने समझते हो,
कभी वे रूठ जाएँगे ।।
जगत के रिश्ते-नाते सब,
ये छूटेंगे मरोगे जब ।
जिसे दौलत समझते हो,
कभी सब लूट जाएँगे ।।
न भटको.....
सभी विपदा से रोते हैं,
नहीं कोई सुखी जग में ।
अगर प्रभु को सुमिर ले तो,
तेरे गम छूट जाएँगे।।
न भटको.....
सफल नर जन्म करना हो,
तो प्रभु की भक्ति कर लेना ।
कान्त यदि ध्यान यह धरले,
मोह सब छूट जाएँगे ।।
न भटको.....
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भजन : भक्ति का जब वो सावन होगा
भक्ती का जब वो सावन होगा ।
तब तेरा तन-मन पावन होगा ।।
भक्ती करने में ही तेरा जीवन होगा ।।
तब तेरा....
जग के माया-मोह सब,
तुझको खूब फँसायेंगे ।
इनसे नहीं बचोगे तो ये,
अन्त में खूब रुलायेंगे ।।
माया से हटकर जीवन होगा।।
तब तेरा....
धन के फेरे में न पड़कर,
धर्म को खूब कमाओगे ।
जग के अच्छे कर्मों को कर,
भव से तुम तर जाओगे ।।
प्रभु का भजन मनभावन होगा।।
तब तेरा....
सदाचार को अपनाकरके,
जीवन धन्य बनाओगे ।
तभी कान्त निश्चित ईश्वर को,
एक दिन तुम पा जाओगे ।।
जब तेरे बस में, ये मन होगा ।।
तब तेरा....
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तर्ज - तुम्ही मेरी नैया किनारा तुम्ही हो
सुदामा ने पल - पल कृष्ण पुकारा
आ ओ मेरे यारा - आ ओ मेरे यारा २
सुदामा ने तो बङी आस लगाई
अब अएगा मेरा कृष्ण कन्हाई
करता तुम्हें वो याद बिचारा
आ ओ मेरे यारा - आ ओ मेरे यारा २
तुम्ही माता हो तुम्ही पिता हो
तुम्ही मेरे बन्धु तुम्ही सखा हो
पल - पल वो तेरा ध्यान लगाता
आ ओ मेरे यारा - आ ओ मेरे यारा २
क्या भोग तुमको लगाउ मै कान्हा
मेरे पास है दुखो का फसाना
तुम्हें पता है मै दुख का मारा
आ ओ मेरे यारा - आ ओ मेरे यारा २
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अगर मोह से मन सदा मोड़ दे,
बुरे कर्म अपने अगर छोड़ दे ।
तब ईश विपदा हरेगा तेरे,
मगर ईश का ध्यान करना पड़ेगा,
सखे सुन मेरे ।।
द्रोपदी को दुशासन बेपरदा करे,
पुकारी जभी लाज उसकी हरे ।
कोई ऐसा गम ना प्रभु ना हरे,
अजामिल प्रभु नाम से ही तरे ।।
गज मोक्ष देखो प्रभु ने किया,
प्रहलाद का दुःख सदा हर लिया ।
तब ईश विपदा....
कर याद प्रभु की कृपावृष्टि का,
हो जा प्रभु की दया दृष्टि का ।
प्रभु है रचयिता पूरी सृष्टि का,
बना ले तू अपना उसे दृष्टि का ।।
अगर भाव से उसको कोई भजे,
गया जो शरन में प्रभु ना तजे ।
तब ईश विपदा....
चलो राह सत की असत से डरो,
मन की न मानो न मन की सुनो ।
अगर प्रभु को पाना तुम्हें है सुनो,
प्रभु नाम को प्यारे जल्दी चुनो ।।
तुम भी चुनो कान्त प्रभु नाम को,
समय न गँवाओ तजो काम को ।
तब ईश विपदा....
रामा रामा रटते रटते,
बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥
मैं शबरी भिलनी की जाई,
भजन भाव ना जानु रे ।
राम तेरे दर्शन के हित,
वन में जीवन पालूं रे ।
चरणकमल से निर्मल करदो,
दासी की झोपड़िया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥
रोज सवेरे वन में जाकर,
फल चुन चुन कर लाऊंगी ।
अपने प्रभु के सन्मुख रख के,
प्रेम से भोग लगाऊँगी ।
मीठे मीठे बेरों की मैं,
भर लाई छबरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥
श्याम सलोनी मोहिनी मूरत,
नैयनो बीच बसाऊंगी ।
सुबह शाम नित उठकर मै तो,
तेरा ध्यान लगाऊँगी ।
[Extra/Optional]
पद पंकज की रज धर मस्तक,
जीवन सफल बनाउंगी ।
अब क्या प्रभु जी भूल गए हो,
दासी की डगरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥
नाथ तेरे दर्शन की प्यासी,
मैं अबला इक नारी हूँ ।
दर्शन बिन दोऊ नैना तरसें,
सुनलो बहुत दुखारी हूँ ।
हरी रूप में दर्शन देदो,
डालो एक नजरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥
रामा रामा रटते रटते,
बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥
दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना ।
जब से रामायण पढ़ ली है, एक बात मैंने समझ ली है,
रावण मरे ना श्री राम के बिना, लंका जले ना हनुमान के बिना ॥
लक्ष्मण का बचना मुश्किल था, कौन बूटी लाने के काबिल था,
लक्ष्मण बचे ना श्री राम के बिना, बूटी मिले ना हनुमान के बिना ॥
सीता हरण की कहानी सुनो, ‘बनवारी’ मेरी जुबानी सुनो,
वापिस मिले ना श्री राम के बिना, पता चले ना हनुमान के बिना ॥
बैठे सिंघासन पे श्री राम जी, चरणों में बैठे हैं हनुमान जी,
मुक्ति मिले ना श्री राम के बिना, भक्ति मिले ना हनुमान के बिना ॥
दोहा: राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट ।
अंत समय पछतायेगा, जब प्राण जायेंगे छूट ॥
तेरे मन में राम, तन में राम, रोम रोम में राम रे,
राम सुमीर ले, ध्यान लगाले, छोड़ जगत के काम रे ।
बोलो राम, बोलो राम, बोलो राम राम राम ॥
माया में तू उलझा उलझा धर धर धुल उडाये,
अब क्यों करता मन भारी जब माया साथ छुडाए ।
दिन तो बीता दोड़ दूप में, बीत ना जाए शाम रे,
बोलो राम, बोलो राम, बोलो राम राम राम ॥
तन के बीतर पांच लुटेरे डाल रहें हैं डेरा,
काम क्रोध मद लोभ मोह ने तुझ को कैसा घेरा ।
भूल गया तू राम रटन, भूला पूजा का काम रे,
बोलो राम, बोलो राम, बोलो राम राम राम ॥
बचपन बीता खेल खेल में भरी जवानी सोया,
देख बुढापा अब तो सोचे, क्या पाया क्या खोया ।
देर नहीं है अब भी बन्दे, लेले उस का नाम रे,
बोलो राम, बोलो राम, बोलो राम राम राम ॥राम चालीसा
राम कहने से तर जाएगा,
पार भव से उत्तर जायेगा ।
उस गली होगी चर्चा तेरी,
जिस गली से गुजर जायेगा ।
राम कहने से तर जाएगा...
बड़ी मुश्किल से नर तन मिला,
कल ना जाने किधर जाएगा ।
राम कहने से तर जाएगा...
अपना दामन तो फैला ज़रा,
कोई दातार भर जाएगा ।
राम कहने से तर जाएगा...
सब कहेंगे कहानी तेरी,
जब इधर से उधर जाएगा ।
राम कहने से तर जाएगा...
याद आएगी चेतन तेरी,
काम ऐसा जो कर जाएगा ।
राम कहने से तर जाएगा...
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मेरा हाथ पकड़ कर ले जा मेरे श्याम सांवरे ,
श्याम सांवरे , घनश्याम सांवरे ,
तुझको मैंने अपना बनाया हैं ,
इस मन को तुझी में लगाया हैं,
मेरी भक्ति करो स्वीकार, मेरे श्याम सांवरे
श्याम सांवरे, घनश्याम सांवरे,
एक बार तो लेने आ जाओ,
मुझे अपना दास बना जाओ,
मेरी विनती करो स्वीकार, मेरे श्याम सांवरे,
श्याम सांवरे, घनश्याम सांवरे,
मैंने सबसे रिश्ता तोड़ दिया,
सारे जग को मैंने छोड़ दिया,
तू ना छोड़ना मेरा हाथ, मेरे श्याम सांवरे,
श्याम सांवरे, घनश्याम सांवरे
मेरी जीवन नैया डोल रही,
बस श्याम ही श्याम बोल रही,
मेरी नैया करा दो पार, मेरे श्याम सांवरे,
श्याम सांवरे घनश्याम सांवरे
तुझ बिन जीवन में अंधेरा हैं,
श्याम तू ही मेरा सवेरा हैं,
मेरा सब कुछ तेरे नाम, मेरे श्याम सांवरे,
श्याम सांवरे, घनश्याम सांवरे
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कृष्णा ओ कृष्णा बीच भंवर मत छोड़
बीच भंवर मत छोड़
सौंप दी है मैने तुझे ये जिंदगानी
मुक्ति है हाथों तेरे बात मैंने मानी
रखना शरण तू हे कानूड़ा
रखना शरण चितचोर
बीच भंवर मत छोड़...
सुनी पुकार तूने सब भक्तन की
अंखियां भी मेरी प्यासी तेरे दरशन की
सुनी पुकार तूने सब भक्तन की
अंखियां भी मेरी प्यासी तेरे दरशन की
ढूंढू कहां तुझे हे कानूड़ा
छुप गया मखनचोर
बीच भंवर मत छोड़...
मंदिर मंदिर होती पूजा तेरी
फिर भी ना देखी कान्हा सूरत तेरी
मंदिर मंदिर होती पूजा तेरी
फिर भी ना देखी कान्हा सूरत तेरी
अंखियां मन की खोली जो मोहन
बैठा था बांहे खोल
बीच भंवर मत छोड़...
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तरज़-किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ
जब भी चाहा जिसे चाहा,तेरे प्रेम का तलबगार हुआ
तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ
तेरे सिवा...
ज़माने भर की ठोकरें,ख़ात्ते रहते हैं
तेरे ही नाम की रटना,लगाये रहते हैं
जब भी चाहा जिसे चाहा तेरे प्रेम का तलबगार हुआ
तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ
तेरे सिवा...
हां प्रेम है मुझे तुझसें,ये मैंनें माना है
ना रह सकुंगा तेरे बिन,ऐसा लगता है
जब भी चाहा जिसे चाहा,तेरे प्रेम का तलबगार हुआ
तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ
तेरे सिवा...
नाम रसका पागल हुं मैं,कहे ज़माना मुझे
धसका माया में है फंसा,आके छुड़ाओ मुझे
जब भी चाहा जिसे चाहा,तेरे प्रेम का तलबगार हुआ
तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ
तेरे सिवा
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चरणों में तेरे आके,मैं निहाल हो गया
चरणों की रज़ को पाके,मैं निहाल हो गया
चरणों में....
1. कितनें जन्मों से भटका,ना मिला कोई सहारा
तेरा सहारा पाके,भव पार हो गया
चरणों में तेरे आके,मैं निहाल हो गया
चरणों की रज़ को पाके,मैं निहाल हो गया
चरणों में....
2. पापो से डर रह था, दुःख में तड़प रहा था
आया शरणं में तेरी,चरणों से ना हटाना
चरणों में तेरे आके,मैं निहाल हो गया
चरणों की रज़ को पाके,मैं निहाल हो गया
चरणों में....
3. गुरुवर ने दे दिया है,हरीनाम रस का प्याला
धसका रहे लुटाता,ये नाम का खज़ाना
चरणों में तेरे आके,मैं निहाल हो गया
चरणों की रज़ को पाके,मैं निहाल हो गया
चरणों में....
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कुछ दो या ना दो श्याम , इस श्याम दीवानी को ,
थोड़ी भक्ति तो दे दो , तुम्हें भजन सुनाने को ,
मीरा को दी भक्ति , सबरी को दी भक्ति ,
दोनों को दी भक्ति , दोनों ने की भक्ति ,
वैसी भक्ति मुझे भी दो , श्याम तुम्हें रिझाने को ,
वैसी भक्ति मुझे भी दो , श्याम तुम्हें रिझाने को ,
कुछ दो या ना दो श्याम , इस श्याम दीवानी को ,
थोड़ी भक्ति तो दे दो , तुम्हें भजन सुनाने को ,
सबरी के खाए बेर , कर्मा के खाए भात ,
दोनों की खुली किस्मत , दोनों के खुल गए भाग ,
मैं भी लाई माखन , श्याम तुम्हें खिलाने को ,
मैं भी लाई माखन , श्याम तुम्हें खिलाने को ,
कुछ दो या ना दो श्याम , इस श्याम दीवानी को ,
थोड़ी भक्ति तो दे दो , तुम्हें भजन सुनाने को ,
राधा जी तुम्हें प्यारी , रुक्मण जी तुम्हें प्यारी ,
दोनों से प्यार किया , तुमने मेरे श्याम मुरारी ,
थोड़ा प्यार मुझे भी दो, जीवन ये बिताने को ,
थोड़ा प्यार मुझे भी दो, जीवन ये बिताने को ,
कुछ दो या ना दो श्याम , इस श्याम दीवानी को ,
थोड़ी भक्ति तो दे दो , तुम्हें भजन सुनाने को ,
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ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
हरि नाम मैं क्या बंदिश,दिन रात लिजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
हरि नाम मैं क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
ताली....
1.औरों के पास जानें से,क्या होगा फायदा
चरणों में प्रेम अश्रु की,बरसात किजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
प्रभु....
2.करने से पहले काम तूं,सौ बार दिल से पुछ
हरगिज़ ना कभी दिल से,ना घात किजिए
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
प्रभु....
3.मीरा ने पीके दुनिया को,हाला दिखा दिया
प्रभु नाम रसका प्याला,दिन रात पिजिए
ताली बजा-बजाकर, शुरुआत किजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
हरि नाम मैं क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
Shrijirasik
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी....
1.तेरे दर्शन बिन,दुखी मैं सांवरिया
कब आओगे श्याम,मेरी नगरिया
कोई तो आके मेरी,ख़बर सुनाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी....
2.मन में बसी तेरी,सांवरी सुरतिया
कैसे कटेगी मोरी,सारी उमरिया
बाली उमरिया मेरी,अति घबराये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे, आस लगाये
बैठी....
3.तेरे दर्श बिन,दुखी मैं सांवरिया
कब आओगे श्याम,मोरी नगरिया
कोई तो आके,ख़बर सुनाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी....
4.काधें पे सोहे तेरी,कारी कमरिया
मन मेरा मोहे,तेरी प्यारी बांसुरिया
मैं तो शरणं प्रभु,तेरा गुण गाऊं
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
Shrijirasik
दुनिया का बनकर देख लिया ,
अब श्याम का बनकर देख जरा ,
ना भटकेगा तू राह कभी ,
इस राह पे चलकर देख जरा ,
दुनिया का बनकर देख लिया ,
अब श्याम का बनकर देख जरा ,
रिश्तो ने दिया धोखा ,
अपनों ने दुखाया दिल ,
चल भूल जा सब बातें,
तू श्याम से आकर मिल,
मेरा श्याम तुझे अपनाएगा ,
तू राधा कहकर देख जरा,
दुनिया का बनकर देख लिया ,
अब श्याम का बनकर देख जरा ,
जिसने भी जपा राधा ,
उसकी तो हटी बाधा ,
उसको मिल गया श्याम ,
उसको मिली राधा ,
मेरा श्याम तुझे मिल जाएगा,
तू उसका बनकर देख जरा ,
दुनिया का बनकर देख लिया ,
अब श्याम का बनकर देख जरा ,
मीरा को मिले मोहन ,
सबरी को मिले हैं राम ,
इन दोनों भक्तों का ,
जग में अमर हैं नाम ,
तेरा नाम अमर हो जाएगा ,
तू भक्ति कर के देख जरा ,
दुनिया का बनकर देख लिया ,
अब श्याम का बनकर देख जरा ,
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एक बार हमसे साँवरे नज़रें मिलाईए ।
नज़रें मिला के श्याम ज़रा मुस्कुराईए...
एक बार हमसे साँवरे नज़रें...
नज़रें हमारी आपकी चौख़ठ पे है अड़ीं,
कब से निहारे राह बेचारी खड़ी-खड़ी ।
नज़रों पे कर रहम इन्हें, अब ना सताईए...
एक बार हमसे साँवरे...
दिल को तो हमने आपके चरणों में रख दिया,
दुनियाँ हमारी आप हैं इतना समझ लिया ।
अब आप अपने हाथ से इसको सजाईए...
एक बार हमसे साँवरे...
यह जानकर कि आप यहीं आस पास हैं,
फिर भी समझ ना आए ये दिल क्यों उदास है ।
ज़ज़्बात दिल के जान ज़रा पास आईए...
एक बार हमसे साँवरे...
प्रहलाद सा बनूं प्रभु हनुमत सी भक्ति दो,
गाऊँ भजन मैं झूम के मीरा सी मस्ती दो ।
भक्त को गले से अपने गले तो लगाईए...
एक बार हमसे साँवरे...
बोल बांके बिहारी लाल की... जय...
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मैं तो सोये रही सपने में,
मेरे घर आए गोपाल
मैं तो सोये रही सपने में,
मेरे घर आए गोपाल
मेरे घर आए गोपाल
मेरे घर आए गोपाल
मैं तो सोये रही सपने में
मेरे घर आए गोपाल........
धीरे से आके वाने बंसी बजाई,
मधुर मुरलिया मेरे मन भायी
मधुर मुरलिया मेरे मन भायी....
मैं तो सुन सुन हुई निहाल,
मेरे घर आए गोपाल
मैं तो सोये रही सपने में
मेरे घर आए गोपाल....
काँधे पड़ी थी बांके काली कमलिया,
तिरछे खड़े थे बांके साँवरिया
तिरछे खड़े थे बांके साँवरिया......
मोरे तन मन छायी बहार
मेरे घर आए गोपाल
मैं तो सोये रही सपने में
मेरे घर आए गोपाल....
धीरे से आके वाने मोको जगायो,
किरपा कर मोहे कंठ लगायो
किरपा कर मोहे कंठ लगायो....
मेरे जग गए भाग सुहाग
मेरे घर आए गोपाल
मैं तो सोये रही सपने में
मेरे घर आए गोपाल.....
मेरे घर आए गोपाल
मेरे घर आए गोपाल
मैं तो सोये रही सपने में
मेरे घर आए गोपाल
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मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे,
किशोरी राधे अति भोरी राधे........
प्यारी जू प्यारे की जीवन,
प्यारो प्यारी प्राण आधार
प्यारी प्यारे के उर हार,
प्यारो प्यारी के उर हार
प्यारे प्यारे रंगमहल में,
रँग भरे दो करत विहार....
रंग भरी निरखत हरकत हिय,
श्री हरि प्रिया सकल सुख सार
प्यारी जू प्यारे की जीवन
प्यारो प्यारी प्राण आधार
मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे
किशोरी राधे अति भोरी राधे................
प्रीतम की प्यारी प्रिया
प्रिया प्राण प्यारे प्रियो,
दउअन की दो छवि सिंधु में तरावे है
दऊ नव करे खेल, दऊ भुज अंश मेल,
दऊ सुख झेल झेल मंद मुस्कावे है,
लाल बलवीर वनराज के विलासी दऊ
सखिन चकोरन के लोचन सिरावे है,
गावे राग रागिनी रसीले चटकीले मुख
मधुर मधुर वैण बांसुरी सुनावे है..........
मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे.................
किशोरी राधे रस भोरी...........
मेरो प्यारो नन्दलाल किशोरी राधे.........
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तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मेरी बांसुरी का गीत हो,
तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मन मीत हो राधे मेरी मन मीत हो,
तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मेरी बांसुरी का गीत हो......
परमात्मा का स्पर्श हो...राधे,
पुलकित हिर्ध्ये का हर्ष हो,
तुम हो समपर्ण का शिखर,
तुम ही मेरा उत्कर्श हो,
तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मेरी भावना की तुम जीत हो,
तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मेरी बांसुरी का गीत हो......
हु मैं यहाँ तुम हो वहा...राधे,
तुम बिन नही है कुछ यहा,
मुझमे धडकती हो तुम्ही,
तुम दूर मुझसे हो कहा,
तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मन मीत हो राधे मेरी मन मीत हो,
तुम प्रेम हो तुम प्रीत हो मेरी बांसुरी का गीत हो.....
नटनागर मोहन गिरधारी,
नटनागर मोहन गिरधारी....
राधा कृष्णा..कृष्णा
कृष्णा राधा..कृष्णा.......
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कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में बृज की गुजारा करेंगे।
कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी,
कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी,
उन्ही के चरण चित लगाया करेंगे
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में बृज की गुजारा करेंगे।
बना करके हृदय में हम प्रेम मंदिर
वहीँ उनको झूला झुलाया करेंगे
॥ कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे...॥
उन्हें हम बिठाएंगे आँखों में दिल में
उन्ही से सदा लौ लगाया करेंगे
॥ कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे...॥
जो रूठेंगे हमसे वो बांके बिहारी
चरण को पकड़ हम मनाया करेंगे
॥ कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे...॥
उन्हें प्रेम डोर से हम बाँध लेंगे
तो फिर वो कहा भाग जाया करेंगे
॥ कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे...॥
उन्होंने छुडाये थे गज के वो बंधन
वही मेरे संकट मिटाया करेंगे
॥ कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे...॥
उन्होंने नचाया था ब्रह्माण्ड सारा
मगर अब उन्हें हम नचाया करेंगे
॥ कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे...॥
भजेंगे जहा प्रेम से नन्द नंदन
कन्हैया छवि को दिखाया करेंगे
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में बृज की गुजारा करेंगे।
कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी,
कहीं तो मिलेंगे वो बांके बिहारी,
उन्ही के चरण चित लगाया करेंगे
कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में बृज की गुजारा करेंगे।
Shrijirasik
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने॥
ना जाने कौन सी बांकी अदा तुम्हारी॥
ना जाने कौन सी बांकी अदा तुम्हारी कोरस॥
हजारो लाखो मिटे है ये ऐसी प्यारी है
कभी हमें भी मिटाओ तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया...............
जहां श्री राधा जो संग में ॥
जहां श्री राधा जो संग मे कोरस ॥
वो जमना जी का किनारा वो पुंज है प्यारे
वही पे हमको बिठा लो तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया...............
मैं लाऊ फुल तुम्हारी पसंद के प्यारे॥
मैं लाऊ फुल तुम्हारी पसंद के प्यारे कोरस ॥
बनाऊ फुल के बंगले बिराजो तुम प्यारे
मुझे ये सेवा दिलाओ तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया...............
ये आठो याम की सेवा करु तिहारी ॥
ये आठो याम की सेवा करु तिहारी कोरस॥
कहे गोविन्द मैं गांऊ तुम्हे रिझाने को
तुम भी साथ में गाओ तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने॥
तेरे बगैर सांवरिया...............
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जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
मोकों तो भावती ठौर प्यारे के नैनन में
मोकों तो भावती ठौर प्यारे के नैनन में
प्यारे भये चाहैं मेरे नैनन के तारे
प्यारे भये चाहैं मेरे नैनन के तारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
मेरे तन-मन-प्रानहूँ तें प्रीतम प्रिय आपने
मेरे तन-मन-प्रानहूँ तें प्रीतम प्रिय
कोटिक प्रान प्रीतम मोसों हारे
आपने कोटिक प्रान प्रीतम मोसों हारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं (जोई-जोई प्यारो करैं)
जैश्री 'हितहरिबंस' हंस-हंसिनी स्यामल गौर
कहौ, कौन करै जल-तरंगिनि न्यारे
कहौ, कौन करै जल-तरंगिनि न्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं (जोई-जोई प्यारो करैं)
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धुन - Perdeshiyo से न अंखियां मिलना
बांके बिहारी सुन लो विनती हमारी ,
छुटे कभी ना हमसे भक्ति तुम्हारी ,
भक्ति में तेरी ऐसा नशा हैं,
जब से चढ़ा है मजा ही मजा हैं,
उतरे कभी ना अब ये नशे की खुमारी,
बांके बिहारी सुन लो विनती हमारी,
तेरे दरस के प्यासे नैना ,
दरस बिना कहीं पाए ना चेना,
दर्शन दे दो अब तो मुरारी,
बांके बिहारी सुन लो विनती हमारी,
नैया हमारी तुम्हारे सहारे,
तुम ही लगा दो मोहन इसको किनारे,
डूबे कभी ना अब ये नैया हमारी,
बांके बिहारी सुन लो विनती हमारी,
भक्ति की हमको लगन लगा दो,
भजनों की हमको लत ये लगा दो ,
छुटे कभी ना हमसे लत ये तुम्हारी ,
बांके बिहारी सुन लो विनती हमारी.
तन तम्बूरा,तार मन
अद्भुत है ये साज
हरी के कर से बज रहा
हरी ही है आवाज
स्थाई:
तन के तम्बूरे में दो सांसो की तार बोले
जय सिया राम राम..जय राधे श्याम श्याम
अंतरा
अब तो इस मन के मंदिर में प्रभु का हुआ बसेरा
मगन हुआ मन मेरा,छूटा जनम जनम का फेरा
मन की मुरलिया में सुर का सिंगार बोले
जय सिया राम राम..जय राधे श्याम श्याम
लगन लगी लीला धारी से, जगी रे जगमग ज्योति
राम नाम का हीरा पाया, श्याम नाम का मोती
प्यासी दो अंखियो में आंसुओ के धार बोले
जय सिया राम राम..जय राधे श्याम श्याम
तन के तम्बूरे में दो सांसो की तार बोले
जय सिया राम राम..जय राधे श्याम श्याम
स्वर
बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।
मीरा पुकारी जब गिरिधर गोपाला,
ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला।
कौन मिटाए उसे, जिसे तू राखे पिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥
जब तेरी गोकुल पे आया दुख भारी,
एक इशारे से सब विपदा टारी।
मुड़ गया गोवर्धन तुने जहाँ मोड़ दिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥
नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी,
सुध बिसराएगी मुरली की धुन प्यारी।
मन के मधुबन में रास रचाए रसिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥
बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।
Shrijirasik
दिल दार यार प्यारे, गलियों में मेरी आजा॥
नैना तरस रहे है मुखड़ा जरा दिखा या
सितम गरज तो मुझ को सताये चला जा,
पर मुखड़ा जरा सा दिखाये चला जा॥
नहीं पास आने को कहती हो तुझको,
पर अपना जरा सा बनाये चला जा,
दिल दार यार पियारे, गलियों में मेरी आजा,
की दम दा भरोसा है, गलियों में मेरी आजा,
मेरा यार बनके आजा,गलियों में मेरी आजा,
नैना तरस रहे है मुखड़ा जरा दिखा या
सब लोक लाज खोए, चुप चाप बैठ रोये
अपना नहीं है कोई,अपना मुझे बनाजा।
दिल दार................
कब तक बताओ पियारे, मन को रहो में मारे॥,
किस के रहो में सहारे, इतना मुझे बताजा।
दिल दार यार पियारे, गलियों में मेरी आजा,
इक वार देदो दर्शन दिल की है यह तमना॥,
कही दम निकल ना जाइए तेरा इंतजार करके॥
हरी जी मोरी अखियन आगे रहियो,
नाथ मोरी अँखियन आगे रहियो
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
देने वाले ने दिया, वह भी दिया किस शान से।
"मेरा है" यह लेने वाला, कह उठा अभिमान से
"मैं", ‘मेरा’ यह कहने वाला, मन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो मिला है वह हमेशा, पास रह सकता नहीं।
कब बिछुड़ जाये यह कोई, राज कह सकता नहीं।
जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया।..
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जग की सेवा खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये।
जिन्दगी का राज है, यह जानकर जी लीजिये।
साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है द
जो भी अपने पास है, वह सब किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
सफ़र कितना भी मुस्किल हो प्रभु आसान कर देंगे,
जो तुझसे हो ना पाएगा, जो तुझसे हो ना पाएगा,
उसे भगवान कर देंगे,
सफ़र कितना भी मुस्किल हो प्रभु आसान कर देंगे,
इस जीवन के रास्ते पाए प्रभु का नाम लेकर चल,
बुराई से ज़रा बच कर भला कोई काम लेकर चल,
तू चल कल्याण को सबके,तेरा कल्याण कर देंगे,
सफ़र कितना भी मुस्किल हो प्रभु आसान कर देंगे,
प्रभु के नाम से हम में सवरते काम देखे है,
जहा मुस्किल ही मुस्किल थी वाहा आराम देखे है,
तेरी हर मुस्किल का हाल वो,अरे नादान कर देंगे,
सफ़र कितना भी मुस्किल हो प्रभु आसान कर देंगे,
वो अपनी गोद मे तुझको भरोसा कर उठा लेगा,
तू अपना करम करता चल बाकी वो संभालेगा,
तुझे अपनी दया से वो,तू सुन हैरान कर देंगे,
सफ़र कितना भी मुस्किल हो प्रभु आसान कर देंगे,
सफ़र कितना भी मुस्किल हो प्रभु आसान कर देंगे...
गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ,
गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ,
मेरे मुरलीधर माधव, नंदलाल चले आओ,
गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ ।
आँखों में बसे हो तुम, धड़कन में धड़कते हो,
कुछ ऐसा करो मोहन, साँसों में समां जाओ,
गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ ॥
तेरे दर्शन को मोहन, मेरे नैन तरसते है,
है अर्ज़ मेरी मोहन, अब और ना तरसाओ,
गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ ॥
इक शर्त ज़माने से, प्रभु हमने लगा ली है,
या हमको बुला लो तुम, या खुद ही चले आओ,
गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ......
गोविन्द चले आओ, गोपाल चले आओ
हे मुरलीधर मोहन मेरे श्याम चले आओ
मेरी नाव भंवर में है, और दूर किनारा है
तुम बिन ना कोई दूजा प्रभु और सहारा है
बन कर के माझी तुम मेरी और चले आओ
गोविन्द चले आओ...
मेरे दिल की धड़कन में बस तू ही समाया है
ऐ दिलबर मेरे दिल को, तेरा नूर ही भाया है
मेरे आशिआने में इक बार चले आओ
गोविन्द चले आओ...
तुम सुख के सागर हो कण कण में समाए हो
हे प्राण प्रिय तुम तो मेरे दिल में समाए हो
पल पल है पुकारा तुम्हे, श्री कृष्ण चले आओ
गोविन्द चले आओ...
कोई संगी नहीं साथी जीवन में अकेला हूँ
बस तुझसे लगन है लगी, मैं इक अलबेला हूँ
‘हरी राम’ पुकारे तुझे वासुदेव चले आओ
गोविन्द चले आओ...
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