॥ नाहं स्मरामि कृष्णं तु राधास्मरणवर्जितम् ॥
Krishna - Braj Bhav
कृष्ण - ब्रज भाव

॥ राधे राधे ॥

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नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
नचावे हरि की मईआ , नचावे हरि की मईआ
नाचे नन्दलाल
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
मथुरा मे हरि जन्म लियो है ॥
गोकुल मे पग, धरो री कन्हैया॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
रुनुक-झुनुक पग घुँघरू वाज़े ॥
ठुमुक-ठुमुक पग, धरो री कन्हैया॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
धोतो न बांधे लाला जामो न पहिरे ॥
पिताम्बर को, बडो रे पहरैईया॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
टोपी न ओढ़े लाला साफा न बांधे ॥
मोर-मुकुट को, बडो रे ओढैईया॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
शाल न ओढ़े लाला दुशाला नहीं ओढ़े ॥
काली रे कमरिया को, बडो रे ओढैईया॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
ढूध न पीवे लाला, दही नहीं खावे ॥
माखन-मिसरी को, बड़ो रे खवैईया॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
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मोहे पनघट पे...
मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे
मोरी नाजुक कलइयां मरोड़ गयो रे
कंकरी मोहे मारी गगरिया फोर डाली
मेरी साड़ी, अनारी भिगोय गयो रे
मोहे पनघट पे...
नयनों से जादू किया जियरा
मोह लिया मेरा घूंघटा नजरियों से तोड़ गयो रे
मोह पनघट पे...
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नख पर धार लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है।।
सुरपति पूजा मेट, कृष्ण गिरिराज पुजायो है,
सवा लाख मण सामग्री, को भोग लगायो है,
नख पर धारि लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है।।
पड़ी स्वर्ग में खबर क्रोध, सुरपति को छायो है,
मूसलधार अपार बहुत, पानी बरसायो है,
नख पर धारि लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है।।
पड़ी ना ब्रज पर बूंद इन्द्र देखत घबरायो है,
ब्रजवासी सब कहे, धरण गिरिराज उठायो है,
नख पर धारि लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है।।
धन धन श्री ब्रज चन्द, इन्द्र को मान घटायो है,
‘घासीराम’ गोवर्धन वारो, हरि जस गायो है,
नख पर धारि लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है।
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यशोदा मैया खोल किवड़िया, लाला आयो गऊ चराय,
गऊ गोप ग्वालन गऊ संग, बंशी मधुर बजाय,
सुन गोपी जन मन हर्षित भई, चढ़ी अटारी जाय,
यशोदा मैया खोल किवड़िया...
यशोदा मैया करे आरती, फूली नाय समाय,
हँस-हँस लेत बलैयाँ मैया, बार बार बली जाय,
यशोदा मैया खोल किवड़िया...
खिडक खोल कर दीन्ही गईया, बछड़ा रहे चुखाय,
कारी काजर, धोरी धूगर को रहयो दूध दुहाय,
यशोदा मैया खोल किवड़िया...
हँस लेत बलैयाँ मैया, बार बार बली जाय . यशोदा मैया खोल किवड़िया -
यशोदा मैया खोल किवड़िया, लालो आयो गऊ चराय, गऊ गोप ग्वालन गऊ संग , बंशी मधुर बजाय, सुन गोपी जन मन हर्षित भई, चढ़ी अटारी जाय, यशोदा मैया खोल किवड़िया-- यशोदा मैया...
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जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जां के नैना कारे टेढ़ी चाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
निंदिया ना आवे रोज़ सतावे
सौत मुरलिया मोहे जगावे
निंदिया ना आवे रोज़ सतावे
सौत मुरलिया मोहे जगावे
नैना जां के हैं कमाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
कुञ्ज बिहारी श्री हरिदासी
करुणा की है आस ज़रा सी
कुञ्ज बिहारी श्री हरिदासी
करुणा की है आस ज़रा सी
मन बस गयो मेरो बांको लाल
जादू...जादू कर गयो रे जादू कर गयो
जादू कर गयो कर गयो
यशोमत को ये लाल
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गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे,
तुम बिन रह्यो न जाय, गोवर्धन वासी सांवरे….
बंक चिते मुसकाय के, सुंदर बदन दिखाय,
लोचन तड़पे मीन ज्यों, जुग भर धरी बिहाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
सप्तक स्वर बंधान सौं, मोहन वेणु बजाय,
सुरति सुहाई बांधिके, मधुर – मधुर गाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
रसिक रसीली बोली, गिरि चढ़ि गाय बुलाय,
गाय बुलाई दूधरी, ऊंची टेर सुनाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
दृष्टि पड़ी जा दोष ते, तब ते रुचे न आए,
रजनी नींद न आवरी, एहि बिसरे भोजन पान,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
दर्शन को नैना तपे, वचन सुनन को कान,
मिलिबे को हियरा तपे, हिय की जीवन प्राण,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
मन अभिलाषा यह रहे, लगे न नैन निमेष,
इक टक देखूं, नटवर नागर भेष,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
पूरन शशि मुख देख के, चित्त चोटयो वही ओर,
रूप सुधा रसपान को, जैसे चन्द्र चकोर,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
लोक लाज विधि वेद के, छाँड़े सबई विवेक,
कमल कली रवि ज्यों बढ़े, छिन – छिन प्रीति विशेष,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
मन मथ कोटिक वारिने, देखी डगमग चाल,
युवती जनमन फन्दना, अम्बुज नयन विशाल,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
कुंज भवन क्रीड़ा करो, सुख निधि मदन गोपाल,
हम वृंदावन मालती, तुम भोगी भ्रमर भूपाल,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
यह रट लागी लाडिले, जैसे चातक मोर,
प्रेम नीर वर्षा करो, नव घन नन्द किशोर,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
युग – युग अविचल राखिए, यह सुख शैल निवास,
श्री गोवर्धन रूप पे, बल जाय चतुर्भुज दास,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
तुम बिन रह्यो न जाय, तुम बिन रह्यो न जाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
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नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,
यूँ कहे यशोदा मैया, सब ज़ोर लगाओ भैया,
अरी यह कैसे झेले भार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
मेरे लाल की नरम कलाईआं, देखो मुड़ ना जावे भैया,
अरी गिरिवर भार अपार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
जब कोप इंद्र ने कीनो, गोवेर्धन नख पे लीनो,
बादल बरस बरस गए हार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
यूँ कहे पूछरी वारो, लाठी को दियो सहारो,
अरे मन भज ले कृष्णा मुरार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ।
नख पर गिरिवर लीनो धार, कन्हैया मेरो बारो,
कन्हैया मेरो बारो,कन्हैया मेरो बारो ॥
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मासूम बनता है, बड़ा सीधा लगता है ।
चुपके से आकरके, चोरी करता है;
चोरी करके फिर हमसे वरजोरी करता है ।।
आखिर ये चोरी कब-तक,
यशुदा माँ को पता नहीं है जब-तक ।
अब होगी शिकायत घर में,
मैया लेगी खबर तेरी पल भर में ।।
पकड़ रहो, जकड़े रहे रहो, चोरी करता है ।
चोरी करके फिर हमसे वरजोरी करता है ।। मासूम....
निज बाल सखा संग आता,
मेरी मटकी के सब माखन खा जाता ।
दधि- दूध की मटकी तोड़े,
पनघट पे मुझको बहुत सखी ये छेड़े ।।
बाँधे रहो, माँ से कहो, चोरी करता है ।
चोरी करके फिर हमसे वरजोरी करता है ।।
क्या ढोंग रचता है, बड़ा नाटक करता है ।
चुपके से....
अब हाथ दुख रहा है रे,
ले पकड़ ले गोपी हाथ दूसरे मेरे ।
एक ग्वाल सखा को बुलाये,
श्रीकान्त सखा के हाथ कृष्ण पकड़ाये ।।
फटकार रही, डाँट रही, चोरी करता है ।
चोरी करके फिर हमसे वरजोरी करता है ।।
वह खूब हँसता है, बड़ा भोला बनता है ।
चुपके से....
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नन्दोत्सव : बधैया बाजे गोकुल में
देखो जनम लियो नन्दलाल - गोपाल,
बधैया बाजे गोकुल में ।
सब हुए मस्त खुशहाल-खुशहाल,
बधैया बाजे गोकुल में ॥
नन्द के घर में खुशियाँ छायी ।
सज-धज के गापियाँ भी आयीं ॥
अब बरसे रंग गुलाल-गुलाल,
बधैया बाजे गोकुल में ।
देखो जनम लियो...
गीत खुशी के चहुँ दिशि छायो ।
नन्द के घर में लाला आयो ॥
अब छायो खुशी बहार-बहार,
बधैया बाजे गोकुल में ।
देखो जनम लियो...
माखन की अब कीच मची है ।
खुशियों की अब धूम मची है ॥
विप्रों को कान्त मिले दान-गोदान,
बधैया बाजे गोकुल में ।
देखो जनम लियो...
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ब्रज चौरासी कोस की परिकम्मा एक देख
सो लख चोरासी जोनि की संकट हरि हर लेत
जय जय ब्रिज भूमि जय जय बृज भूमि,,,2
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लेयो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लेयो जी
हो दर्शन करल्यो सिमरण करल्यो
वन्दन करल्यो जी
लैके राधा जी बिहारी जी को नाम
के दर्शन कर लेयो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लेयो जी
ये है मथुरा नगरिया जय बोलो
हो यहाँ जन्मे सांवरिया जय बोलो
हो, आधी आधी रात जनम प्रभु लीन्यो
सुर, नर मुनि जन चित सुख दीन्यो
झोली डंडा पालकी, जय कन्हैया लाल की
झोली डंडा पालकी, जय कन्हैया लाल की
हो वचन दिया सो प्रभु पूरण कीन्यो
श्री विष्णु बने जी घनश्याम,
के दर्शन कर लेयो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लेयो जी
कान्हा मथुरा से आयो,, गोकुल में
हो, माखन चोर कहायो,, गोकुल में
हो,,, माखन खायो याने माटी हू खायी
पकड्यो यशोदा ने तो दीन्ही सफाई
मैया मोरी,,, कसम तोरी,,, मैं नहीं माखन खायो ,2
हो,,, माखन खायो याने माटी हू खायी
पकड्यो यशोदा ने तो दीन्ही सफाई
मुख में दियो ब्रह्मांड दिखाई
ऐसे मोहन को सहास्त्र प्रणाम
के दर्शन कर लेयो जी
चारों धामों से निराला ब्रजधाम,
के दर्शन कर लेयो जी
बरसाने की राधा ,,,राधा राधा बोल
हे, जिसने मोहन को बांधा,,,राधा राधा बोल
हो, होली खेले तो आजा कृष्ण मुरारी
बरसाने में , बुलाबे राधा प्यारी
हो,, कान्हा बरसाने में आए जइयो, बुलाय रही राधा प्यारी
बुलाए रही राधा प्यारी,,,,,बुलाए रही राधा प्यारी
हो कान्हा बरसाने में आए जइयो बुलाए रही राधा प्यारी
हो,, दोनों एक दूजे के प्रेम पुजारी
दोनों मिलके भयो जी इक नाम
के दर्शन करल्यो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लो जी
ब्रज बरखा ने घेरा,,,, श्याम श्याम श्याम
हो सबने श्यामा को टेरा,,,श्याम श्याम श्याम
प्रभु तुम बिन हमरी कौन खबर ले
गोवर्धन गिरधारी,,2
हो गोवर्धन उंगली पे उठायो
प्राणन से प्यारो ब्रिज डूबत बचायो
कंस मार ये भेद बतायो
जैसी करनी वैसो ही परिणाम
के दर्शन करल्यो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लो जी
वृन्दावन सुहावन, क्या कहिये
भयो प्रेम अति पावन, क्या कहिये
हो बांके बिहारी कहु कुञ्ज बिहारी,,,2
स्वामी हरि दास हरि पे बलिहारी
आज हू रचावे यहाँ रास मोरारी
कुंजन की छटा अभिराम
के दर्शन करल्यो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लो जी
हो दर्शन करल्यो सिमरण करल्यो
वन्दन करल्यो जी
चारो धामों से निराला बृज धाम
के दर्शन कर लो जी
जय जय ब्रिज भूमि जय जय बृज भूमि
जय जय ब्रिज भूमि जय जय बृज भूमि
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राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी,
राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी,
आएँगे बिहारी चले आएँगे बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा मेरी चंदा,
चकोर है बिहारी,
राधा मेरी चंदा,
चकोर है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी मिश्री,
तो स्वाद है बिहारी,
राधा रानी मिश्री,
तो स्वाद है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी गंगा,
तो धार है बिहारी,
राधा रानी गंगा,
तो धार है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी तन है तो,
प्राण है बिहारी,
राधा रानी तन है तो,
प्राण है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी सागर,
तरंग है बिहारी,
राधा रानी सागर,
तरंग है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी मोहनी,
तो मोहन बिहारी,
राधा रानी मोहनी,
तो मोहन है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा मेरी गोरी तो,
साँवरे बिहारी,
राधा मेरी गोरी तो,
साँवरे बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी भोली भाली ,
चंचल बिहारी,
राधा रानी भोली भाली ,
चंचल बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी नथनी,
तो कंगन बिहारी,
राधा रानी नथनी,
तो कंगन बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधा रानी मुरली,
तो तान है बिहारी,
राधा रानी मुरली,
तो तान है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी,
राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी,
आएँगे बिहारी चले आएँगे बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥
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राधारमण हमारो प्यारो प्यारो, सखी री में तो देखता रहूं याकी सूरत पे जाऊं बलिहारी, सखी री में तो देखता रहूं
काण कुण्डल की छवि अति प्यारी
कांधे साजे रे कमरिया कारी
शीश मुकुट पे मोर पंख धारी
नाक नथुनी की कोर अति प्यारी
हाथ लकुट अधर पे बंशी बाजे,
छवि को मैं निहारता रहूँ
प्यारे वैजयंती माला उर धारी
हाथ बाजुबंद लरा मुतियारी
जिनके चरणों में पदम विराजे
उनके नूपुर की धुन अति प्यारी
चाल चटपटी टेढ़ी मेढ़ी जाकी, कि सूरत निहारता रहूँ
राधारमण सलोने मतवारे
नैना मिलते ही ऐसा जादू डारे
वृन्दाविपिन किशोरी संग साजे
दास गावे प्रशांत गुन तिहारे
वृन्दावन की श्री कुंज गलिन में मन अटका रहूं
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अधर से बंसी सरक गई,
जो राधा तेरी पायल छनक गई……
क्यों रोज रोज जमुना किनारे कान्हां मुझे बुलाए,
मुख से ना बोले कन्हैया नैनों से बाण चलाए,
तेरे प्यार में लागे ये राधा बहक गई,
अधर से बंसी सरक गई,
जो राधा तेरी पायल छनक गई………
जब जब आऊँ, जमुना किनारे,
तू छुपके छुपके देखे,
तेरी बिंदिया ले गई निंदिया,
चैन गजरा गया लेके,
तेरी खुशबु में राधा भी महक गई,
अधर से बंसी सरक गई,
जो राधा तेरी पायल छनक गई……….
तेरी मीठी मीठी बातों से मोहन,
दिल में प्यार जगे,
तेरे मुखड़े के आगे राधिका,
वो चाँद भी फ़ीका लगे,
तेरे दिल के बागों में मैं चहक गई,
अधर से बंसी सरक गई,
जो राधा तेरी पायल छनक गई……….
रोम रोम तेरा नाम पुकारे ओ कान्हा कान्हा,
तेरी कसम बिना तेरे राधिके श्याम तेरा आधा,
आग की प्यार गोपाला में लहक गई,
अधर से बंसी सरक गई,
जो राधा तेरी पायल छनक गई……….
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तर्ज - इश्क में हम तुम्हे क्या बताए
श्याम इस दिल में जब से तुम आए,
दिल कहीं और लगता नहीं है,
श्याम इस दिल में, श्याम इस दिल में,
श्याम इस दिल में जब से तुम आए,
दिल कहीं और लगता नहीं है………
दीन दुखियों के तुम हो सहारे,
माँ यशोदा की आँखों के तारे,
हर तरफ तुमने, हर तरफ तुमने,
हर तरफ तुमने जलवे बिखेरे,
कोई तुम जैसा दूजा नहीं है,
श्याम इस दिल में, जब से तुम आए,
दिल कहीं और लगता नहीं है………
साँवरे तेरी सूरत सुहानी,
हर अदा पे है दुनियाँ दीवानी,
तेरी मुरली में, तेरी मुरली में,
तेरी मुरली में है कैसा जादू,
एक तुमको जहाँ वहीँ है,
श्याम इस दिल में जब से तुम आए,
दिल कहीं और लगता नहीं है……
तुमको मोहन कहूँ या नंदलाला,
या कहूं गोप गोपिन का ग्वाला,
लीलाधारी हो, लीलाधारी हो,
लीलाधारी हो नटखट कन्हैया,
गउओं वाले ना तुमसा नहीं है,
श्याम इस दिल में जब से तुम आए,
दिल कहीं और लगता नहीं है………
कट गई बिंदु कठिनाई बाधा,
जो रटे कृष्ण संग राधा राधा,
कृष्ण राधा भजे, कृष्ण राधा भजे,
कृष्ण राधा भजे जग ये सारा,
कमली वाले की जय हो रही है,
श्याम इस दिल में जब से तुम आए,
दिल कहीं और लगता नहीं है………
Shrijirasik
कान्हा मधुवन में तुम आया ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो,
एक राधिका है प्रेम दीवानी,
उसको और सताया ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो……
सूरत तुम्हारी सलोनी संवारी,
सुन बांसुरी को हो गई बाँवरी,
माखन और चुराया ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो……
माथे मुकट गल माला सोहे,
कानो में कुंडल मन मेरा मोहे,
मोहनी रूप बनाया ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो……
पाव् चले ना चली राहो में,
नींद न आई सोई आँखों में,
मुरली की तान सुनाया ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो……
मीठी मीठी बांसुरी मोहे निहारे,
चंदर सखी की विनती सुनो वनवारी,
दर्श दिखाओ देर ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो,
एक राधिका है प्रेम दीवानी,
उसको और सताया ना करो,
जादू भरी बांसुरी बजाया ना करो……
Shrijirasik
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया,
साँवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया,
दिल दीवना हो गया, मेरा दिल दीवना हो गया,
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
एक तो तेरे नैन प्यारे दूसरा कजरा लगा,
तीसरा तिरछी नज़र पे दिल दीवाना हो गया,
दिल दीवना हो गया,
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
एक तो तेरे होंठ नाज़ुक दूसरा लाली लगी,
तीसरा तेरा मुस्कुराना दिल दीवना हो गया,
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
एक तो तेरे हाथ कोमल दूसरा मेहँदी लगी,
तीसरा बंसी बजाना दिल दीवना हो गया,
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया,
साँवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया,
दिल दीवना हो गया, मेरा दिल दीवना हो गया,
सांवरी सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया।
Shrijirasik
सांवरे को दिल में बसाकर तो देखो
सांवरे को दिल में बसाकर तो देखो
दुनिया से मन को हटाकर देखो
बड़ा ही दयालु है बांके बिहारी
बड़ा ही दयालु है बांके बिहारी
इक बार वृन्दावन आ कर तो देखो......
बांके बिहारी भक्तों के दिलदार
सदा लुटाते हैं कृपा के भण्डार
हो बांके बिहारी भक्तों के दिलदार
सदा लुटाते हैं कृपा के भण्डार
बांके बिहारी भक्तों के दिलदार
सदा लुटाते हैं कृपा के भण्डार
मीरा ने जैसे गिरिधर को पाया
हो मीरा ने जैसे गिरिधर को पाया
प्याला ज़हर का अमृत बनाया
हो प्याला ज़हर का अमृत बनाया
ओ प्याला ज़हर का अमृत बनाया
प्याला ज़हर का अमृत बनाया
तुम अपनी हस्ती मिटाकर तो देखो
इक बार वृन्दावन आ कर तो देखो....
तेरी पल में झोली वो भर देगा
ओ.. तेरी पल में झोली वो भर देगा
दुःख दर्द जिंदगी के वो हर लेगा
ओ…
दुःख दर्द जिंदगी के वो हर लेगा
ओ दुःख दर्द जिंदगी के वो हर लेगा
दुःख दर्द जिंदगी के वो हर लेगा
चौखट पे दामन फैला कर तो देखो
इक बार वृन्दावन आ कर तो देखो
इक बार वृन्दावन आ कर तो देखो......
शाम बिना तेरा कोई ना अपना
ओ…
शाम बिना तेरा कोई ना अपना
ये दुनिया है सब झूठा सपना
आ…
ये दुनिया है सब झूठा सपना
ये दुनिया है सब झूठा सपना
नजरों से पर्दा हटाकर तो देखो
इक बार वृन्दावन आ कर तो देखो
इक बार वृन्दावन आ कर तो देखो....
चित्र विचित्र का तू मान ले कहना
आ…
चित्र विचित्र का तू मान ले कहना
प्रभु चरणो से कहीं दूर नहीं रहना
ओ…
प्रभु चरणो से कहीं दूर नहीं रहना
प्रभु चरणो से कहीं दूर नहीं रहना
जिंदगी ये बंदगी में मिटा कर तो देखो
इक बार वृन्दावन आ कर के देखो......
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राधे राधे गोविन्द गोविन्द बोल, केशव माधव हरी हरी बोल,
हरी हरी बोल प्यारे हरी हरी बोल, केशव माधव हरी हरी बोल,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द बोल.......
राधा ही जीवन राधा ही प्राण, राधा ही धड़कन राधा ही जान,
राधा ही सारी श्रष्टि का तोल, केशव माधव हरी हरी बोल,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द बोल.......
राधा ही नदिया राधा ही धारा, राधा ही निर्गुण ब्रम्ह नियारा,
द्वार तु अपने मन का खोल, केशव माधव हरी हरी बोल,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द बोल.......
राधा ही अंतर प्राणों की शक्ति, राधा की अविरल प्रेम की भक्ति,
प्रेम से राधे राधे बोल, केशव माधव हरी हरी बोल
राधे राधे गोविन्द गोविन्द बोल.......
Shrijirasik
हुआ नन्द भवन में शोर, चलो सब मिल गोकुल की ओर,
नन्द घर लाला हुआ, यशोदा को लल्ला हुआ........
नन्द यशोदा को जन्मे है लाल,
अष्टमी तिथि का है कमाल....-2
देखो छाई घटा घनघोर,
चलो सब नन्द भवन की ओर,
नन्द घर लाला हुआ, यशोदा को लल्ला हुआ......
ब्रज की गलियन में धूम मची है,
शहनाई की गूंज उठी है.....-2
बोले कोयलियाँ चहु ओर,
चलो भाई नन्द भवन की ओर,
नन्द घर लाला हुआ, यशोदा को लल्ला हुआ......
गोपी ग्वाल में खुशियां छाई,
पुरे गोकुल में बजत बधाई....-2
गावे देवेंद्र नाचे मौर,
चलो सब नन्द भवन की ओर,
नन्द घर लाला हुआ, यशोदा को लल्ला हुआ.....
हुआ नन्द भवन में शोर, चलो सब मिल गोकुल की ओर,
नन्द घर लाला हुआ, यशोदा को लल्ला हुआ.......
Shrijirasik
कन्हैया सबको मन भरमावे,
नन्द भवन में प्रकटो लाला,
आनंद घन बरसावे,
यशोदा ललना को पलना झुलावे,
कन्हैया सबको मन भरमावे,
हलरावै, दुलरावै मैया,
मधुर मधुर कछु गावे,
कन्हैया सबको मन भरमावे,
नन्द जू के हरष हिये ना समावे।
नन्द के आनद भयो,
जय कन्हैया लाल की,
गऊन के दान दिए,
जय हो गोपाल की।
नामकरण भयो हरी को,
अब हर कोई कृष्ण बुलावे,
एक बरस को हो गया ललना,
अब पलना ना सुहावे,
घोटन चलत दूर तन सोहे,
जो देखे बलजावे,
यशोदा ललना को चलना सिखावे,
मईया ललना को चलना सिखावे।
ठुमक चलत बाजत पैजनियां,
रुनझुन शब्द सुनावै,
कन्हैया सबको मन भरमावे,
नन्द जू के हरष हिये ना समावे।
नंदरानी तेरो उत्पाती लला,
कल रात मेरे घर आये गयो,
ग्वाल को दल बल संग लिए,
भीषण उत्पात मचाय गयो,
छींके से उतार नहीं मटकी,
मटकी ते माखन खाये गयो,
न्योते बिन आ गयो घर में,
ग्वालन को संग जिमाय गयो।
मैं नहीं माखन खायो कहकर,
मैं नहीं माखन खायो कहकर,
झूठी शपथ उठावे,
राधिका बर्बस मुख लपटावे,
शृद्धाम माखन से मूंछ बनावे,
लाल की झूठ मान के सांची,
माँ उर कंठ लगावे,
कन्हैया सबको मन भरमावे,
नन्द जू के हरष हिये ना समावे।
गोपालन को चारण करके,
कृष्ण परम सुख पावे,
रे मोहन मुरली मधुर बजावै,
नन्द जू के हरष हिये ना समावे,
गोविंदा, गोपाला,
गोधन प्रिय हरे हरे,
मनमोहन, माखनप्रिय हरे हरे।
Shrijirasik
तर्ज Aaj mere yaar ki shadi h
नन्द बाबा के, नन्द भवन में,
आनंद छायो है,
नन्द के लाला आयो है,
नन्द के लाला आयो है,
नन्द बाबा के, नन्द भवन में,
आनंद छायो है,
नन्द के लाला आयो है,
नन्द के लाला आयो है।
बजे ढोल मृदंग झाँझ ढप्प,
बाज रही शहनाई,
प्रकटे गोकुल में गोविंदा,
घर घर बजी बधाई,
पार ब्रह्म पूर्ण परमेश्वर,
दरस दिखायो है।
नन्द के लाला आयो है।
नन्द बाबा के, नन्द भवन में,
आनंद छायो है,
नन्द के लाला आयो है,
नन्द के लाला आयो है।
बरस रहा है केसर चन्दन,
बरस रही रस धारा,
जय गोविंदा, जय गोपाला,
गूँज रहा जयकारा,
झूम झूम कर, नाँच नाँच कर,
धूम मचायो है,
नन्द के लाला आयो है।
नन्द बाबा के, नन्द भवन में,
आनंद छायो है,
नन्द के लाला आयो है,
नन्द के लाला आयो है।
नन्द यशोदा नहीं समाते,
आज ख़ुशी के मारे,
नन्द भवन में लूट पड़ी है,
लूट रहे हैं सारे,
तू भी लूट ले आज "मधुप हरी"
लूट मचायो है,
नन्द के लाला आयो है।
नन्द बाबा के, नन्द भवन में,
आनंद छायो है,
नन्द के लाला आयो है,
नन्द के लाला आयो है।
नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की,
जय कन्हैया लाल की, जय हो गोपाल की,
नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की,
जय कन्हैया लाल की, जय हो गोपाल की,
हाथी दीने घोड़ा दीने और दीने पालकी,
बधाई हो, बधाई हो, बधाई हो,
जय राधे राधे।
Shrijirasik
मोर मुकुट तेरे हाथों में बांसुरीया,
देवी देवता सब नर और नारी,
जाएं बलिहारी बलिहारी ।
सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया,
मन में है बसी तेरी बांकी छवि,
मेरे गिरधारी गिरधारी ।
सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया,
ऐसी अलबेली ऐसी प्यारी,
छवि अलबेली श्याम की,
श्याम के रंग में रंग दी है काया,
लगन लगी तेरे नाम की,
राह पकड़ ली हमने कन्हैया ,
अब तो तेरे धाम की,
अबे नहीं छूटे तेरे दर की डगरिया,
अबे नहीं छूटे तेरे दर की डगरिया,
मन में है बसी तेरी बांकी छवि,
मेरे गिरधारी गिरधारी ।
सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया.....
सूरदास के छोटे ललना,
मीरा के भरतार हो,
राधा के हो प्रेमी प्रीतम,
संतो के तारणहार हो,
अर्जुन के तुम बने सारथी,
अर्जुन की तुम बने सारथी,
भक्तों के दातार हो,
जैसे भाव वैसे देखे रे सांवरिया,
देवी देवता सब नर और नारी,
जाएं बलिहारी बलिहारी,
सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया.....
गोपी गवाल संग धेनु चरावे,
माखन चोर गोपाल रे,
कुंज गली में रास रचाये,
नटखट श्री नंदलाल रे,
चीर चुराये रे मटकी गिराये,
बैठे कदम की डाल रे,
लीला तेरी देख के,
मन रे बांवरिया ,
मन में है बसी तेरी बांकी छवि,
मेरे गिरधारी गिरधारी ।
सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया.....
नाता हमारा जन्मो पुराना,
तू रहना मेरे साथ मे,
चाहे दुनिया हाथ छोड़ दे,
तू न छोड़ना मेरा हाथ रे ,
पार भवर से नाव लगा दे,
जगदीश्वर भगवान रे,
चरणों मे तेरे मेरी,
बीती रे उमरिया,
देवी देवता सब नर और नारी,
जाएं बलिहारी बलिहारी,
सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया.....
Shrijirasik
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री वो कान्हा बंसी वालो,
वो कान्हा बंसी वालो वो कान्हा कालो कालो
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री वो कान्हा बंसी वालो,
रंजो गम सब मेरे भुला के ,मेरी नजर से नजर को मिला के
नैनं को तीर चलाए गयो री वो कान्हा बंसी वालो,
सुगर सलोनी मोहनी मूरत, बन गई है अब मेरी जरूत,
मेरे दिल के बीच समाये गयो री वो कान्हा बंसी वालो,
हम सब भक्त हुए बलिहारी ,बात हकीकत कहे है प्यारी
मस्ती को रंग चड़ाये गयो री वो कान्हा बंसी वालो,
Shrijirasik
रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी
मुरली बजाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी
लेकर संग में सखी सहेली
बन कर के मैं नई नवेली
ओह्ड़े चुनरिया लाल छमा छम नाचू गी
रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी
मुरली बजाओ नन्द लाल
जोडू हाथ पडू तोरे पईया ले चल मुझको कदम की छईया
मिला ताल से ताल छमा छम नाचू गी
रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी
मुरली बजाओ नन्द लाल
चडी रास की मुझे खुमारी गाये ज्योति लिखे अनाडी
नए नए शब्द कमाल छमा छम नाचू गी
रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी
मुरली बजाओ नन्द लाल
Shrijirasik
मीठे रस से भरीयो री,
राधा रानी लागे,
महारानी लागे,
मने खारो खारो,
जमुना जी रो पानी लागे ॥
यमुना मैया कारी कारी,
राधा गोरी गोरी,
वृन्दावन में धूम मचावे,
बरसाने की छोरी,
ब्रजधाम राधा जु की,
रजधानी लागे,
महारानी लागे,
मने खारो खारो,
जमुना जी रो पानी लागे ॥
ना भावे अब माखन मिसरी,
और ना कोई मिठाई,
जीबड़या ने भावे अब तो,
राधा नाम मलाई,
वृषभानु की लली तो,
गुड़धानी लागे,
गुड़धानी लागे,
मने खारो खारो,
जमुना जी रो पानी लागे॥
कान्हा नित मुरली मे टेरे,
सुमरे बारम्बार,
कोटिन रूप धरे मनमोहन,
कोई ना पावे पार,
राधा रूप की अनोखी,
पटरानी लागे,
महारानी लागे,
मने खारो खारो,
जमुना जी रो पानी लागे॥
राधा राधा नाम रटत है,
जो नर आठों याम,
उनकी बाधा दूर करत है,
राधा राधा नाम,
राधा नाम मे सफल,
जिंदगानी लागे,
जिंदगानी लागे,
मने खारो खारो,
जमुना जी रो पानी लागे ॥
मीठे रस से भरयो री,
राधा रानी लागे,
महारानी लागे,
मने खारो खारो,
जमुना जी रो पानी लागे ॥
Shrijirasik
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा,
राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा,
साजो सकल श्रृंगार नैना सारो कजरा ॥
ऐसो मान ना कीजे हठ तजिए अली,
ऐसो मान ना कीजे हठ तजिए अली,
राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा ॥
तू तो परम सयानी हो वृषभान की लली,
तू तो परम सयानी हो वृषभान की लली,
राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा ॥
तेरो रसिक प्रीतम मग जोवत खड़ो,
तेरो रसिक प्रीतम मग जोवत खड़ो,
राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा ॥
राधे दोऊ कर जोड़े तेरे चरण पड्यो,
राधे दोऊ कर जोड़े तेरे चरण पड्यो,
राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा ॥
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा,
प्यारी झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा,
साजो सकल श्रृंगार नैना सारो कजरा ॥
Shrijirasik
मनिहारी का भेस बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
छलिया का भेस बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
झोली कंधे धरी, उस में चूड़ी भरी।
गलिओं में चोर मचाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
राधा ने सुनी, ललिता से कही।
मोहन को तरुंत बुलाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
चूड़ी लाल नहीं पहनू, चूड़ी हरी नहीं पहनू।
मुझे श्याम रंग है भाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
राधा पहनन लगी श्याम पहनाने लगे।
राधा ने हाथ बढाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
राधे कहने लगी, तुम हो छलिया बढे।
धीरे से हाथ दबाया, श्याम चूड़ी बेचने आया॥
Shrijirasik
ज़रा पास बैठो हे बांके बिहारी
पलक में पिरो लूं छबि मैं तिहारी
मुलाक़ात जाने हो फ़िर कब हमारी
पलक में पिरो लूं छवि मैं तिहारी
चरण देखे जाऊं या मुखड़ा निहारूं
ये दिल देदूं पहले के जाँ पहले वारूं
ये कजरारी अखियां, ये लट कारी कारी
पलक में पिरो लूं छबि मैं तिहारी
ये सूरत जो राधा के मन में समाई
जिसे देखकर मीरा महल छोड़ आई
मै बलिहारी जाऊं इसपे मुरारी
पलक में पिरो लूं छबि ये तिहारी
कई जन्म बांधे तपस्या के धागे
किसी और संग कान्हा नेहा ना लागे
मेरी ओर देखो हे गिरधारी
पलक में पिरो लूं छबि मैं तिहारी
Shrijirasik
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
मोकों तो भावती ठौर प्यारे के नैनन में
मोकों तो भावती ठौर प्यारे के नैनन में
प्यारे भये चाहैं मेरे नैनन के तारे
प्यारे भये चाहैं मेरे नैनन के तारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
मेरे तन-मन-प्रानहूँ तें प्रीतम प्रिय आपने
मेरे तन-मन-प्रानहूँ तें प्रीतम प्रिय
कोटिक प्रान प्रीतम मोसों हारे
आपने कोटिक प्रान प्रीतम मोसों हारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं (जोई-जोई प्यारो करैं)
जैश्री 'हितहरिबंस' हंस-हंसिनी स्यामल गौर
कहौ, कौन करै जल-तरंगिनि न्यारे
कहौ, कौन करै जल-तरंगिनि न्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं सोई मोहि भावै
भावै मोहि जोई, सोई-सोई करें प्यारे
जोई-जोई प्यारो करैं (जोई-जोई प्यारो करैं)
वाणी गुणानु कथने श्रवनौ कथायां
हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्न
स्मृत्यां शिरस्तव निवासजगत्प्रणामे
दृष्टि: सतां दर्शनेऽस्तु भवत्तनूनाम्
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
केसर तिलकं कृष्ण वरणं, केसर तिलकं कृष्ण वरणं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
राजत वन मालं रूप रसालं
राधारमणं हरे, हरे
राजत वन मालं रूप रसालं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
राधारमणं हरे, हरे
वेणु कृत नादं आनंद अपारं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
सुंदर मुदु हासं हरत विषादं
राधारमणं हरे, हरे
सुंदर मुदु हासं हरत विषादं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
राधारमणं हरे, हरे
गोरज मुख लसितं, भक्त चित वसितं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
राधाउर हारं रास रसालं
राधारमणं हरे, हरे
राधाउर हारं रास रसालं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
राधारमणं हर हरे
भक्ताधीनं दीनदयालं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
भक्तवत्सलं रसिकनरेशं
राधारमणं हरे, हरे
भक्तवत्सलं रसिकनरेशं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
राधारमणं हरे, हरे
गो पसु वेशं दास इन्द्रेशं
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
बृज जन प्रियतम बालमुकुन्दम
राधारमणं हरे, हरे, राधारमणं हरे, हरे
जय-जय राधारमण, प्यारो, राधारमण
(जय-जय राधारमण, प्यारो, राधारमण)
जय-जय राधारमण, प्यारो, राधारमण
(जय-जय राधारमण, प्यारो, राधारमण)
Shrijirasik
तर्ज:- सारे रिश्ते नाते तोड के आ गई
तूने जो बजाई बंशी दौड के आ गई
सुन ले मेरे सांवरे सब छोड के आ गई
तू ही मेरी मंजिल तू ही ठिकाना
मैं जो शम्मा हूँ तो तू है परवाना
दुनिया से मन को मोड के आ गई
माता पिता और संग कि सहेली
कोई नही साथ मेरे बिल्कुल अकेली
सभी से मैं रिश्ते नाते तोड के आ गई
सुनते कन्हैया प्यार भरी मुरली
प्रेम का बादल आँखे मेरी भर ली
श्याम तेरी चुनरी मैं ओड के आ गई
कर दी है तेरे नाम ये जिन्दगानी
रूपगिरी फरमाए अपनी पुरानी
जीवन कि डोरी तुमसे जोड के आ गई
Shrijirasik
ओ कान्हा रे, तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
फूलों में कलियों में , वृंदावन की गलियों में ,
तेरे बिना कुछ कहीं ना , तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
जाने कैसे अनजाने ही, आन बसे मेरे मन में,
अपना सब कुछ खो बैठा मैं ,जब से बसे मेरे दिल में,
भक्ति के अफसाने, मैं जानू तू जाने , और ये जाने कोई ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
मेरी धड़कन में बसे हो, सांसों में तेरी खुशबू है,
इस धरती से उस अंबर तक, मेरी नजर में तू ही तू है,
भक्ति ये छूटे ना , तू मुझसे रूठे ना, साथ ये छूटे कभी ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तुम बिन सुना मेरा जीवन , तुम बिन सुने दिन ये सारे,
मेरा जीवन तुझको अर्पण, तुम ही हो जीने के सहारे,
तेरे बिना मेरी ,मेरे बिना तेरी , ये जिंदगी जिंदगी ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
Shrijirasik
मैं बनके मोर रंगीला
श्री यमुना के तट जाऊं
प्यारी यमुना के तट जाऊं
प्यारी यमुना के तट जाऊं
तुम मुरली मधुर बजाओ
मैं झूठ के नचूंगा
मैं बनके मोर रंगीला
श्री यमुना के तट जाऊं
मैं बन जल की मछली
श्री यमुना में छुपा जाऊं
मेरे श्याम नहाने आओ
छू चरण परम पद पाऊं
मैं बनके मोर रंगीला
श्री यमुना के तट जाऊं
मैं बनके श्याम पपीहा
पीहू पीहू की रन लगाओ
तुम साथी बूंद बन बारसो
जनमो की प्यास बुझाऊ
मैं बनके मोर रंगीला
श्री यमुना के तट जाऊं
मैं बनके श्याम चकोरा
नैनों में नीर भरण
तुम श्याम चंद्र बन जाओ
मैं जल का अलग चढ़ाऊ
मैं बनके बस की पारी
हरि अधरों से लग जाऊं
जब श्याम मुझे बजावे
मैं इधर सुधा रस पाऊं
Shrijirasik
झूले, पलना में, कृष्ण कन्हईया,
बधाई, बाजे, गोकुल में ॥
बधाई, बाजे, गोकुल में,
बधाई, बाजे, गोकुल में ॥
झूले, पलना में, कृष्ण...
नन्द, भवन की, शोभा न्यारी ।
तीन, लोक, जाएं बलिहारी ॥
बाजे, नोबत, ढोल शहनईया,
बधाई, बाजे गोकुल में ।
झूले, पलना में, कृष्ण...
धन्य, भयो, नन्द, बाबा को अंगना ।
पूरण, ब्रम्ह, झूल, रह्यो पलना ॥
श्याम, तन पे, पीत झगुलिया,
बधाई, बाजे गोकुल में ।
झूले, पलना में, कृष्ण...
मंगल, गावे, मिल ब्रजनारी ।
जायो, यशोदा ने, गिरवर धारी ॥
झूमे, नाचे, ग्वाल, ग्वालिनिया,
बधाई, बाजे गोकुल में ।
झूले, पलना में, कृष्ण...
‘चित्र विचित्र’, जब, सुनी खबरिया ।
आये, पकड़, ‘पागल’ की, अंगुरिया ॥
जीवे, युग युग, नन्द जु को, छैईया,
बधाई, बाजे गोकुल में ।
झूले, पलना में, कृष्ण...
Shrijirasik
पत्ता पत्ता डाली डाली मेरी श्याम वसदा ।
सारी सृष्टि दा यह मालिक मेरा श्याम सांवरा ॥
साँसों की माला श्याम पुकारे,
राधे राधे श्याम उचारे ।
मेरी साँसों की माला विच्च मेरा श्याम वसदा ॥
पत्ता पत्ता...
दीवानी हो गयी दर तेरे आके,
जग को मैं भूल बैठी तुझे अपना के ।
जग को याद अब नहीं करना, रूह विच्च श्याम वसदा ॥
पत्ता पत्ता...
राधे राधे जिसने गाया,
श्याम ने उसको अपना बनाया ।
राधे रानी के सहारे सारा जग चलदा ॥
पत्ता पत्ता...
नैना श्याम के प्रेम प्याले,
पीवन वाले पीवे भर भर प्याले ।
ओहनू मस्ती विच मिलदा मेरा श्याम सावरा ॥
पत्ता पत्ता...
Shrijirasik
कान्हा मुरली सुना दो प्यारी प्यारी रे,
तुझसे कहती ब्रिज की नारी रे,
धुन मुरली की मन को भाये
मुरली सुन बिन रहा न जाये ,
तेरी मुरली बड़ी ही जादूगारी रे,
तुझसे कहती ब्रिज की नारी रे,
मुरली की धुन मस्त बनाये सारे जग को नाच नचाये,
तेरी मुरली पे जाऊ वारी वारी रे
तुझसे कहती ब्रिज की नारी रे,
कान्हा मुरली मधुर भ्जाये मेरे दिल का चैन चुराए,
ले लेगी ये जान हमारी रे ,
तुझसे कहती ब्रिज की नारी रे,
श्याम छेड़ो कोई ऐसा तराना भीम सेन हो जाए दीवाना
सुन के झूमे ये दुनिया सारी रे
तुझसे कहती ब्रिज की नारी रे,
Shrijirasik
सुन कान्हा जी की बांसुरी राधा तो हुई वनवारी
राधा तो हुई वनवारी राधा तो हुई वनवारी
सुन कान्हा जी की बांसुरी राधा तो हुई वनवारी
मना मना के हर कोई हारा बात किसी की न मानी
श्याम के रंग में एसी रंग गी हो गई प्रेम दीवानी
रंगीली बई संवारी राधा तो हुई वनवारी
कान्हा की मुरली जब तटपर मीठी तान सुनाये
यमुना की लेहरे भी संग में झूमे नाचे गाये
हे उड़ गी सिर से चुनरी राधा तो हुई वनवारी
रंग केसरिया भागा सोहे मोर मुकत छवि न्यारी
होठो पे मुस्कान कटीली सूरत लागे प्यारे
वो सखियाँ संग नाच रही
राधा तो हुई वनवारी
सुन कान्हा जी की बांसुरी राधा तो हुई वनवारी
Shrijirasik
कैसी शोभी बनी आज मेरे यार की,
भानु की दुलारी, नन्द के कुमार की ।
कोई तुलना नहीं है मेरी सरकार की ॥
अति मतवारे नयन मेरे युगल के,
करुणा की धारा या सों छल छल छलके ।
मैं वारि वरि जाऊं कजरे के धार की,
कोई तुलना नहीं है मेरी सरकार की ॥
लाड़ली की साडी लाल, काछनी है लाल की,
नज़र लगे न जोड़ी बनी है कमाल की ।
आपसे है शोभा, आप के श्रृंगार की,
कोई तुलना नहीं है मेरी सरकार की ॥
ऐसे सदा शोभा पाओ मेरे नयन तारे,
आपसे विनय है मेरी इतनी सी प्यारे ।
तोडना न डोर कभी मेरे प्यार की,
कोई तुलना नहीं है मेरी सरकार की ॥
जैसे चाँद शोभा पाए नील गगन में,
वैसे ही रमन करे राधिका रमन में ।
बात कहूं मैं बस यही सार की,
कोई तुलना नहीं है मेरी सरकार की ॥
इस जीवन के तुम जीवन हो
बृजचन्द्र तुम्हे कैसे समझाएं
दुखी होता बहुत तुम्हारे बिना
कैसे दिल अपना चीर दिखाएँ.....
तेरे फूलों से भी प्यार तेरे कांटो से भी प्यार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार
तेरी मर्ज़ी में विधाता कोई छुपा बड़ा राज़
दुनिया चाहे हमसे रूठे तू ना होना नाराज़
तुझे वंदन है बार बार हमको करले तू स्वीकार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार
हमको दोनों है पसंद तेरे धुप और छाँव
डाटा किसी भी दिशा में ले चल ज़िन्दगी की नाव
चाहे हमें लगादे पार या डुबादे बीच मंझधार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार
चाहे सुख दे या दुःख चाहे ख़ुशी दे या ग़म
मालिक जैसे भी रखेगा वैसे रह लेंगे हम
चाहे हंसी भरा संसार चाहे आंसुओं की धार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार
तेरे फूलों से भी प्यार............
मेरा घुंघरू बोले हरे हरे
मेरा घुंघरू बोले हरे हरे ,गोविन्द हरे गोपाल हरे ,
मेरा घुंघरू बोले हरे हरे-हरे हरे ,हरे हरे ।
इह घुंघरू मैनुं सतगुरु दित्ते,
मैं तरले कीते बड़े-बड़े।
मेरा घुंघरू बोले ........
मैं नच्चां मेरा गिरिधर नच्चे ,
मैनूं होर वी मस्ती चढ़े चढ़े।
मेरा घुंघरू बोले ........
सुन घुंघरू मेरा देवर लड़दा,
मेरी सास रैहंदी मैथों परे परे।
मेरा घुंघरू बोले ........
उल्टा-पुल्टा कई कुछ कैंहदे,
मैनु बोल सुनावन सढ़े-सढ़े।
मेरा घुंघरू बोले .....
छुट जाने इह महल चुबारे ,
रह जाने सुख धरे-धरे।
मेरा घुंघरू बोले ........
गा लै गीत ‘‘मधुप’’ गिरिधर दे ,
हरी सिमरन विच सुख बड़े-बड़े।
मेरा घुंघरू बोले ........ ।
जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए, जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए,
गम जमाने के सारे, गम जमाने के सारे,किनारे हुए,
वो एक नज़र सा डाल के जादू सा कर गये, नज़ारे मिला के मुझसे ना जाने किधर गये,
दुनिया से तो मिली थी मुझे हर कदम पे चोट,
पर उनकी एक नज़र से मेरे जख्म भर गये, पर उनकी एक नज़र से मेरे जख्म भर गये,
अब कही देखने की ना ख्वाइश रही, अब कही देखने की ना ख्वाइश रही,
जबसे वो मेरी, जबसे वो मेरी, नॅज़ारो के तारे हुए,
गुम जमाने के सारे, गुम जमाने के सारे,
किनारे हुए,
जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए, जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए,
दर्द ही अब हुमारी दवा बन गया,
यह दर्द भी दौलत है, यह दाग भी दौलत है,
जो कुच्छ भी यह दौलत है,
वो तेरी ही बडोलात है, प्यारे
गुम जमाने के सारे, गुम जमाने के सारे,किनारे हुए,
जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए
छंद:- मात्थे मुकुट देखो, चन्द्रिंका चटक देखो
भ्रकुटि मटक देखो, मुनिं मन भाई है
टेड़ी सी अलक देखो, कुंडल झलक देखो
चंचल पलक देखो, महा सुखदाई है
सुंदर कपोल देखो, अधर अमोल देखो
लोचन सलोल देखो, खंज़न लजाई है
बंशी रंमधोर देखो, सांवरों किशोर देखो
वृन्दावन और देखो, कैसी छविं छाई है
तर्ज़:- पहले वैखे नैंन मैं तेरे,फिर वैखेया तैंनूं नी
वृन्दावन धाम हमें तो, प्राणों से भी प्यारा है
तीनों लोकों को रसिकों ने, वृन्दावन पे वारा है
के मैं भी बस जाऊं वहां, के मैं भी बस जाऊं वहां
जहां यमुना किनारा है, बहे प्रेम की धारा है
वृन्दावन...
1.वृन्दावन धाम हृदय है, प्यारे कुंज बिहारी का
वृन्दावन में राज है चलता, मेरी श्यामा प्यारी का
के इन कुंज गलियों का, के इन कुंज गलियों का
बड़ा सुंदर नज़ारा है, यही भगती का द्वारा है
वृन्दावन धाम हमें तो...
2.वृन्दावन की लता-पता भी, राधे-राधे गाती हैं
वृन्दावन की लीला प्यारी, मेरे मन को भाती है
ये दिल मेरा कहता है, ये दिल मेरा कहता है
नहीं कोई हमारा है, वृन्दावन में गुज़ारा है
वृन्दावन धाम हमें तो...
3.धन वृन्दावन धाम रगिंलो, धन वृन्दावन वासी हैं
वृन्दावन के रसिक धन्य, जो श्यामा-श्याम उपासी हैं
ये चित्र विचित्र कहें, ये चित्र विचित्र कहें
पागल ने विचारा, यही भगती का द्वारा है
वृन्दावन धाम हमें तो...
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी....
1.तेरे दर्शन बिन,दुखी मैं सांवरिया
कब आओगे श्याम,मेरी नगरिया
कोई तो आके मेरी,ख़बर सुनाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी....
2.मन में बसी तेरी,सांवरी सुरतिया
कैसे कटेगी मोरी,सारी उमरिया
बाली उमरिया मेरी,अति घबराये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे, आस लगाये
बैठी....
3.तेरे दर्श बिन,दुखी मैं सांवरिया
कब आओगे श्याम,मोरी नगरिया
कोई तो आके,ख़बर सुनाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी....
4.काधें पे सोहे तेरी,कारी कमरिया
मन मेरा मोहे,तेरी प्यारी बांसुरिया
मैं तो शरणं प्रभु,तेरा गुण गाऊं
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
श्याम नहीं आये,घनश्याम नहीं आये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
बैठी रहूं यमुना पे,आस लगाये
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
गोवर्धन महाराज, हमारे प्रभु गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
मानसी मानसी गंगा को असनान,
धरो फिर चकलेश्वर को ध्यान,
दान घाटी में दही को दान,
करो परिक्रमा की तैयारी है गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
इंद्र को मन मर्दन कीन्हो डूबत बृज को बचाय लीन्हो,
प्रकट भये है दर्शन दीन्हो श्री नटवर की महिमा न्यारी है,
गोवर्धन महाराज
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
भक्त जन पड़े रहे चहुँ और,
संतजन पड़े रहे चहुँ और,
देख के ध्यान धरे नित घोर,
शिखर के ऊपर नाचत मोर,
कर रहे हैं बृज की रखवारी है गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
धन्य जो बात करें गिरिराज,
सिद्ध हो उनके बिगरे काज,
लाज भक्तन की रखे गिरिराज,
श्याम तेरे चरणन की बलिहारी है गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
मानसी गंगा श्री हरिदेव गिरीवर की परिक्रमा देव,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महाराज
नन्द रानी जबर बेयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,
मुस्कान इसकी लगे प्यारी प्यारी,
दीवानी हुई इसकी सारी ब्रिज रा री,
एह की मुरली पे जियो अटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,
पनघट पे आके करे जोरा जोरि,
चुपके से आके करे चीर चोरी,
मइयां हल्लो मचो तो सटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,
घर घर में जाके जो माखन चुरावे,
खावे सो खावे सभी पर गिरावे,
एहने रोकने हमरो खटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,
मैं तो दुखारी गरीबी की मारी,
नहीं जोर चाला तो दी मैं गाली,
नंदू भइया कन्हियो छटक गयो रे,
मोरी मटकी उलट के पलट गयो रे,
बड़ा नटखट है रे...
बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करे यशोदा मैया होऽऽ, बड़ा नटखट है...
ढूंढें री अखियां उसे चहुं ओर जाने कहां छिप गया नंद किशोर उड़ गयो ऐसे जैसे पुरवैया का करे यशोदा...
आ तोहे मैं गले से लगा लूं लागे न किसी की नजर मन में छुपा लूं धूप जगत है रे ममता है छैयां का करे यशोदा...
मेरे जीवन का तू एक ही सपना जो कोई देखे तोहे समझे वो अपना सबका है प्यारा, हां सबका है प्यारा बंसी बजैया का करे यशोदा...
श्याम तेरी बंसी...
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम लोग करें मीरा को यूं ही बदनाम
सांवरे की बंसी को बजने से काम राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
यमुना की लहरें बंसी बट की छड्यां किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया है श्याम का दीवाना तो सारा ब्रजधाम लोग करें...
कौन जाने बासुरियां किसको बुलाए जिसके मन भाए वो उसी के गुण गाए कौन नहीं वंशी की धुन का गुलाम लोग करें मीरा को यूं ही बदनाम...
वृंदावन का कृष्ण कन्हैया...
वृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आंखों का तारा मन ही मन क्यों जले राधिका मोहन तो है सब का प्यारा वृंदावन...
जमुना तट पर नंद का लाला जब जब रास रचाए रे तन-मन डोले कान्हा ऐसी वंशी मधुर बजाए रे सुध-बुध खोए खड़ी गोपियां जाने कैसा जादू डारा वृंदावन का...
रंग सलोना ऐसा जैसे छाई बदरिया सावन की ऐरी मैं तो हुई दीवानी सावन के मन भावन की तेरे कारण देख बावरे, छोड़ दिया मैंने जग सारा वृंदावन का...
बड़ा नटखट है...
बड़ा नटखट है मां तेरा नंदकिशोर गलियन-गलियन घूमे दधि खाए माखन चोर
तेरा ये लाल मय्या रार मचावे रोज-रोज कुंजन में आन सतावै नंद नंदन के आगे चले ना कोई जोर
वृंदावन में रास रचाए मुरली बजा के श्याम दिल को लुभाए धुन सुन करके सखियों के मन में उठे हिलोर बड़ा नटखट है...
नृत्य करत है नंद को लाला मन का उजला तन का काला मन कुंजन में मेरे मोर मचावै शोर बड़ा नटखट है...
कोई नहीं बम बम का सहारा जंगू ने रो रो करके सबको पुकारा प्रेम के चरणों में है मेरी डोर बड़ा नटखट है...
रात श्याम सपने में...
रात श्याम सपने में आए मेरे दही पी गए सर्रर्रर्र
जब ही श्याम मेरी खिड़की खोली खिड़की कर गई चर्र र र्र रात श्याम...
जब ही श्याम मेरी बहियां पकड़ी बहियां कर गई तर्र र्रर्र रात श्याम...
जब ही श्याम मेरो माखन खायो मटकी फोड़ी कर्र र्र र्र रात श्याम...
जब ही श्याम मेरी चुनर झटकी चुनर उड़ गई फर्रर्र र्र रात श्याम...
चंद्र सखी भज बाल कृष्ण छवि भव से तर जाए तर्र र्र र्र रात श्याम...
रात श्याम सपने में आए मेरे दही पी गए सर्रर्रर्र
ये तो प्रेम की बात है...
ये तो प्रेम की बात है ऊधौ बंदगी तेरे बस की नहीं है यहां सर दे के होते हैं सौदे आशिकी इतनी सस्ती नहीं है ये तो प्रेम की बात है...
प्रेम वालों ने कब वक्त पूछा उनकी पूजा में सुन ले ओ ऊधौ यहां दम-दम में होती है पूजा सर झुकाने की फुरसत नहीं है ये तो प्रेम की बात है...
जो असल में है मस्ती में डूबे उन्हें क्या परवाह जिंदगी की जो उतरती है चढ़ती है मस्ती वो हकीकत में मस्ती नहीं है ये तो प्रेम की बात है...
जिसकी नजरों में हैं श्याम प्यारे वो तो रहते हैं जग से न्यारे जिसकी नजरों में मोहन समाए वो नजर फिर तरसती नहीं है ये तो प्रेम की बात है...
छोटी-छोटी गइयां...
छोटी-छोटी गइयां छोटे-छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो मदन गोपाल आगे-आगे गइयां पीछे-पीछे ग्वाल बीच में मेरो मदन गोपाल छोटी-छोटी गइयां...
काली-काली गइयां गोरे-गोरे ग्वाल श्याम वदन मेरो मदन गोपाल छोटी-छोटी गइयां छोटे-छोटे ग्वाल छोटो-सो मेरो
मदन गोपाल घास खाएं गइयां दूध पीवे ग्वाल माखन खावे मेरो मदन गोपाल छोटी-छोटी गइयां...
छोटी-छोटी लकुटी छोटे-छोटे हाथ बंसी बजावे मेरो मदन गोपाल छोटी-छोटी गइयां छोटे-छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो मदन गोपाल
छोटी-छोटी सखियां मधुबन बाग रास रचावे मेरो मदन गोपाल छोटी-छोटी गइयां छोटे-छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो मदन गोपाल
मुझे मिला रंगीला यार ब्रिज की गलिओं में,
गलिओं में भी कुंजन में,
मोसे कहे इत आओ सजनी ,
आकर मेरी बाह पकड ली,
मैं तो हो गी शरमो सार ब्रिज की गलियों में,
मुझे मिला रंगीला .........
कैसे कहू मोपे क्या क्या गुजारी,
श्याम सुन्दर की हो गई भवरी,
जब नैना हो गये चार ब्रिज की गलियों में,
मुझे मिला रंगीला .......
हर दम अब तो रहू मस्तानी,
लोक लाज की नी बिसरानी,
मैं तो गाऊ ख़ुशी के गीत, ब्रिज की गलियों में,
मुझे मिला रंगीला ......
मोहन एसी बंसी बजाई,
सब ने अपनी सूद बिसराई,
फिर नाच उठा संसार, ब्रिज की गलियों में,
मुझे मिला रंगीला ......
तर्ज – तेरे चेहरे में वो जादू है
मेरे ब्रज की माटी चंदन है,
गुणवान सभी कहते है,
ब्रज के राजा यशोदानन्दन,
गिरधारी जहाँ रहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन है.....
जिसको कहते है नंदलाला,
सारे जग का श्याम उजाला,
मन का उजला तन का काला,
मन के मंदिर में श्याम समाए,
ऐसा कोई नहीं दिल वाला,
खुला खजाने का है ताला,
सोई किस्मत खोलने वाला,
ऐसे वरदानी श्याम कहाए,
सब भक्त श्री राधा भक्ति की,
सब भक्त श्री राधा भक्ति की,
धारा में जहाँ बहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन हैं,
गुणवान सभी कहते है,
ब्रज के राजा यशोदानन्दन,
गिरधारी जहाँ रहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन है.......
गोवर्धन परिक्रमा न्यारी,
आते दुनिया के नर नारी,
झुकाती द्वार पे दुनिया सारी,
राधे राधे के गुण गाते,
राधे श्याम के भक्त निराले,
आते दूर से आने वाले,
पाँव में पड़ जाते है छाले,
अपनी मन की मुरादों को पाते,
उतना ही सुख मिलता जितना,
उतना ही सुख मिलता जितना,
दुःख दर्द यहाँ सहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन हैं,
गुणवान सभी कहते है,
ब्रज के राजा यशोदानन्दन,
गिरधारी जहाँ रहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन है......
कोई पैदल पैदल जाए,
कोई दूध की धार चढ़ाए,
गिरधर गिरधर नाम को गाए,
कोई श्रद्धा सुमन ले आता,
ये गिरिराज धरण का कहना,
राधे नाम को जपते रहना,
पहना भक्ति भाव का गहना,
सोई किस्मत को चमकाता,
‘हेमंत’ बना ब्रज का वासी,
‘हेमंत’ बना ब्रज का वासी,
गा गा के यही कहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन हैं,
गुणवान सभी कहते है,
ब्रज के राजा यशोदानन्दन,
गिरधारी जहाँ रहते है,
मेरे ब्रज की माटी चंदन है........
बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।
मीरा पुकारी जब गिरिधर गोपाला,
ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला।
कौन मिटाए उसे, जिसे तू राखे पिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥
जब तेरी गोकुल पे आया दुख भारी,
एक इशारे से सब विपदा टारी।
मुड़ गया गोवर्धन तुने जहाँ मोड़ दिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥
नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी,
सुध बिसराएगी मुरली की धुन प्यारी।
मन के मधुबन में रास रचाए रसिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥
बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....
जो कान्हा मेरो गाँव ना जानों,
ऊँचो बरसानों बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....
जो कान्हा मेरो घर नहीं जानों,
ऊँची हवेली बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....
मेरे अँगना में तुलसी को बिरवा,
तुलसी को बिरवा बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....
जो कान्हा मेरो नाम ना जानों,
राधा रंगीली बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....
जगत के रंग क्या देखूं
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है।
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे तेरा दरबार काफी है॥
नहीं चाहिए ये दुनियां के निराले रंग ढंग मुझको,
निराले रंग ढंग मुझको
चली जाऊँ मैं वृंदावन
चली जाऊँ मैं वृंदावन तेरा श्रृंगार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
जगत के साज बाजों से हुए हैं कान अब बहरे
हुए हैं कान अब बहरे
कहाँ जाके सुनूँ बंशी
कहाँ जाके सुनूँ बंशी मधुर वो तान काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
जगत के रिश्तेदारों ने बिछाया जाल माया का
बिछाया जाल माया का
तेरे भक्तों से हो प्रीति
तेरे भक्तों से हो प्रीति श्याम परिवार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
जगत की झूटी रौनक से हैं आँखें भर गयी मेरी
हैं आँखें भर गयी मेरी
चले आओ मेरे मोहन
चले आओ मेरे मोहन दरश की प्यास काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे तेरा दरबार काफी है
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
जब मेरा कान्हा माखन खावे मैं मिश्री बन जाऊ,
मिश्री बनके मैं कान्हा के माखन में मिल जाऊ,
माखन बन जाउंगी मैं माखन बन जाउंगी,
कान्हा की....,
जब मेरा कान्हा गैया चराये मैं ग्वालियन बन जाऊ,
ग्वालियन बनके मैं कान्हा से संग में गैया चराऊ,
ग्वालियन बन जाउंगी मैं ग्वालियन बन जाउंगी,
कान्हा की....
जब मेरा कान्हा होली खेले मैं राधा बन जाऊ,
राधा बनके मैं कान्हा से संग में होली खेलउ,
राधा बन जाउंगी मैं राधा बन जाउंगी,
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार ।
तेरी सात कोस की परिकम्मा,
चकलेश्वर है विश्राम ।
तेरे गले में कंठा साज रेहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल ।
तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ,
तेरी झांकी बनी विशाल ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण ।
मेरे गोवर्धन गिरधारी,
सुन लो ना अरज हमारी,
मेरे गोवर्धन गिरधारी,
सुन लो ना अरज हमारी,
तुम रूसा रुसी छोड़ भी दो,
मुख मेरी तरफ अब मोड़ भी लो,
आई मैं शरण तुम्हारी,
सुन लो ना अर्ज हमारी...
मेरे दिन बीते, बीतीं रातें,
क्यों करते नहीं मुझसे बातें,
कुछ बोलो ना बनवारी,
सुन लो ना अर्ज हमारी,
मेरे गोवर्धन गिरधारी,
सुन लो ना अरज हमारी....
तुम सागर हो करुणा रस के,
मुझमे अवगुण दुनियाँ भर के,
फिर भी मैं दासी तुम्हारी,
सुन लो ना अर्ज हमारी...
Shrijirasik
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से,
मैया करादे मेरो ब्याह,
उम्र तेरी छोटी है नजर तेरी खोटी है,
कैसे करा दु तेरो ब्याह…
जो नही ब्याह कराए, तेरी गैया नही चराऊ,
आज के बाद मेरी मैया, तेरी देहली पर ना आऊ,
आऐगा, रे मजा, रे मजा, अब जीत हार का,
राधिका गोरी…
चंदन की चौकी पर, मैया तुझको बिठाऊँ,
अपनी राधा से मै, चरण तेरे दबवाऊ,
भोजन मै बनवाऊँगा, बनवाऊँगा, छप्पन प्रकार के,
राधिका गोरी…
छोटी सी दुल्हनिया, जब अंगना में डोल्ले गी,
तेरे सामने मैया, वो घूँघट ना खोलेगी,
दाऊ से जा कहो, जा कहो, बैठेंगे द्वार पे,
राधिका गोरी ……
सुन बातें कान्हा की, मैया बैठी मुस्काए,
लेके बलइया मैया, हिवडे से अपने लगाए,
नजर कहि लग जाए, ना लग जाए, ना मेरे लाल को,
राधिका गोरी ……
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम ll
राधे, ब्रज जन मन,सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम ll
राधे, ब्रज जन मन, सुखकारी राधे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मोर मुकुट, मकरा कृत कुण्डल, गल वैजयंती माला ll
चरणन नुपर, रसाल राधे, श्याम श्यामा श्याम l
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम l
राधे, ब्रज जन मन सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
सुन्दर वदन, कमल-दल लोचन,बांकी चितवन हारी ll
मोहन वंशी, विहारी राधे, श्याम श्यामा श्याम l
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम l
राधे, ब्रज जन मन सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
वृन्दावन में, धेनु चरावे, गोपी जन मन हारी ll
श्री गोवेर्धन, धारी राधे, श्याम श्यामा श्याम l
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम l
राधे, ब्रज जन मन सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
राधा कृष्ण, मिले अब दोऊ, गौर रूप अवतारी ll
कीर्तन धर्म, प्रचारी राधे, श्याम श्यामा श्याम l
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम l
राधे, ब्रज जन मन सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
तुम बिन मेरा, और ना कोई, नाम रूप अवतारी ll
चरणन में, बलिहारी राधे, श्याम श्यामा श्याम l
नारायण, बलिहारी राधे, श्याम श्यामा श्याम l
राधे, ब्रज जन मन सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम ll
राधे राधे, श्याम, राधे राधे, श्याम ll
राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम, राधे श्याम ll
राधे, ब्रज जन मन सुखकारी राधे,श्याम श्यामा श्याम ll
हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे,
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे llll
तुमने मैख़ाना निगाहों में छुपा रखा है।
होश वालो को भी दीवाना बना रखा है॥
तेरी बांकी अदा ने ओ सांवरे,
हमें तेरा दीवाना बना दिया।
तेरा टेढ़ा मुकुट तेरी टेढ़ी छटा,
तेरा बांका मुकुट तेरी बाँकी छटा,
हमें तेरा दीवाना बना दिया॥
तूने हमें भी आशिक़ बना दिया ॥
तेरा प्यार है मेरी ज़िन्दगी,
मेरा काम है तेरी बन्दगी,
जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी।
तेरी इक नज़र का सवाल है,
हमें होश है न ख्याल है,
तूने हमें दीवाना बना दिया॥
तेरी बांकी अदा ने...
मेरे दिल में तूं ही तूं बसा,
मुझे छाया तेरा ही नशा,
मैं जिस्म हूँ मेरी जान तूँ।
तेरा जादू जब से सवार है,
मुझे चैन है ना करार है,
तूने हमे भी कायल बना दिया॥
तेरी बांकी अदा ने...
मेरी जिंदगी का नाज़ तूँ ,
मेरी हर ख़ुशी का राज तूँ,
तेरी हर अदा सबसे जुदा।
ये जो हल्का हल्का सुरूर है ,
ये तेरी नज़र का कसूर है ,
तूने हमें भी आशिक़ बना दिया ॥
तेरी बांकी अदा ने..
Shrijirasik
श्यामा हृदय कमल सो प्रगट्यौ, और श्याम हृदय कू भाए
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन,
श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
सब सुख सागर रूप उजागर, रहे वृंदावन धाम
रूप गोस्वामी प्रगट कियो जहा, राधा गोविंद रूप निधान
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
बिहरत निसदिन कुंज गलिन में, ब्रज जन मन सुख धाम
मदन मोहन को रुप निरख के, सनातन बलि बलि जाए
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
गोपी ग्वाल सब हिय उर धारे, प्यारो गोपीनाथ
मधुपण्डित जिन कंठ लगायो, जहा है रही जय जय कार
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
श्री गोपाल भट्ट कि हृदय वेदना, प्रगट्यौ शालिग्राम
रुप सुधा को खान हमारो, प्यारो राधारमण जु लाल
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
आतुर है हरिवंश पुकारो, श्री राधा राधा नाम
सघन कुंज यमुना तट आयो, प्यारो राधावल्लभ लाल
मदन टेर यमुना तट आयो, प्यारो राधावल्लभ लाल
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
युगल किशोर कु लाड लडायो, नवल कुंज हिय माए
कुंज निकुंजन की रज धारे, हरि व्यास युगल यश गाए
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
भुवन चतुर्दश की सुंदरता, निधिवन करत बिहार
श्यामा प्यारी कुंज बिहारी, श्यामा प्यारी बाके बिहारी
और जय जय श्री हरिदास, वृन्दावन प्यारो वृन्दावन
जिनकी कृपा से यह रस प्रगट्यौ, वृंदावन अभिराम
सप्तनिधीन को हिय उजियारो, इन्द्र-ईश इंद्रीश दुलारो,
हमारो गिरधर लाल
यह आनंद बरसाने वारो, हम सब को है प्राण पियारो
हमारो गिरधर लाल
वृन्दावन प्यारो वृन्दावन, श्री वृंदावन मेरो वृन्दावन
जय राधे राधे, जय राधे राधे
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ ।
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की जाई हूँ ॥
अरे रसिया, ओ मन वासिय, मैं इतनी दूर से आयी हूँ ॥
सुना है श्याम मनमोहन, के माखन खूब चुराते हो ।
उन्हें माखन खिलने को मैं मटकी साथ लायी हूँ ॥
सुना है श्याम मनमोहन, के गौएँ खूब चरते हो ।
तेरे गौएँ चराने को मैं ग्वाले साथ लायी हूँ ॥
सुना है श्याम मनमोहन, के कृपा खूब करते हो ।
तेरी कृपा मैं पाने को तेरे दरबार आयी हूँ ॥
नागनिया बन के डस गई मोहन तेरी बांसुरिया,
मेर गई कलेजा चीर मोहन तेरी बांसुरिया,
रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे चमकें बिजुरिया,
मैं कैसे आऊं श्याम मेरी तो भींगे चुनरिया,
नागरिया बन के डस गई.............
जमुना जल में भरन जाता है सिर पे गागरिया,
अरे ऐसी मारी काकुल मेरी फोड़ी गागरिया,
नागनिया बन के डस गई.........
सास भी सोये नन्द भी सोये जागें सांवरिया,
अरे मैं कैसे आऊं श्याम मेरी तो बाजे पायलिया,
नागनिया बन के डस गई..........
हम जमुना जल भरन जाता है मिल गये सांवरिया,
वे लेकर चीर क़दम चढ़ बेटे रह गई नागनिया,
नागनिया बन के डस गई मोहन तेरी बांसुरिया..........
ब्रजभूमि में पांव धरत ही 2
तन मन बोले राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
गोवर्धन की रज रज यमुना
कण कण बोले राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
पशु पक्षी और तरु लताएं
हर डाल डाल बोले राधा राधा राधा
तन मन धन सब तुमको अर्पण
हर श्वास श्वास बोले राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
हम तो आगाय श्री वृंदावन
यहा मिलती है दिल को रहट
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
किसी को चाड रहा नशा जगत का
किसी को नाम की मस्ती
खूब पियो जिसे जो पीना हो
हम पिएँगे वृंदावन की लस्सी
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
हम तो आगाय श्री वृंदावन
यहा मिलती दिल को रहट
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
कोई कहे नया साल है आया
कोई कहे हॅपी न्यू एअर
हम पहुंचे सदगुरु की कृपा से
अपने मोहन के नियर
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
हम सब आगाय श्री वृंदावन
हम पहुचे मोहन के नियर
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
कोई तो जावे देश विदेशन
कोई हिल स्टेशन
बड़े भागी अपने को मानो
ह्यूम मिल गये बिहरिजी के दर्शन
ह्यूम मिल गये बिहरिजी के दर्शन
जाओ जिसे जाना हो डिस्को
जाओ जिसे करनी हो दावत
रंग डार गयो री मोपे सांवरा
मर गयी लाजन में हे री मेरी बीर,
रंग डार गयो री मोपे सांवरा
मर गयी लाजन में हे री मेरी बीर,
मैं क्या करूँ होरी में
मारी तान के ऐसी मोपे पिचकारी
मेरो भीजो तन को चीर,
मैं क्या करूँ होरी में
रंग डार गयो री मोपे सांवरा....
मेरो पीछा ना छोरे होली मेी,
ओह एक नंद गाओ को अहीर,
में का करू सजनी होली में,
रंग डार गयो री मोपे सांवरा....
ए रंग डारी चुनर कोरी रे,
मेरे भर गयो नैनन अबीर,
में का करू सजनी होली में,
रंग डार गयो री मोपे सांवरा....
राधाजी की सब सखियां संग
लीला भाई यमुना के तीर,
मैं करूँ सजनी होरी में
रंग डार गयो री मोपे सांवरा....
रंग डार गयो री मोपे सांवरा
मर गयी लाजन में हे री मेरी बीर,
मैं क्या करूँ होरी में
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