॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Ram - Vinti Bhav
राम - विनती भाव
Bhajans (12)
Agar Naath Dekhoge Awgun Hamare
bhajanShrijirasik
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
गणिका अजामिल को पल में उबारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
माना अगम है अपावन कुटिल है,
सबकुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
Yadi Nath Ka Naam Dayanidhi Hai
bhajanShrijirasik
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी ना कभी
दुःख हारी हर दुखियाँ जन के दुःख कलेश हरेगे कभी न कभी,
यदि नाथ का नाम दया निधि है
जिस अंग की शोभा सुहावनी है,
जिस सवाली रंग में मोहनी है,
उस रूप सुधा के सनेहियो के,
दीर्घ प्याले भरे गे कभी न कभी न,
करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हे,
चरणामित पान करवाया जिन्हे,
सरकार अदालत में गवाह सभी गुजरे गे कभी न कभी,
हम द्वार पे आप के आके पड़े,
मुदत से इसी जिद पे है अड़े,
भव सिंधु तरे जो बड़े जो बड़े,
बिंदु तरे गे कभी न कभी,
यदि नाथ का नाम दयानिधि है तो दया भी करेंगे कभी ना कभी
Hum Tumhare The Prabhuji
bhajanShrijirasik
हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं,
हम तुम्हारे ही रहेंगे मेरे प्रियतम....
तुम्हे छोड़ सुन नन्द दुलारे कोई ना मीत हमारो,
किसके द्वारे जाए पुकारूँ और ना कोई सहारो,
अब तो आके बांह पकड़ लो ओ मेरे प्रियतम,
तुम हमारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो,
तुम हमारे ही रहोगे ओ मेरे प्रियतम......
तेरे कारण सब जग छोड़ा तुम संग नाता जोड़ा,
एक बार प्रभु बस ये कह दो मैं तेरा तू मेरा,
साँची प्रीत की रीत निभा दो ओ मेरे प्रियतम,
हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं,
हम तुम्हारे ही रहेंगे मेरे प्रियतम.....
तुम हमारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो,
तुम हमारे ही रहोगे ओ मेरे प्रियतम.....
Ab To Darsh Dikha Do Ram
bhajanअब तो दर्श दिखा श्याम जी,
छोड़ के सारी मोह माया तेरे दर पे आन पड़ा,
अब तो दर्श दिखा श्याम जी,
सावन बिता भादो बिता फागण की आस लगाई,
मेरी बारी खाटू वाले काहे देर लगाई,
अखियां थक गई आस में तेरी आके धीर बंधा ,
अब तो दर्श दिखा श्याम जी.......
थारी पूजा घर घर होती चर्चा बहुत है थारा,
उसकी अर्जी सुन लेते हो जिसने तुझे पुकारा,
माह से कुन सी गलती हो गई दे रहो है सजा,
अब तो दर्श दिखा श्याम जी.......
जग में सुनिया खाटू माहि लागियो मेलो बाहरी,
हर मेरी अड़चन बीच में आ गई जब मैंने करि तयारी,
ऐसे खेल तू रच देते हो कोई तो होगी वजह,
अब तो दर्श दिखा श्याम जी.....
देख कथे बेहक ना जाये दास तेरो परवाना,
तेरी बाती उडीक रहे हो पागल कहे जमाना,
भूल चूक शमा तू करदे हिवड़े महने लगा,
अब तो दर्श दिखा श्याम जी,
Ram Btaao Kalyug Me Avtar Kab Hoga
bhajanइस घोर नरक माये जीवन से उधार हमारा कब होगा,
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
जिस और नजर ढालो धरती अनाचार से त्रस्त याहा
जनता घुट घुट जीने की हो चुकी इधर अब व्यस्त याहा,
इन जनजा वातो से आखिर अपना छुटकारा कब होगा
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
तुम जिसे शिंगासन सोंप चले वो सता मध में चूर हुआ
हो गया कराहों से विरख आहो से कोसो दूर हुआ
अब तुम्ही कहो इस अन्य तंत्र पर वार करारा कब होगा
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
बाली ने पटनी छीनी है सुगरीव वातित है रो रो कर
अंगद नल नील भीभीशन सब जीते है रावन से डर कर
गजेंदर इस लंका का फिर वारा न्यारा कब होगा
हे राम बताओ कलयुग में अवतार तुम्हारा कब होगा
Mohe Lado Bhajan Vali Vo Mala
bhajanShrijirasik
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
प्रभु नाम के मोती,
महिमा राम नाम की होती,
मन हो जाये मतवाला..
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला...
जिसकी कृपा से रत्नाकर भी,
रामायण लिख जावें,
जिसकी कृपा से नयनहीन भी,
सूर श्याम कहलाये,
मीरा जोगन हो जावे,
गिरधर के रंग रंगाये,
पीये दीवानी विष प्याला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला.......
धूप दीप अर्चन साधन न,
जोग कोई बतलाये,
चरण शरण ही जा बैठे,
और भव सागर तर जाए,
काशी काबा न जाए,
चाहे गंगा न नहाये,
बस राम की फेरे माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला......
जनम जनम के इस चक्कर से,
खुद को आज बचा ले,
राम नाम का हो जा प्राणी,
राम नाम अपना ले,
अरे बन जा सवाली,
भर ले झोली तू खाली,
सारे जग का वो रखवाला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला,
मोहे ला दो भजन की,
वही माला, वही माला......
Vinati Suniye Nath Hamari
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विनती सुनिए नाथ हमारी,
ह्रदय स्वर हरी ह्रदय बिहारी,
मोर मुकुट पीताम्बरधारी,
विनती सुनिए..........
जनम जनम की लगी लगन है,
साक्षी तारों भरा गगन है,
गिन गिन स्वास आस कहती है,
आएंगे श्री कृष्ण मुरारी,
विनती सुनिए..........
सतत प्रतीक्षा अप लक लोचन,
हे भव बाधा विपत्ति विमोचन,
स्वागत का अधिकार दीजिये,
शरणागत है नयन पुजारी,
विनती सुनिए..........
और कहूं क्या अन्तर्यामी,
तन मन धन प्राणो के स्वामी,
करुणाकर आकर ये कहिये,
स्वीकारी विनती स्वीकारी,
विनती सुनिए..........
Kabhi Ram Banake Kabhi Shyam Banake Chale Aana Prabhuji
bhajanचले आना प्रभु जी...
कभी राम बनके, कभी श्याम बनके चले आना
प्रभु जी चले आना ॥ टेक ॥
तुम राम रूप में आना
सीता साथ लेके धनुष हाथ लेके
चले आना प्रभु जी चले आना...
तुम श्याम रूप में आना
राधा साथ लेके वंशी हाथ लेके
चले आना प्रभु जी चले आना...
तुम शिव रूप में आना
गौरा साथ लेके डमरू हाथ लेके
चले आना प्रभुजी चले आना...
तुम विष्णु रूप में आना
लक्ष्मी साथ लेके चक्र हाथ लेके चले आना प्रभु जी चले आना...
तुम गणपति रूप में आना रिद्धि साथ लेके सिद्धि साथ लेके चले आना प्रभु जी चले आना...
오
Insaf Ka Dar H Tera Ye Hi Soch Ke Aata Hu
bhajanShrijirasik
इंसाफ का दर है तेरा येही सोच के आता हु,
हर वार तेरे दर से खाली ही जाता हु,
आवाज लगाता हु क्यों जवाब नहीं मिलता,
दानी हो सबसे बड़े मुझको तो नहीं लगता,
शायद किस्मत में नहीं दिल को समजता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
जज्बात दिलो के प्रभु धीरे से सुनाता हु,
देखे न कही कोई हालत छुपाता हु,
सब हस्ते है मुझ पर मैं आंसू बहाता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
देने को सताने का अंदाज़ पुराना है,
देरी से आने का बस एक बहाना है,
खाली जाने से प्रभु दिल में शर्माता हु,
इंसाफ का दर है तेरा.....
हैरान हु प्रभु तुम में दुखियो को लौटाया है,
फिर किस के लिए तुमने दरबार लगाया है,
वनवारी महिमा तेरी कुछ समज न पाता हु
इंसाफ का दर है तेरा......
N Jane Kon Se Gun Par Dayanidhi Reejh Jate H
bhajanना जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥
नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
न आये मधुपुरी से गोपियों की दु:ख व्यथा सुनकर।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ॥
न रोये बन गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आँसु बहाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥
नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का ।
विदुर के घर पहुँचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
न आये मधुपुरी से गोपियों की, दु: ख कथा सुनकर ।
द्रुपदजा की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ॥
न रोये बन गमन में , श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में , आँसु बहाते हैं ॥
कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ'बिन्दु'विधि हर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
Jaha Le Chaloge Vahi M Chalunga
bhajanShrijirasik
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा,
जहां नाथ रख लोगे, वहीं मैं रहूँगा।
यह जीवन समर्पित चरण में तुम्हारे,
तुम्ही मेरे सर्वस तुम्ही प्राण प्यारे।
तुम्हे छोड़ कर नाथ किससे कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा॥
ना कोई उलाहना, ना कोई अर्जी,
करलो करालो जो है तेरी मर्जी।
कहना भी होगा तो तुम्ही से कहूँगा,
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा॥
दयानाथ दयनीय मेरी अवस्था,
तेरे हाथ अब मेरी सारी व्यवस्था।
जो भी कहोगे तुम, वही मैं करूँगा,
जहाँ ले चलोगे वहीं मैं चलूँगा॥
Mera Chhota Sa Sansar Hari Aa Jao Ek Baar
bhajanमेरा छोटा सा संसार,
हरि आ जाओ एक बार ll
हरि आ जाओ, प्रभु आ जाओ l
मेरी नईया, पार लगा जाओ l
*मेरी बिगड़ी, आ के बना जाओ l
भक्तों की, सुनो पुकार,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,
जब याद, तुम्हारी आती है l
रह रह के मुझे, तड़पाती है l
तन मन की, सुध बिसराती है l
दूँ तन मन धन, तुझ पे वार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,
लाखों को दर्श, दिखाया है l
प्रभु मुझको क्यों, तरसाया है l
ये कैसी तुम्हारी, माया है l
नित बहती है, असुवन धार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,
मुझको बिछुड़े, युग बीत गए l
क्यों रूठ मेरे, मन मीत गए l
मै हार गया, तुम जीत गए l
अब दर्शन, दो साकार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,,
इस जग में, कौन हमारा है l
प्रभु तेरा ही, तो सहारा है l
तेरे भक्त ने, तुझे पुकारा है l
मेरी नईया, लगा दो पार ll,
हरि आ जाओ एक बार,,,
मेरा छोटा सा संसार,,,,,,,,,,
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