॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Narayan - Joyful Bhav
नारायण - आनंदमय भाव
Bhajans (12)
Hari Naam Nahi Toh Jina Kya
bhajanShrijirasik
हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में,
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥
काल सदा अपने रस डोले,
ना जाने कब सर चढ़ बोले।
हर का नाम जपो निसवासर,
इसमें फिर बरस और महीना क्या ॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में,
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥
भूषन से सब अंग सजावे,
रसना पर हरि नाम ना लावे।
देह पड़ी रह जावे यही पर,
फिर कुंडल और नगीना क्या ॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में,
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥
तीरथ है हरि नाम तुम्हारा,
फिर क्यूँ फिरता मारा मारा।
अंत समय हरि नाम ना आवे,
फिर काशी और मदीना क्या ॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में,
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या ॥
Sab Kuchh Tero Sarkar Mero To Kuchh Bhi Nahi
bhajanShrijirasik
मेरी गाड़ी मेरा बंगला मेरा पैसा सब तेरा, सब कुछ तेरो सरकार मेरो तो कुछ भी नहीं,
सब तेरो सांवरिया सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं।
ये पलोट रोकड़ नोट सांवरिया का है सपोर्ट, मेरे बिजनेस में तेरा हाथ मेरा तो कुछ भी नहीं,
मैं तो पुतला हूं सांवरिया सेठ, चाबी तेरे हाथ में रखी,
मेरी शॉप चले टॉप बिजनेस दिया तुझे सौंप, मैं तो चाकर हूं तेरो रे सांवरिया, मैं तो दर का हूं तेरा रे भिखारी, मेरा तो कुछ भी नहीं ।
मेरा सोना मेरी चांदी दुनिया तो है दीवानी,
खाली हाथ आए सरकार, मेरा तो कुछ भी नहीं, सब तेरो सांवरिया सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं,
मेरे बच्चे तेरे पर्चे तू उठावें घर खर्चे, मै तो बालक हूं तेरा अंजान, मेरा तो कुछ भी नहीं, सब तेरी कृपा है सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं।
मेरा खेत मेरा लसन मेरा अमल मेरा कमल,
सब कुछ तेरो सरकार मेरो तो कुछ भी नहीं, सब तेरो सांवरिया सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं,
मेरा मन मेरा धन मेरा तन अर्पण, सब कुछ तेरो सरकार मेरो तो कुछ भी नहीं, सब तेरो सांवरिया सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं ।
मारुतिनंदन गौशाला तू है गाय का गोपाला, ये भी तो तू जाणे और तेरो काम, मेरा तो कुछ भी नहीं,
सब गायों का रखे ध्यान मैं तो कुछ जाणू नहीं,
मेरा गाने तू चलाते इंस्टा फेसबुक पे छाते, ये भी तेरे है सांवरिया सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं, मेरे डीजे पे तेरा नाम वो भी मेरा नहीं,
ये स्टूडियो तेरा बोस जाए फायदा तो या लॉस गोकुल केवे है सच्ची बात, मेरा तो कुछ भी नहीं,
सब सेठों के तुम सरताज, मंडफिया सा और नहीं।
मेरी गाड़ी मेरा बंगला मेरा पैसा सब तेरा, सब कुछ तेरो सरकार मेरो तो कुछ भी नहीं,
सब तेरो सांवरिया सेठ मेरा तो कुछ भी नहीं।
Jisne Hari Gun Gaye Hari Daude Chale Aaye
bhajanShrijirasik
जिस ने हरी गुण गाए,
हरी दौड़े चले आए ।
भक्त प्रहलाद ने था पुकारा,
हिरण्यकशिपु को आकर के मारा ।
नरसिंह रूप धर आए,
हरी दौड़े चले आए ॥
दौपदी कौरवों से घिरी थी,
मुरली वाले से विनती करी थी ।
हरी आकर के चीर भडाए,
हरी दौड़े चले आए ॥
ऐसा भक्तों ने डाला थे फंदा,
प्रभु आप बने नाई नंदा ।
प्रेम से चरण दबाए,
हरी दौड़े चले आए ॥
दर्योधन के मेवा भी त्यागे,
भूख लागी तो उठ करके भागे ।
साग विधुर घर खाए,
हरी दौड़े चले आए ॥
Jihna Peete Ne Pyale Hari Naam De
bhajanShrijirasik
जिहना पीते ने प्याले हरि नाम दे,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया धन्ने भगत नू,
उन्हे पथरा चो श्याम नू पाया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया मीरा बाई नू,
उन्हे जहरा चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया भीलनी माई नू,
उन्हे बेरा चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया द्रौपता माई नू,
उन्हा साड़िया चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
Pyare Thakur Padhare Mere Angana
bhajanShrijirasik
पावन शुभ दिन है आया,आनंद उत्सव घर छाया,
हिवड़े मन मोद समाया, लागे सभी को मनभावना,
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
१. स्वागत करांला इनकी पलक बिछाकर के जी.. पलक बिछाकर..
बाट जोई थी जिनकी,आस लगाकरके जी,आस लगाकर
धन हुए भाग्य हमारे, मिट गए दुखड़े सारे,
चमके जीवन के सितारे, बाकी नहीं कुछ कामना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
२. आंगन में सुंदर सुंदर आसन लगवायाजी हो..आसन लगवाया...
दिल के भावों से इनको खूब सजाया जी हो...खूब सजाया...
बैठे मनमोहन प्यारे,आंखों के बन के तारे,
झूमे नर नारी सारे, मन को करे हैं लुभावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
३. सोहनी सूरत इनकी लागे अति प्यारी जी हो ...लागे अति प्यारी...
प्रिया प्रियतम की छवि पर जाएं बलिहारी जी हो.. जाएं बलिहारी...
देखूं तो मन हरषावे,नैनन में रूप समावे,
दूजो ना कोई भावे,लागे प्यारे से हमको पावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
४. कंचन के दीप जलाकर आरती गाओ जी हो... आरती गाओ...
सेवा में चंवर डुलाकर, भोग लगाओ जी हो...भोग लगाओ..
सर्वेश्वर मंडल गावे, चरणों में बलि बलि जावे,
आनंद का पार न पावे, उत्सव मनावे सुहावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना..
पावन शुभ दिन है आया, आनंद उत्सव घर छाया, हिवडे मन मोद समाया, लागे सभी को मन भावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना..
Narsinha Jayanti Ki Hardik Badhai
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नरसिंह जयंती की हार्दिक बधाई
श्रीनरसिंह जयन्ती की कोटिन कोटि बधाई (संकीर्तनः हरि बोल हरि बोल, हरि बोल हरि बोल)
आज नरसिंह जयन्ती आई, झूम झूमकर नाचो गावो, मंगल गीत बधाई ।।
हिरणयकशपु ब्रह्मदेव से, पा करके वरदान।
विष्णु पूजा बंद बरवा, खुद बन बैठा भगवान ।।
जुल्म सितम की पाप पताका, तीनलोक फहराई-आज नरसिंह.
उसके अपने ही घर जन्मयों, हरि भगत प्रहलाद ।
मृत्यु जिसको देते देते, हो गया खुद बरबाद ।।
धर्म अधर्म के युद्ध में भगवन, भक्तन पैज निभाई-आज नरसिंह
भक्त रक्षक, धर्म धरा हित, धरा अद्भुत अवतार।
धर विध्वंसक रूप भयंकर, कीन्ही खूब दहाड़ ।।.
थम फोड़ नरसिंह रूप में, प्रक्ट पड़े हरिराई-आज नरसिंह.
पक्ड़ दैत्य को जांघ बिठाकर, किये भीषण प्रहार।
पेट फाड़ नाखुन से नरसिंह, किया दैत्य संहार।।
'मधुप' सभी नरसिंह प्रभु की, जै जैकार बुलाई-आज नरसिंह.
Dekho Ji Jagannath Ji Rath Yatra Aayi Hai
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रथयात्रा
(रथयात्रा की कोटिन-कोटि बधाई)
जगन्नाथ जी की निकली सवारी
धुन- मुझे रास आ गया है तेरे दर पे सर झुकाना
देखो जी जगन्नाथ की, रथ यात्रा है आई।
सज-धज के बैठे रथ में, इक बहन अरू दो भाई।।
देखो जी.........
सोने का रथ बना है, जड़े हीरे रत्न मोती।
दिव्य झांकी दिव्य शिंगार की, शोभा कही न जाई॥
देखो जी.........
स्वागत को सज गई है, सारी पुरी नगरिया,
रंग रस बरस रहे है, महकी है पुरवाई॥
देखो जी.........
रथ साथ संत भगत है, पीछे पीछे खुदाई।
रथ खींचे नाचे गावें, प्रभु को सब रिझावें,
हरिनाम की ‘‘मधुप हरि’’ गुंजार दे सुनाई॥
देखो जी.........
Ab Main Narayan Ghar Le Aayi Ab Mujhe Kisi Ki Kami Nhi
bhajanShrijirasik
मैं नारायण घर ले आई
अब मुझे किसी की कमी नहीं
अब धन दौलत की कमी नहीं
माया का सागर गहरा है
और मुझे तैरना आता नहीं
नैया का नाम कन्हैया है
डूबे तो कोई फिक्र नहीं
मैं नारायण घर ले आई...
घनघोर अंधेरा इस जग में
मैं बुझा दीप इस बाती का
सूरज को मना कर ले आई
अब अंधियारे की फिक्र नहीं
मैं नारायण घर ले आई...
खिड़की दरवाजे खोल दिए
सारा सामान नीलाम हुआ
आना-जाना आसान हुआ
ताले चाबी की फिक्र नहीं
मैं नारायण घर ले आई...
घर से था मंदिर बहुत ही दूर
पैरों में मेरे प्राण नहीं
जब घर में प्रभु जी आ बैठे
तीरथ जाने की फिक्र नहीं
मैं नारायण घर ले आई...
मैं नारायण घर ले आई
अब मुझे किसी की कमी नहीं
अब धन दौलत की कमी नहीं
Patta Patta Dali Dali Mera Shyam Basda
bhajanShrijirasik
पत्ता पत्ता डाली डाली मेरी श्याम वसदा ।
सारी सृष्टि दा यह मालिक मेरा श्याम सांवरा ॥
साँसों की माला श्याम पुकारे,
राधे राधे श्याम उचारे ।
मेरी साँसों की माला विच्च मेरा श्याम वसदा ॥
पत्ता पत्ता...
दीवानी हो गयी दर तेरे आके,
जग को मैं भूल बैठी तुझे अपना के ।
जग को याद अब नहीं करना, रूह विच्च श्याम वसदा ॥
पत्ता पत्ता...
राधे राधे जिसने गाया,
श्याम ने उसको अपना बनाया ।
राधे रानी के सहारे सारा जग चलदा ॥
पत्ता पत्ता...
नैना श्याम के प्रेम प्याले,
पीवन वाले पीवे भर भर प्याले ।
ओहनू मस्ती विच मिलदा मेरा श्याम सावरा ॥
पत्ता पत्ता...
Mera Ghungharu Bole Hare Hare
bhajanमेरा घुंघरू बोले हरे हरे
मेरा घुंघरू बोले हरे हरे ,गोविन्द हरे गोपाल हरे ,
मेरा घुंघरू बोले हरे हरे-हरे हरे ,हरे हरे ।
इह घुंघरू मैनुं सतगुरु दित्ते,
मैं तरले कीते बड़े-बड़े।
मेरा घुंघरू बोले ........
मैं नच्चां मेरा गिरिधर नच्चे ,
मैनूं होर वी मस्ती चढ़े चढ़े।
मेरा घुंघरू बोले ........
सुन घुंघरू मेरा देवर लड़दा,
मेरी सास रैहंदी मैथों परे परे।
मेरा घुंघरू बोले ........
उल्टा-पुल्टा कई कुछ कैंहदे,
मैनु बोल सुनावन सढ़े-सढ़े।
मेरा घुंघरू बोले .....
छुट जाने इह महल चुबारे ,
रह जाने सुख धरे-धरे।
मेरा घुंघरू बोले ........
गा लै गीत ‘‘मधुप’’ गिरिधर दे ,
हरी सिमरन विच सुख बड़े-बड़े।
मेरा घुंघरू बोले ........ ।
Vishnu Chalisa
slokaदोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।
चौपाई
नमो विष्णु भगवान खरारी।
कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।
त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत।
सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥
तन पर पीतांबर अति सोहत।
बैजन्ती माला मन मोहत॥
शंख चक्र कर गदा बिराजे।
देखत दैत्य असुर दल भाजे॥
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।
काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
संतभक्त सज्जन मनरंजन।
दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।
दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
पाप काट भव सिंधु उतारण।
कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥
करत अनेक रूप प्रभु धारण।
केवल आप भक्ति के कारण॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।
तब तुम रूप राम का धारा॥
भार उतार असुर दल मारा।
रावण आदिक को संहारा॥
आप वराह रूप बनाया।
हरण्याक्ष को मार गिराया॥
धर मत्स्य तन सिंधु बनाया।
चौदह रतनन को निकलाया॥
अमिलख असुरन द्वंद मचाया।
रूप मोहनी आप दिखाया॥
देवन को अमृत पान कराया।
असुरन को छवि से बहलाया॥
कूर्म रूप धर सिंधु मझाया।
मंद्राचल गिरि तुरत उठाया॥
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।
भस्मासुर को रूप दिखाया॥
वेदन को जब असुर डुबाया।
कर प्रबंध उन्हें ढूंढवाया॥
मोहित बनकर खलहि नचाया।
उसही कर से भस्म कराया॥
असुर जलंधर अति बलदाई।
शंकर से उन कीन्ह लडाई॥
हार पार शिव सकल बनाई।
कीन सती से छल खल जाई॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।
बतलाई सब विपत कहानी॥
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।
वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
देखत तीन दनुज शैतानी।
वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।
हना असुर उर शिव शैतानी॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे।
हिरणाकुश आदिक खल मारे॥
गणिका और अजामिल तारे।
बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
हरहु सकल संताप हमारे।
कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे।
दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥
चहत आपका सेवक दर्शन।
करहु दया अपनी मधुसूदन॥
जानूं नहीं योग्य जप पूजन।
होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण।
विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥
करहुं आपका किस विधि पूजन।
कुमति विलोक होत दुख भीषण॥
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण।
कौन भांति मैं करहु समर्पण॥
सुर मुनि करत सदा सेवकाई।
हर्षित रहत परम गति पाई॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई।
निज जन जान लेव अपनाई॥
पाप दोष संताप नशाओ।
भव-बंधन से मुक्त कराओ॥
सुख संपत्ति दे सुख उपजाओ।
निज चरनन का दास बनाओ॥
निगम सदा ये विनय सुनावै।
पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥
Hari Name Ke Ras Ko Pee Pee Kar Aanand Me Jeena Seekh Liya
bhajanहरि नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में,
जाकर के पीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
हरी नाम की मस्ती अनोखी है,
पी करके हमने देखी हैं,
सब चिंताओं को छोड़ के अब,
मस्ती में रहना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
पीकर के आनंद आता है,
यह झूठा जग नहीं भाता है,
तुम भी थोड़ी सी पिया करो,
यह सब से कहना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
हरि नाम में चूर जो रहते हैं,
माया से दूर वो रहते हैं,
हरी याद रहे हर पल हमको,
प्रभु नाम को जपना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
कहना यह चित्र-विचित्र का है,
मुश्किल से मिलता मौका है,
हरि नाम के पागल बन जाओ,
सब को समझाना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
हरि नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में,
जाकर के पीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
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