॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Narayan - Peaceful Bhav
नारायण - शांत भाव
Bhajans (16)
Itna to karna swami
bhajanShrijirasik
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले - २
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले
श्री गंगा जी का तट हो,
यमुना का वंशीवट हो
मेरा सांवरा निकट हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
पीताम्बरी कसी हो
छवि मन में यह बसी हो
होठों पे कुछ हसी हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
श्री वृन्दावन का स्थल हो
मेरे मुख में तुलसी दल हो
विष्णु चरण का जल हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
जब कंठ प्राण आवे
कोई रोग ना सतावे
यम दर्शना दिखावे
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
उस वक़्त जल्दी आना
नहीं श्याम भूल जाना
राधा को साथ लाना
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
सुधि होवे नाही तन की
तैयारी हो गमन की
लकड़ी हो ब्रज के वन की
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
एक भक्त की है अर्जी
खुदगर्ज की है गरजी
आगे तुम्हारी मर्जी
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
ये नेक सी अरज है
मानो तो क्या हरज है
कुछ आप का फरज है
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
Achyutam Keshavam Krishna Damodaram
bhajanShrijirasik
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी ।
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
Kabhi To Satya Ki Raah Pe Chalana
bhajanShrijirasik
कभी तो सत्य के राह पे चलना,
कभी तो राह भटकना,
तेरा क्या हाल हुआ है ?
कभी संकटों से घबराना,
कभी उसे अपनाना,
तेरा क्या हाल हुआ है ?
सत्य की खोज करके,
झूठ को तू नर छोड़ दे ।
अज्ञान दूर करके,
अपने को प्रभु से जोड़ दे ।।
अभी समय है ज्ञान को पा ले,
नहीं अन्त पछताना,
तेरा क्या हाल हुआ है ?
कभी....
प्रभु का भजन करले,
दुःख तेरा दूर हो जाएगा ।
गीता का ज्ञान करले,
अंधकार दूर हो जाएगा ।।
अभी समय है प्रभु को सुमिर ले,
नहीं नरक में जाना,
तेरा क्या हाल हुआ है ?
कभी....
धन और दौलत तेरा,
सब तो यहीं रह जाएगा ।
अन्त समय में अपनी,
मूर्खता पे तू पछताएगा ।।
कान्त सदा तुम ज्ञान को समझो,
नहीं करो मनमाना,
तेरा क्या हाल हुआ है ?
कभी....
Kaahe Karta Tu Khud Pe Guman Babre
bhajanShrijirasik
काहे करता तू खुद पे गुमान बावरे
एक दिन छड़ जाना है जहाँन बावरे...2
कुछ कर ले जतन हरि नाम जप ले
तेरे बाद भी रहेगा तेरा नाम बावरे
काहे करता जवानी पे गरूर है ह गरूर है..2
काहे दौलत के नशे में मगरूर है मगरूर है..2
तू महलों पे ना इतना गुमान कर ओ......2
तेरा एक ही ठिकाना श्मशान बावरे
काहे करता.....
अपनी जिंदगी न एसे तू खराब कर हाँ खराब कर..2
अपने कर्मों का थोड़ा तो हिसाब कर हाँ हिसाब कर..2
कैसे मुहू दिखलाएगा तू राम को ओ.......2
नहीं छिपते है पापों के निशान बावरे
काहे करता.....
झूठी दुनिया के झूठे रिश्तेदार है हाँ रिस्तेदार है...2
इन रिश्तों में शामिल व्यापार है हाँ व्यापार है...2
एक रिश्ता बना ले मेरे श्याम से ओ.....2
आए रिश्ता यही तेरे काम बावरे
काहे करता.....
कुछ कर ले तू तौबा अब गुनाहों पे हाँ गुनाहों पे ...2
आ जा मिलके चलें नेक राहों पर हाँ नेक राहों पे...2
इन राहों प मिलेगा एक दिन साबरा ओ.......2
तेरी हो जाएगी जान पहचान बावरे
काहे करता.....
Tumne Thukaraya Kanha To Kahan Par Jaunga
bhajanShrijirasik
तुमने ठुकराया कान्हा तो कहां पर जाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा,
तुमने ठुकराया कान्हा तो कहां पर जाऊंगा.....
हे दयामय कर दया की भीख दो,
हाथ किसके दर पे जा फैलाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
जिंदगी पापो में सारी कट गई,
किस तरह मुंह आपको दिखलाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
मुझको ना तारो मुझे दो कुछ सजा,
पापियों में नाम मैं कर जाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
हे श्यामा मेरी खता सब माफ कर,
उम्र सारी गीत तेरे गाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
Dayalu Tumhari Daya Chahta Hu
bhajanShrijirasik
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ,चरणों में
थोड़ी जगह चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूं...
अज्ञानता ने डेरा जमाया,किया मन को
चंचल ऐसा लुभाया
ले लो शरण में शरण चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूं...
उठे चाहे अंधी तूफ़ान आये,मेरे मन को
भगवन डिगा नहीं पाए
विश्वाश ऐसा तेरा चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ...
नज़रें कर्मं गर हुई ना तुम्हारी,रहेगी
उजड़ती आशा की क्यारी
खिले फूल गुलशन सदा चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ...
विनती सुनों ना मेरी कन्हैयां,मिले भीख
तेरी दया की कन्हैयां
नंदू दिवाना बनुं चाहता हूँ
दयालु तुम्हारी दया चाहता हूँ...
Kam Aayega Prabhu Ka Bhajan Jisne Diya Hai Manav Janam
bhajanShrijirasik
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
तेरी मुक्ति का साधन यही है,
गुणी संतो का कहना सही है,
तेरे कष्टों को निवारे,
तुझको तारे हाँ उबारे,
तेरे ही शुभ करम।
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
काल जब आए तुझको ले जाने,
मुँह फेर लेंगे अपने बेगाने,
सच्चा साथी वो ही माटी,
जिसका दुनिया नाम गाती,
प्रभु की ले लो शरण
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
विषयो में मन को तू ना लगाना,
अंत समय में पड़े पछताना,
कीमती ये स्वास तेरी,
लाभ उठा ले कर ना देरी,
यही है तेरा धरम
काम आएगा प्रभु का भजन,
जिसने दिया है तुझे,
प्यारा मानव जनम,
करले उसका भजन,
करले उसका भजन
Insaf Ka Dar H Tera Ye Hi Soch Ke Aata Hu
bhajanShrijirasik
इंसाफ का दर है तेरा येही सोच के आता हु,
हर वार तेरे दर से खाली ही जाता हु,
आवाज लगाता हु क्यों जवाब नहीं मिलता,
दानी हो सबसे बड़े मुझको तो नहीं लगता,
शायद किस्मत में नहीं दिल को समजता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
जज्बात दिलो के प्रभु धीरे से सुनाता हु,
देखे न कही कोई हालत छुपाता हु,
सब हस्ते है मुझ पर मैं आंसू बहाता हु,
इंसाफ का दर है तेरा......
देने को सताने का अंदाज़ पुराना है,
देरी से आने का बस एक बहाना है,
खाली जाने से प्रभु दिल में शर्माता हु,
इंसाफ का दर है तेरा.....
हैरान हु प्रभु तुम में दुखियो को लौटाया है,
फिर किस के लिए तुमने दरबार लगाया है,
वनवारी महिमा तेरी कुछ समज न पाता हु
इंसाफ का दर है तेरा......
Na Bhatko Moh Se Pyare Ye Rishte Tut Jayenge
bhajanShrijirasik
न भटको मोह से प्यारे,
ये रिश्ते टूट जाएँगे ।
जिन्हे अपने समझते हो,
कभी वे रूठ जाएँगे ।।
जगत के रिश्ते-नाते सब,
ये छूटेंगे मरोगे जब ।
जिसे दौलत समझते हो,
कभी सब लूट जाएँगे ।।
न भटको.....
सभी विपदा से रोते हैं,
नहीं कोई सुखी जग में ।
अगर प्रभु को सुमिर ले तो,
तेरे गम छूट जाएँगे।।
न भटको.....
सफल नर जन्म करना हो,
तो प्रभु की भक्ति कर लेना ।
कान्त यदि ध्यान यह धरले,
मोह सब छूट जाएँगे ।।
न भटको.....
Bhakti Ka Jab Vo Saavan Hoga Tab Tera Tan Man Paavan Hoga
bhajanShrijirasik
भजन : भक्ति का जब वो सावन होगा
भक्ती का जब वो सावन होगा ।
तब तेरा तन-मन पावन होगा ।।
भक्ती करने में ही तेरा जीवन होगा ।।
तब तेरा....
जग के माया-मोह सब,
तुझको खूब फँसायेंगे ।
इनसे नहीं बचोगे तो ये,
अन्त में खूब रुलायेंगे ।।
माया से हटकर जीवन होगा।।
तब तेरा....
धन के फेरे में न पड़कर,
धर्म को खूब कमाओगे ।
जग के अच्छे कर्मों को कर,
भव से तुम तर जाओगे ।।
प्रभु का भजन मनभावन होगा।।
तब तेरा....
सदाचार को अपनाकरके,
जीवन धन्य बनाओगे ।
तभी कान्त निश्चित ईश्वर को,
एक दिन तुम पा जाओगे ।।
जब तेरे बस में, ये मन होगा ।।
तब तेरा....
Agar Moh Se Man Sada Chhod De Bure Karm Apne Agar Chhod Den
bhajanShrijirasik
अगर मोह से मन सदा मोड़ दे,
बुरे कर्म अपने अगर छोड़ दे ।
तब ईश विपदा हरेगा तेरे,
मगर ईश का ध्यान करना पड़ेगा,
सखे सुन मेरे ।।
द्रोपदी को दुशासन बेपरदा करे,
पुकारी जभी लाज उसकी हरे ।
कोई ऐसा गम ना प्रभु ना हरे,
अजामिल प्रभु नाम से ही तरे ।।
गज मोक्ष देखो प्रभु ने किया,
प्रहलाद का दुःख सदा हर लिया ।
तब ईश विपदा....
कर याद प्रभु की कृपावृष्टि का,
हो जा प्रभु की दया दृष्टि का ।
प्रभु है रचयिता पूरी सृष्टि का,
बना ले तू अपना उसे दृष्टि का ।।
अगर भाव से उसको कोई भजे,
गया जो शरन में प्रभु ना तजे ।
तब ईश विपदा....
चलो राह सत की असत से डरो,
मन की न मानो न मन की सुनो ।
अगर प्रभु को पाना तुम्हें है सुनो,
प्रभु नाम को प्यारे जल्दी चुनो ।।
तुम भी चुनो कान्त प्रभु नाम को,
समय न गँवाओ तजो काम को ।
तब ईश विपदा....
Bhajale Vande Tu Naam Hari Ka Naam Se Hi Tar Jayega
bhajanShrijirasik
भज ले बंदे तू नाम हरि का, नाम से ही तर जाएगा ,
ना धन ये तेरे, साथ जायेगा ,
ना तन ये तेरे, साथ जायेगा ,
जायेगा बस ये, नाम हरि का ,
नाम हरि का, नाम हरि का ,
भज ले बंदे तू नाम हरि का, नाम से ही तर जाएगा ,
ना कुछ हैं तेरा , ना कुछ हैं मेरा ,
जो भी मिला हैं, वो हैं हरी का ,
पावन जग में हैं, नाम हरि का ,
नाम हरि का, नाम हरि का ,
भज ले बंदे तू नाम हरि का, नाम से ही तर जाएगा ,
ना कोई रिश्ता, ना कोई नाता ,
झूठा हैं ये, सारा तमाशा ,
सच्चा हैं बस, नाम हरि का ,
नाम हरि का, नाम हरि का ,
भज ले बंदे तू नाम हरि का, नाम से ही तर जाएगा ,
क्या तूने पाया, क्या तूने खोया ,
सारी उम्र बस, माया को रोया ,
चल गई तुझ पे तो, माया हरि की ,
माया हरि की, माया हरि की ,
भज ले बंदे तू नाम हरि का, नाम से ही तर जाएगा ,
धन ही कमाया, तूने धन ही कमाया ,
क्या तूने कभी, हरि गुण गाया ,
अब तो ले ले, तू नाम हरि का ,
नाम हरि का , नाम हरि का ,
भज ले बंदे तू नाम हरि का, नाम से ही तर जाएगा ,
Ye Maya Tere Sang Na Chalegi Babre
bhajanShrijirasik
वोल-ये माया तेरी,बहुत कठींन है राम
ये माया तेरे संग ना चलेगी बांवरे,
भजले राम राम राम
भजले श्याम श्याम श्याम
ये माया तेरे संग ना चलेगी बांवरे
ये माया....
इस माया के पिछे तूं,दिन रात डोलता डोले
आज किसी की कल किसी की, भेद हरि ने खोले
ये माया तेरे संग ना चलेगी बांवरे,
भजले राम राम राम
भजले श्याम श्याम श्याम
ये माया....
जो माया के पिछे भागा,वो पागल कहलाया
इस माया के चक्कर में तुनें,अपना आप भुलाया
ये माया तेरे संग ना चलेगी बांवरे,
भजले राम राम राम
भजले श्याम श्याम श्याम
ये माया....
राम नाम को भजले धसका,क्यों जीवन है खोता
राम नाम ही धन है पागल,क्यों माया के लिए रोता
ये माया तेरे संग ना चलेगी बांवरे
ये माया....
Hari Naam M Kya Bandish Din Rat Lijiye Tali Baja Baja Kar Shuruat Kijiye
bhajanShrijirasik
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
हरि नाम मैं क्या बंदिश,दिन रात लिजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
हरि नाम मैं क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
ताली....
1.औरों के पास जानें से,क्या होगा फायदा
चरणों में प्रेम अश्रु की,बरसात किजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
प्रभु....
2.करने से पहले काम तूं,सौ बार दिल से पुछ
हरगिज़ ना कभी दिल से,ना घात किजिए
ताली बजा-बजाकर,शुरुआत किजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
प्रभु....
3.मीरा ने पीके दुनिया को,हाला दिखा दिया
प्रभु नाम रसका प्याला,दिन रात पिजिए
ताली बजा-बजाकर, शुरुआत किजिए
प्रभु नाम में क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
हरि नाम मैं क्या बंन्दिंश,दिन रात लिजिए
Vishnu Chalisa
slokaदोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।
चौपाई
नमो विष्णु भगवान खरारी।
कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।
त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत।
सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥
तन पर पीतांबर अति सोहत।
बैजन्ती माला मन मोहत॥
शंख चक्र कर गदा बिराजे।
देखत दैत्य असुर दल भाजे॥
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।
काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
संतभक्त सज्जन मनरंजन।
दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।
दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
पाप काट भव सिंधु उतारण।
कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥
करत अनेक रूप प्रभु धारण।
केवल आप भक्ति के कारण॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।
तब तुम रूप राम का धारा॥
भार उतार असुर दल मारा।
रावण आदिक को संहारा॥
आप वराह रूप बनाया।
हरण्याक्ष को मार गिराया॥
धर मत्स्य तन सिंधु बनाया।
चौदह रतनन को निकलाया॥
अमिलख असुरन द्वंद मचाया।
रूप मोहनी आप दिखाया॥
देवन को अमृत पान कराया।
असुरन को छवि से बहलाया॥
कूर्म रूप धर सिंधु मझाया।
मंद्राचल गिरि तुरत उठाया॥
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।
भस्मासुर को रूप दिखाया॥
वेदन को जब असुर डुबाया।
कर प्रबंध उन्हें ढूंढवाया॥
मोहित बनकर खलहि नचाया।
उसही कर से भस्म कराया॥
असुर जलंधर अति बलदाई।
शंकर से उन कीन्ह लडाई॥
हार पार शिव सकल बनाई।
कीन सती से छल खल जाई॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।
बतलाई सब विपत कहानी॥
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।
वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
देखत तीन दनुज शैतानी।
वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।
हना असुर उर शिव शैतानी॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे।
हिरणाकुश आदिक खल मारे॥
गणिका और अजामिल तारे।
बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
हरहु सकल संताप हमारे।
कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे।
दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥
चहत आपका सेवक दर्शन।
करहु दया अपनी मधुसूदन॥
जानूं नहीं योग्य जप पूजन।
होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण।
विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥
करहुं आपका किस विधि पूजन।
कुमति विलोक होत दुख भीषण॥
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण।
कौन भांति मैं करहु समर्पण॥
सुर मुनि करत सदा सेवकाई।
हर्षित रहत परम गति पाई॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई।
निज जन जान लेव अपनाई॥
पाप दोष संताप नशाओ।
भव-बंधन से मुक्त कराओ॥
सुख संपत्ति दे सुख उपजाओ।
निज चरनन का दास बनाओ॥
निगम सदा ये विनय सुनावै।
पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥
M Nahi Mera Nhi Yah Tan Kisi Ka H Diya
bhajanमैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
देने वाले ने दिया, वह भी दिया किस शान से।
"मेरा है" यह लेने वाला, कह उठा अभिमान से
"मैं", ‘मेरा’ यह कहने वाला, मन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो मिला है वह हमेशा, पास रह सकता नहीं।
कब बिछुड़ जाये यह कोई, राज कह सकता नहीं।
जिन्दगानी का खिला, मधुवन किसी का है दिया।..
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जग की सेवा खोज अपनी, प्रीति उनसे कीजिये।
जिन्दगी का राज है, यह जानकर जी लीजिये।
साधना की राह पर, साधन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है द
जो भी अपने पास है, वह सब किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
जो भी अपने पास है, वह धन किसी का है दिया।
मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन किसी का है दिया।
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