॥ राधाया दर्शनं पुण्यं कृष्णप्राप्तेः कारणम् ॥
Narayan - Energetic Bhav
नारायण - ऊर्जावान भाव
Bhajans (6)
Maine Sare Sahare Chod Diye
bhajanShrijirasik
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए,
बस तेरा सहारा काफी है,
मुझे चाह नहीं दुनिया भर की,
बस तेरा नजारा काफी है,
मैने सारे सहारे छोड़ दिए,
बस तेरा सहारा काफी है।।
तेरी चाहत में जग छूट गया,
पर तू मुझसे क्यों रूठ गया,
मैं डूब रहा भव सागर में,
मैं डूब रहा भव सागर में,
बस आना तुम्हारा बाकी है,
मैने सारे सहारे छोड़ दिए,
बस तेरा सहारा काफी है।।
मैंने जबसे तुम्हारा नाम लिया,
इस जग ने बहुत इल्जाम दिया,
जब तूने मुझे यूँ थाम लिया,
जब तूने मुझे यूँ थाम लिया,
बस मेरा गुजारा काफी है,
मैने सारे सहारे छोड़ दिए,
बस तेरा सहारा काफी है।।
मैंने तेरे लिए ही जोग लिया,
और छोड़ जगत का भोग दिया,
रो रो के बुलाना काम मेरा,
रो रो के बुलाना काम मेरा,
बस आना तुम्हारा बाकी है,
मैने सारे सहारे छोड़ दिए,
बस तेरा सहारा काफी है।।
Hari Naam Ko Bhaj Le Re Manwa
bhajanShrijirasik
हरी नाम को भज ले रे मनवा,
तेरा हो जाये उद्धार।
भजो रे मन गोविन्द जय गोपाल॥
गोविन्द गोविन्द जय गोपाला,
नाम हरी का है बड़ा प्यारा।
हरी नाम को मन में बसा ले,
तेरा हो जाये बेड़ा पार।
भजो रे मन गोविन्द जय गोपाल॥
नाम जपत दुःख दूर हो जाये,
पाप-ताप सब नष्ट हो जाये।
गोकुल का जो है रखवाला,
वही बनेगा तेरा सहारा।
भजो रे मन गोविन्द जय गोपाल॥
हरी नाम से प्यारा ना कोई,
इससे बड़ा ना सहारा है कोई।
सुबह शाम जो नाम को ध्याये,
वो हो जाये हरी का प्यारा।
भजो रे मन गोविन्द जय गोपाल॥
जग का नाता झूठा सारा,
एक हरी का नाम सहारा।
राधे-राधे श्याम को भज ले,
तुझे मिलेगा आनंद अपार।
भजो रे मन गोविन्द जय गोपाल॥
हरी सुमिरन से जब आँसू आये,
नाम का रस मन को हरषाये।
जो सुख मिले हरी नाम जपन से,
वो हरी दर्शन से भी ना पाये।
भजो रे मन गोविन्द जय गोपाल॥
Jihna Peete Ne Pyale Hari Naam De
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जिहना पीते ने प्याले हरि नाम दे,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया धन्ने भगत नू,
उन्हे पथरा चो श्याम नू पाया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया मीरा बाई नू,
उन्हे जहरा चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया भीलनी माई नू,
उन्हे बेरा चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
ए रंग चढ़ेया द्रौपता माई नू,
उन्हा साड़िया चो श्याम नू पा लेया,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे,
किती जिंदगी तेरे हवाले,
उन्हा नू रंग चढ़े रेहनगे........
Pyare Thakur Padhare Mere Angana
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पावन शुभ दिन है आया,आनंद उत्सव घर छाया,
हिवड़े मन मोद समाया, लागे सभी को मनभावना,
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
१. स्वागत करांला इनकी पलक बिछाकर के जी.. पलक बिछाकर..
बाट जोई थी जिनकी,आस लगाकरके जी,आस लगाकर
धन हुए भाग्य हमारे, मिट गए दुखड़े सारे,
चमके जीवन के सितारे, बाकी नहीं कुछ कामना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
२. आंगन में सुंदर सुंदर आसन लगवायाजी हो..आसन लगवाया...
दिल के भावों से इनको खूब सजाया जी हो...खूब सजाया...
बैठे मनमोहन प्यारे,आंखों के बन के तारे,
झूमे नर नारी सारे, मन को करे हैं लुभावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
३. सोहनी सूरत इनकी लागे अति प्यारी जी हो ...लागे अति प्यारी...
प्रिया प्रियतम की छवि पर जाएं बलिहारी जी हो.. जाएं बलिहारी...
देखूं तो मन हरषावे,नैनन में रूप समावे,
दूजो ना कोई भावे,लागे प्यारे से हमको पावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना...
४. कंचन के दीप जलाकर आरती गाओ जी हो... आरती गाओ...
सेवा में चंवर डुलाकर, भोग लगाओ जी हो...भोग लगाओ..
सर्वेश्वर मंडल गावे, चरणों में बलि बलि जावे,
आनंद का पार न पावे, उत्सव मनावे सुहावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना..
पावन शुभ दिन है आया, आनंद उत्सव घर छाया, हिवडे मन मोद समाया, लागे सभी को मन भावना...
प्यारे ठाकुर पधारे मेरे आंगना..
Narsinha Jayanti Ki Hardik Badhai
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नरसिंह जयंती की हार्दिक बधाई
श्रीनरसिंह जयन्ती की कोटिन कोटि बधाई (संकीर्तनः हरि बोल हरि बोल, हरि बोल हरि बोल)
आज नरसिंह जयन्ती आई, झूम झूमकर नाचो गावो, मंगल गीत बधाई ।।
हिरणयकशपु ब्रह्मदेव से, पा करके वरदान।
विष्णु पूजा बंद बरवा, खुद बन बैठा भगवान ।।
जुल्म सितम की पाप पताका, तीनलोक फहराई-आज नरसिंह.
उसके अपने ही घर जन्मयों, हरि भगत प्रहलाद ।
मृत्यु जिसको देते देते, हो गया खुद बरबाद ।।
धर्म अधर्म के युद्ध में भगवन, भक्तन पैज निभाई-आज नरसिंह
भक्त रक्षक, धर्म धरा हित, धरा अद्भुत अवतार।
धर विध्वंसक रूप भयंकर, कीन्ही खूब दहाड़ ।।.
थम फोड़ नरसिंह रूप में, प्रक्ट पड़े हरिराई-आज नरसिंह.
पक्ड़ दैत्य को जांघ बिठाकर, किये भीषण प्रहार।
पेट फाड़ नाखुन से नरसिंह, किया दैत्य संहार।।
'मधुप' सभी नरसिंह प्रभु की, जै जैकार बुलाई-आज नरसिंह.
Hari Name Ke Ras Ko Pee Pee Kar
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हरि नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में,
जाकर के पीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
हरी नाम की मस्ती अनोखी है,
पी करके हमने देखी हैं,
सब चिंताओं को छोड़ के अब,
मस्ती में रहना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
पीकर के आनंद आता है,
यह झूठा जग नहीं भाता है,
तुम भी थोड़ी सी पिया करो,
यह सब से कहना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
हरि नाम में चूर जो रहते हैं,
माया से दूर वो रहते हैं,
हरी याद रहे हर पल हमको,
प्रभु नाम को जपना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
कहना यह चित्र-विचित्र का है,
मुश्किल से मिलता मौका है,
हरि नाम के पागल बन जाओ,
सब को समझाना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
हरि नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
आनंद में जीना सीख लिया,
प्रभु प्रेम प्याला सत्संग में,
जाकर के पीना सीख लिया,
हरी नाम के रस को पी पीकर,
आनंद में जीना सीख लिया ॥
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