॥ राधाया दर्शनं पुण्यं कृष्णप्राप्तेः कारणम् ॥
Sita Ram - Joyful Bhav
सीता राम - आनंदमय भाव
Bhajans (8)
Sita Ram Ji Ki Payari
bhajanShrijirasik
सीता राम जी की प्यारी,
राजधानी लागे,
राजधानी लागे,
मोहे मिठो मिठो,
सरयू जी रो पानी लागे ।।
धन्य कौशल्या धन्य कैकई,
धन्य सुमित्रा मैया,
धन्य सुमित्रा मैया..
धन्य भूप दशरथ जी के आंगन,
खेलत चारो भैया,
मीठी तोतली रसीली प्रभु की,
वाणी लागे,
प्रभु की वाणी लागे,
मोहे मिठो मिठो,
सरयू जी रो पानी लागे ।
छोटी छावनी रंगमहल,
हनुमान गढ़ी अति सुन्दर,
हनुमान गढ़ी अति सुन्दर..
स्वयं जगत के मालिक बैठे,
कनक भवन के अंदर,
सीता राम जो की शोभा,
सुखधानी लागे,
सुखधानी लागे..
मोहे मिठो मिठो,
सरयू जी रो पानी लागे ।
सहज सुहावन जनम भूमि,
श्री रघुवर राम लला की,
श्री रघुवर राम लला की,
जानकी महल सूचि सुन्दर शोभा,
लक्ष्मण ज्यूत किला की,
यहाँ के कण कण से,
प्रीत पुरानी लागे,
प्रीत पुरानी लागे..
मोहे मिठो मिठो,
सरयू जी रो पानी लागे ।
जय सियाराम दंडवत भैया,
मधुरी वाणी बोले,
मधुरी वाणी बोले..
करे कीर्तन संत मगन मन,
गली गली मे डोले,
सीता राम नाम धुन प्यारीं,
मस्तानी लागे,
मस्तानी लागे..
मोहे मिठो मिठो,
सरयू जी रो पानी लागे ।
रघुपत प्रेम प्राप्त करके सब,
पी कर श्री हरी रस को,
पी कर श्री हरी रस को..
गण 'राजेश' रहे नित निर्भय,
फिकर कहो क्या उसको,
जिसको मात पिता रघुराज,
सिया महारानी लागे,
सिया महारानी लागे..
मोहे मिठो मिठो,
सरयू जी रो पानी लागे ।
Sita Ram Sita Ram Sitaram kahiye
bhajanShrijirasik
सीता राम सीता राम,
सीताराम कहिये,
जाहि विधि राखे राम,
ताहि विधि रहिये।
मुख में हो राम नाम,
राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नाहिं प्यारे,
राम तेरे साथ में ।
विधि का विधान जान,
हानि लाभ सहिये,
जाहि विधि राखे राम,
ताहि विधि रहिये ॥
किया अभिमान तो फिर,
मान नहीं पायेगा,
होगा प्यारे वही जो,
श्री रामजी को भायेगा ।
फल आशा त्याग,
शुभ कर्म करते रहिये,
जाहि विधि राखे राम,
ताहि विधि रहिये ॥
ज़िन्दगी की डोर सौंप,
हाथ दीनानाथ के,
महलों मे राखे चाहे,
झोंपड़ी मे वास दे ।
धन्यवाद निर्विवाद,
राम राम कहिये,
जाहि विधि राखे राम,
ताहि विधि रहिये ॥
आशा एक रामजी से,
दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक रामजी से,
दूजे नाते तोड़ दे ।
साधु संग राम रंग,
अंग अंग रंगिये,
काम रस त्याग प्यारे,
राम रस पगिये ॥
सीता राम सीता राम,
सीताराम कहिये,
जाहि विधि राखे राम,
ताहि विधि रहिये ।
Sita Ram Daras Ras Barse
bhajanShrijirasik
यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम् ।
बाष्पवारिपरिपूर्णालोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ।।
चहुं दिशि बरसें राम रस,
छायों हरस अपार,
राजा रानी की करे,
सब मिल जय जयकार ।
कौशल नंदन राजा राम,
जानकी वल्लभ राजा राम,
जय सियाराम जय जय सियाराम ।
सीता राम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी,
सावन की झड़ी,
प्यासे प्राणों पे पड़ी,
ऐसे राम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी ॥
राम-लखन अनमोल नगीने,
अवध अँगूठी में जड़ दीने,
सीता ऐसे सोहे, जैसे मोती की लड़ी,
सीता राम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी ॥
राम-सिया को रुप निहारी,
नाचे गावे सब नर नारी,
चल री दर्शन कर आवै,
का सोचत खड़ी,
सीता राम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी ॥
कौशल नंदन राजा राम,
जानकी वल्लभ राजा राम,
जय सियाराम जय जय सियाराम ।
सियाराम सियाराम, सियाराम सियाराम ।
रोम-रोम को नैन बना लो,
रामसिया के दर्शन पालो,
बरसों पीछे आयी है ये मिलन की घड़ी,
सीता राम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी ॥
कौशल नंदन राजा राम,
जानकी वल्लभ राजा राम,
जय सियाराम जय जय सियाराम ।
सियाराम सियाराम, सियाराम सियाराम ।
सीताराम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी,
सावन की झड़ी,
प्यासे प्राणों पे पड़ी,
ऐसे राम दरश रस बरसें,
जैसे सावन की झड़ी ॥
कौशल नंदन राजा राम,
जानकी वल्लभ राजा राम,
जय सियाराम जय जय सियाराम ।
Ayodhya Ki Shaan Raghupati
bhajanShrijirasik
अयोध्या की शान रघुपति राजा राम
सरयू के तट पर विराजे भगवान
दशरथ नंदन कौशल्या के लाला
भरत शत्रुघ्न लक्ष्मण के साथी प्याले
रामराज्य की महिमा गाएं सब
अयोध्या नगरी धन्य हुई
जय श्री राम जय जय राम
अयोध्या के राजा जय जय राम
Ram Ko Dekhkar Shri Janak Nandini
bhajanShrijirasik
राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी,
राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी,
राम देखे सिया माँ सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी
राम देखे सिया माँ सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी राम को देख कर
थे जनकपुर गये देखने के लिए,
थे जनकपुर गये देखने के लिए,
सारी सखियाँ झरोकान से झाँकन लगी,
सारी सखियाँ झरोकान से झाँकन लगी,
देखते ही नजर मिल गयी दोनों की,
जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी
देखते ही नजर मिल गयी दोनों की,
जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी
राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी
बोली है एक सखी राम को देखकर,
बोली है एक सखी राम को देखकर,
रच दिए है विधाता ने जोड़ी सुघर,
रच दिए है विधाता ने जोड़ी सुघर,
पर धनुष कैसे तोड़ेंगे वारे कुंवर,
सब में शंका बनी की बनी रह गयी
पर धनुष कैसे तोड़ेंगे वारे कुंवर,
सब में शंका बनी की बनी रह गयी
राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी
बोली दूजी सखी छोटन देखन में है,
बोली दूजी सखी छोटन देखन में है,
बोली दूजी सखी छोटन देखन में है,
पर चमत्कार इनका नहीं जानती,
एक ही बाण में ताड़िका राक्षसी,
उठ सकी ना पड़ी की पड़ी रह गयी
एक ही बाण में ताड़िका राक्षसी,
उठ सकी ना पड़ी की पड़ी रह गयी
राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी
Jo Kahani Ram Ki H Vo Kahani Shyam Ki
bhajanShrijirasik
जो कहानी राम की है वो कहानी श्याम की
राम के संग जानकी है राधा रानी श्याम की
राम और लक्ष्मण की जोड़ी कृष्ण और बलराम की
यह अयोध्या राम की है मथुरा नगरी श्याम की
राम की कौशल्या माता देवकी गोपाल की
राम है मेरे धनुषधारी मुरली है मेरे श्याम की
शबरी के बेर को राम खाये गुजरी का माखन श्याम जी
अवध बिहारी राम जी हैं कुंज बिहारी श्याम जी
राम ने रावण को मारा कंस को श्री कृष्ण ने
राम की सारी नगरिया आसमा मेरे श्याम की
राम है दशरथ के लाल कृष्णा है नंदलाल के
राम की होती दिवाली होली होती श्याम की
Heri Sakhi Mangal Gao Ri Aaj Mere Piya Ghar Aavenge
bhajanShrijirasik
चौक पुरावो,
माटी रंगावो,
आज मेरे पिया घर आवेंगे
खबर सुनाऊ जो,
ख़ुशी ये बताओ जो,
आज मेरे पिया घर आवेंगे।।
हेरी सखी मंगल गावो री,
धरती अम्बर सजाओ री,
उतरेगी आज मेरे पिया की सवारी,
हेरी कोई काजल लाओ रे,
मोहे काला टीका लगाओ री,
उनकी छब से दिखु में तो प्यारी,
लक्ष्मी जी वारो ,
नजर उतारो,
आज मेरे पिया घर आवेंगे।।
रंगो से रंग मिले,
नए नए ढंग खिले,
ख़ुशी आज द्वारे मेरे डाले है डेरा,
पीहू पीहू पपीहा रटे,
कुहू कुहू कोयल जपे,
आँगन आँगन है परियो ने घेरा,
अनहद नाद बजाओ रे सब-मिल,
आज मेरे पिया घर आवेंगे।।
चोख पुरावो,
माटी रंगावो,
आज मेरे पिया घर आवेंगे
खबर सुनाऊ जो,
ख़ुशी ये बताओ जो,
आज मेरे पिया घर आवेंगे।।
Aaju Mithila Nagariya Nihal Sakhiyan
bhajanShrijirasik
आजु मिथिला नगरिया निहाल सखिया,
चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया!
शिश मणी मौरिया, कुण्डल सोहे कनमा,
कारी कारी कजरारी जुलमी नयनमा,
लाल चंदन सोहे इनके भाल सखिया,
चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया!
श्यामल-श्यामल, गोरे- गोरे, जोड़ीया जहान रे,
अँखिया ना देखनी सुनलीं ने कान हे
जुगे जुगे, जीबे जोड़ी बेमिसाल सखिया
चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया!
गगन मगन आजु, मगन धरतिया,
देखि देखि दुलहा जी के, साँवर सुरतिया,
बाल वृद्ध, नर-नारी, सब बेहाल सखिया
चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया!
जेकरा लागी जोगी मुनि, जप तप कईले,
से मोरा मिथिला में पाहुन बन के अईले
आजु लोढ़ा से सेदाई इनके गाल सखिया..
चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया!
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