॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Mai Tuv Pastar Renu Rasili
मैं तुव पदतर रेनु रसीली
Shriji Rasik
Kavi: Shriji Rasik
मैं तुव पदतर-रेनु, रसीली।
तेरी सरवरि कौन करि सकै, प्रेममई मूरति गरबीली॥
कोटहहु पानबारने करिकै उरिन न तोसों प्रीत-रगीली।
अपनी प्रेम-छटा करुना करि, दीजै दीनदयाल छबीली॥
का मुख करौं बड़ाई राई, ‘ललितकिशोरी' केलि-हठीली।
प्रीति दसांस सतांस तिहारी, मो मै नाहिंन नेह नसीली॥
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