॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Jay Jagpati Jay Janpati Raghukul Pati Ram
जय जगपति जय जनपति रघुकुलपति राम
Shriji Rasik
Kavi: Shriji Rasik
जय जगपति, जय जनपति रघुकुलपति राम।
शोभित श्रीसिय समेत, छविधर , अभिराम ।।
जय कृपाल प्रणतपाल, दायक विश्राम।
घन सम तन द्युति ललाम, सुगति शान्ति धाम ।।
भूमि भार, हरन हार, जय अनन्त नाम।
त्रिभुवन विख्यात विमल पावन गुण ग्राम।।
नेति नेति गावत ऋग्, यजु, अथर्व, साम।
पूर्ण 'बिन्दु' पूर्ण सिन्धु परम पूर्ण काम।।
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