॥ राधे राधे ॥

हे दयामय, दीनदयाल, अज, विमल निष्काम हो।
जगपति, जग व्याप्त, जगदाधार, जग विश्राम हो।।
दिवस निशि जिसको, प्रबल भय रोग की, हो यंत्रणा।
उस दुखी जन के लिए तुम वास्तविक सुख धाम हो ।।
क्लेश इस कलिकाल का उसको कभी व्यापे नहीं।
हृदय में जिसके तुम्हारा, ध्यान आठो याम हो।।
एक ही अभिलाषा है पूरी इसे कर दो प्रभो।
मेरी रसना पर सदा रस 'बिन्दु' मय तव नाम हो ।।
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