॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Adhamo Ko Naath Ubarana
अधमों को नाथ उबारना
Shriji Rasik
Kavi: Shriji Rasik
अधमों को नाथ उबारना, तुम्हें याद हो कि न याद हो।
मद खल जनों का उतारना, तुम्हें याद हो कि न याद हो।।
प्रह्लाद जब मरने लगा, खंजर पै सिर धरने लगा।
उस दिन खम्भ बिदारना, तुम्हें याद हो कि न याद हो।।
धृतराष्ट्र के दरबार में, दुःखी द्रौपदी की पुकार में।
साड़ी के थान सँवारना, तुम्हें याद हो कि न याद हो।।
सुरराज ने जो किया प्रलय, ब्रजधाम बसने के समय।
गिरिवर नखों पर धारना, तुम्हें याद हो कि न याद हो।।
दृग् 'बिन्दु' जिनके निराश हों, केवल तुम्हारी आश हो।
उनकी दशायें सुधारना, तुम्हें याद हो कि न याद हो।।
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