॥ राधे राधे ॥

छबि आवन मोहनलाल की।
काछे काछनि कलित मुरलि कर पीत पिछौरी साल की॥
बंक तिलक केसर को कीन्हो द्युति मानौं बिधु बाल की।
बिसरत नाहिं सखी मो मन सों चितवनि नैन बिसाल की॥
नीकी हँसनि अधर सधरनि छबि छीनी सुमन गुलाब की।
जल सों डारि दियो पुरइनि पै डोलनि मुकतामाल की॥
आप मोल बिन मोलनि डोलनि बोलनि मदन गोपाल की।
यह सरूप निरखै सोइ जानै यहि रहीम के हाल की॥
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