॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Radhe Krishna - Longing Bhav
राधे कृष्ण - विरह भाव
Bhajans (11)
Jagat Preet Mat Kariyo Re Manva
bhajanShrijirasik
जगत प्रीत मत करियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो,
हरी वादा से डरियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो II
ये जग तो माया की छाया,
झूटी माया झूटी छाया,
या पीछे मत पड़ियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो II
ये जग तो माटी का खिलौना,
इसके पीछे तू मत खोना,
गुरु चरण चित धरियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो II
ये जग तो झूठा दीवाना,
पागल मन यहाँ न फस जाना,
नहीं तो जिन्दा मारियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो II
इस जग में तू आया अकेला,
मत करियो जग ते मन मेला,
भव से पार उतरियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो II
जगत प्रीत मत करियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो,
हरी वादा से डरियो रे मनवा,
जगत प्रीत मत करियो II
Mero Man Vridavan M Atko
bhajanShrijirasik
मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको,
बनके जोगन डोलत ब्रज में, बन के जोगन डोलत ब्रज में,
पीवत यमुना जल को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण,
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण,
वृंदावन की कुंज गलिन में, वृन्दावन की कुंज गलिन में,
मिल जाओ प्रभु मुझको,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ...
इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण,
इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण,
अंत समय आनंद मिले मोहे, अंत समय आनंद मिले मोहे,
बस वेणु के रस को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ....
याद में तोरी भई बावरी, सुध लो मोरी कुंज बिहारी,
याद में तोरी भई बावरी, सुध लो मोरी कुंज बिहारी,
अब आओ मेरे प्राण पियारे, अब आओ मेरे प्राण पियारे,
अपनाओ या जन को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको.
मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको,
बनके जोगन डोलत ब्रज में, बन के जोगन डोलत ब्रज में,
पीवत यमुना जल को,
मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ...
Main Bairagan Hungi
bhajanShrijirasik
बाला मैं बैरागन हूंगी - २
जिन भेषा मेरो साहब रीझे
सोहि भेष धरूंगी
बाला मैं बैरागन हूंगी
कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा
कहो तो भगवा भेष
कहो तो मोतियन मांग भरावा
कहो छिटकावा केश
बाला मैं बैरागन हूंगी
प्राण हमारा वह बसत है
यहाँ तो खाली खोड़
मात पिता परिवार सहूँ है
कही ये दिन का तोड़
बाला मैं बैरागन हूंगी
बाला मैं बैरागन हूंगी - २
जिन भेषा मेरो साहब रीझे
सोहि भेष धरूंगी
बाला मैं बैरागन हूंगी
Jaadu Karke
bhajanShrijirasik
जादू करके, जादू करके, जादू करके -2
जादू करके , ओह जादू करके , जादू करके ओ पिया गयो जादू करके
जादू करके , जादू करके, जादू करके ओह जादू करके
कित गयो जादू करके…
नन्दनंदन पिया कपट जो कीनो-2
निकल गयो, निकल गयो छल करके
जादू करके, जादू करके, जादू करके -2
ओ पिया कित गयो जादू करक……
मोर मुकुट पिताम्बर सोहे — 5
कबहु मिले ,कबहु मिले ,कबहु मिले ,
आग भरके जादू करके,
जादू करके -4
ओ पिया कित जादू करके…-2
मीरा दासी शरण जाे आई -5
चरणकमल, चरणकमल ,चरणकमल चित धरके
जादू करके, जादू करके -3
ओ पिया कित गयो जादू करके…
गिरधार नागर कहती मीरा -2
नटवर नागर कहती मीरा -2
गिरधार नागर कहती -2
जादू करके, जादू करके, जादू करके -2
जादू करके , ओह जादू गयो करके , जादू करके ओ पिया गयो जादू करके
जादू करके , जादू करके, जादू करके ओह जादू करके
कित गयो जादू करके…
Jadu Kar Gayo
bhajanShrijirasik
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जां के नैना कारे टेढ़ी चाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
निंदिया ना आवे रोज़ सतावे
सौत मुरलिया मोहे जगावे
निंदिया ना आवे रोज़ सतावे
सौत मुरलिया मोहे जगावे
नैना जां के हैं कमाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
जादू कर गयो यशोमत को ये लाल
कुञ्ज बिहारी श्री हरिदासी
करुणा की है आस ज़रा सी
कुञ्ज बिहारी श्री हरिदासी
करुणा की है आस ज़रा सी
मन बस गयो मेरो बांको लाल
जादू...जादू कर गयो रे जादू कर गयो
जादू कर गयो कर गयो
यशोमत को ये लाल
Hame Shyam Na Mila
bhajanShrijirasik
सुन राधिका दुलारी,
हूँ द्वार का भिखारी,
तेरे श्याम का पुजारी,
एक पीड़ा है हमारी,
हमें श्याम न मिला
हमसोचते थे कान्हा कही कुंजन में होगा,
अभी तो मिलन का हमने सुख नहीं भोगा
ओ सुनके प्रेम कि परिभाषा,
मन में बंधी थी जो आशा,
आशा भई रे निराशा,
झूटी दे गया दिलाशा
हमें श्याम न मिला
देता है कन्हाई जिसे प्रेम कि दिशा,
सब विधि उसकी लेता भी है परीक्षा
ओ कभी निकट बुलाये,
कभी दूरियाँ बढ़ाये,
कभी हंसाए रुलाये,
छलिया हाथ नहीं आये
हमें श्याम ना मिला…
ओ अपना जिसे यहाँ कहे सब कोई,
उसके लिए में दिन रात रोई,
ओ नेह दुनिया से तोडा,
नाता संवारे से जोड़ा,
उसने ऐसा मुख मोड़ा,
हमें कही का ना छोड़ा
हमें श्याम ना मिला
Govardhan Wasi Sanware
bhajanShrijirasik
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे,
तुम बिन रह्यो न जाय, गोवर्धन वासी सांवरे….
बंक चिते मुसकाय के, सुंदर बदन दिखाय,
लोचन तड़पे मीन ज्यों, जुग भर धरी बिहाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
सप्तक स्वर बंधान सौं, मोहन वेणु बजाय,
सुरति सुहाई बांधिके, मधुर – मधुर गाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
रसिक रसीली बोली, गिरि चढ़ि गाय बुलाय,
गाय बुलाई दूधरी, ऊंची टेर सुनाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
दृष्टि पड़ी जा दोष ते, तब ते रुचे न आए,
रजनी नींद न आवरी, एहि बिसरे भोजन पान,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
दर्शन को नैना तपे, वचन सुनन को कान,
मिलिबे को हियरा तपे, हिय की जीवन प्राण,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
मन अभिलाषा यह रहे, लगे न नैन निमेष,
इक टक देखूं, नटवर नागर भेष,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
पूरन शशि मुख देख के, चित्त चोटयो वही ओर,
रूप सुधा रसपान को, जैसे चन्द्र चकोर,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
लोक लाज विधि वेद के, छाँड़े सबई विवेक,
कमल कली रवि ज्यों बढ़े, छिन – छिन प्रीति विशेष,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
मन मथ कोटिक वारिने, देखी डगमग चाल,
युवती जनमन फन्दना, अम्बुज नयन विशाल,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
कुंज भवन क्रीड़ा करो, सुख निधि मदन गोपाल,
हम वृंदावन मालती, तुम भोगी भ्रमर भूपाल,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
यह रट लागी लाडिले, जैसे चातक मोर,
प्रेम नीर वर्षा करो, नव घन नन्द किशोर,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
युग – युग अविचल राखिए, यह सुख शैल निवास,
श्री गोवर्धन रूप पे, बल जाय चतुर्भुज दास,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
तुम बिन रह्यो न जाय, तुम बिन रह्यो न जाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
Brij Gopiyo Se Na Nidiya Churana
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गोपी विरह गीत :
व्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना ।
ब्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना ।
ब्रज गोपियों का है प्रेम पुराना ।।
आज से सूनीं गलियाँ राहें ।
पनघट पे भरना है आहें ।।
छोड़के हमको ना तुम जाना ।।
ब्रज गोपियों से........
मैया बाबा को ना छोड़ो ।
प्रेम के रिश्तों को ना तोड़ो ।।
याद करो वो माखन चुराना ।।
ब्रज गोपियों.......
कुंज-निकुंज का मिलना सपना ।
कैसे कहें कान्हा था अपना ।।
कान्त विरह में है आँसू बहाना ।।
ब्रज गोपियों से.......
Tere Bagair Sawariya
bhajanShrijirasik
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने॥
ना जाने कौन सी बांकी अदा तुम्हारी॥
ना जाने कौन सी बांकी अदा तुम्हारी कोरस॥
हजारो लाखो मिटे है ये ऐसी प्यारी है
कभी हमें भी मिटाओ तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया...............
जहां श्री राधा जो संग में ॥
जहां श्री राधा जो संग मे कोरस ॥
वो जमना जी का किनारा वो पुंज है प्यारे
वही पे हमको बिठा लो तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया...............
मैं लाऊ फुल तुम्हारी पसंद के प्यारे॥
मैं लाऊ फुल तुम्हारी पसंद के प्यारे कोरस ॥
बनाऊ फुल के बंगले बिराजो तुम प्यारे
मुझे ये सेवा दिलाओ तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया...............
ये आठो याम की सेवा करु तिहारी ॥
ये आठो याम की सेवा करु तिहारी कोरस॥
कहे गोविन्द मैं गांऊ तुम्हे रिझाने को
तुम भी साथ में गाओ तो कोई बात बने
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने॥
तेरे बगैर सांवरिया...............
Dil M Basa Hua H Mere Pyar Aapka
bhajan(सैर)तेरी सूरत को जब से देखा, बेहोश हुए मदहोश हुए,
अब प्रीत की रीत निभा ले जरा,चरणों में झुका कर सर बैठे,
पलकों में छुपा लूं श्याम तुम्हें, यह तन मन तुझ पर वार दिया,
जब से पकड़ा तेरे दामन को, दुनिया से किनारा कर बैठे,
दिल में बसा हुआ है, मेरे प्यार आपका,
होता है रोज ख्वाब में, दीदार आपका,
दिल में बसा हुआ है
ओ कान्हा बंसी वाले, हकीकत यह बात है,
यह जाँ भी आपकी है, संसार आपका,
दिल में बसा हुआ है,
उठती है जब भी दिल में, दीदार की तमन्ना,
मन में बना है मंदिर, दरबार आपका,
दिल में बसा हुआ है
जानू ना पूजा वंदन, कैसे करूं तुम्हारा,
किस विधि करूं तुम्हारा, सत्कार आपका,
दिल में बसा हुआ है, मेरे प्यार आपका,
दुनिया में बिन तुम्हारे ,नहीं और पर भरोसा
दर पर खड़ा हुआ है ये प्यार आपका
Hum Prem Diwani Hai
bhajanहम प्रेम दीवानी है, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना
तन मन जीवन श्याम का, श्याम हमारा काम,
रोम रोम में राम रहा, वो मतवाला श्याम,
इस तन में तेरे योग का, नहीं कोई ठिकाना,
हम प्रेम दिवानी है, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना
उधो इन असुवान को, हरी सनमुख ले जाओ,
पूछे हरी कुशल तो, चरणों में दीयो चढाओ,
कहियो जी इस प्रेम का, यह तुच्छ नजराना,
हम प्रेम दिवानी है, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना
प्रेम डोर से बंध रहा, जीवन का संयोग,
सुमिरन में डूबी रहें, यही हमारा योग,
कानो में गूंजता करे, बंशी का तराना,
हम प्रेम दिवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना
एक दिन नैन के निकट, रहते थे आठों याम,
अब बैठे है विसार के, वो निर्मोही श्याम,
कैसा वो जमाना था, और अब ये जमाना,
हम प्रेम दिवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना
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