॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Krishna - Rudan Bhav
कृष्ण - रुदन भाव

॥ राधे राधे ॥

Shrijirasik
ना जाने क्यों बहुत रोया, तुम्हारी याद में मोहन।
दोहा –
जितना दिया सरकार ने मुझको, उतनी मेरी औक़ात नहीं,
ये तो करम है उनका वर्ना, मुझ में तो ऐसी बात नहीं।
प्रीतम ये मत जानियो, तुम बिछड़े मोहे चैन,
जैसे जल बिन माछली, तड़पत हूँ दिन रेन।
ना जाने क्यों बहुत रोया, तुम्हारी याद में मोहन,
कभी ना नींद भर सोया, तुम्हारी याद में मोहन।।
- तुम्हारी याद आती है।
ना तुम पूजा से मिल पाते, ना हम कोई पुण्य कर पाते,
मैं गठरी पाप की ढोया, तुम्हारी याद में मोहन,
ना जाने क्यूँ बहुत रोया, तुम्हारी याद में मोहन।।
जमाना रूठ जाए पर, ना रूठो तुम मेरे दाता,
पुराना जन्म जन्मों का, कन्हैया आप से नाता,
मैं ठोकर दुनिया की खाया, तुम्हारी याद में मोहन,
ना जाने क्यूँ बहुत रोया, तुम्हारी याद में मोहन ।।
दया कर दो मेरे प्यारे, तुम्ही दाता कहाते हो,
नैनो में नीर है मेरे, मुझे तुम क्यूँ रुलाते हो,
तड़प अब सह नहीं पाया, तुम्हारी याद में मोहन,
ना जाने क्यूँ बहुत रोया, तुम्हारी याद में मोहन
Shrijirasik
ना जाने आज क्यो फिर से,
तुम्हारी याद आई है
दोहा – खाक मुझमें कमाल रखा है,
दाता तूने संभाल रखा है,
मेरे ऐबों पे डालकर पर्दा,
मुझे अच्छों में डाल रखा है।
मैं तो कब का मिट गया होता,
तेरी रहमत ने पाल रखा है,
मुझसे नाता जोड़ के तूने,
हर मुसीबत को टाल रखा है ॥
सम्भालों दास को दाता,
मेरी सुध क्यों भुलाई है,
ना जाने आज क्यों फिर से,
तुम्हारी याद आई है ॥
नज़र क्या तुमसे टकराई,
जो नाजुक दिल लुटा बैठे,
इशारा क्या किया तूने,
जो हम खुद को भुला बैठे,
जो हम खुद को भुला बैठे,
मुकर जाओगे वादे से,
तो भक्तो की दुहाई है,
ना जाने आज क्यो फिर से,
तुम्हारी याद आई है ॥
जमाना रूठ जाए पर,
ना रूठो तुम मेरे दाता,
पुराना जन्म जन्मो का,
कन्हैया आपसे नाता,
कन्हैया आपसे नाता,
निगाहें याद से तेरी,
सितमगर बाज आई है,
ना जाने आज क्यो फिर से,
तुम्हारी याद आई है ॥
सबर की हो गई हद अब,
सहा जाता नहीं प्यारे,
नज़र दिलदार से ज्यादा,
कोई आता नहीं प्यारे,
कोई आता नहीं प्यारे,
तुम्हारे द्वार पे ‘काशी’,
ने भी पलकें बिछाई है,
ना जाने आज क्यो फिर से,
तुम्हारी याद आई है ॥
सम्भालों दास को दाता,
मेरी सुध क्यों भुलाई है,
ना जाने आज क्यो फिर से,
तुम्हारी याद आई है ॥
Shrijirasik
किन संग खेलूं होली, पिया तज गए हैं अकेली
माणिक मोती सब हम छोड़े, गल में पहनी सेली
भोजन भवन बलो नहीं लागे, पिया कारण भई रे अकेली,
मुझे दूरी क्यों मेलि, पिया तज गए हैं अकेली
किणु संग खेलूं होली...
अब तुम प्रीत अवरसो जोड़ी, हम से करी क्यों पहेली
बहु दिन बीते अजहू आ आये, लगा रही ताला बेली
कीनू दिलमा ये हेली, पिया तज गए हैं अकेली
किणु संग खेलूं होली...
श्याम बिना जीयड़ो मुरझावे, जैसे जल बिन बेली
मीरा को प्रभु दर्शन दीजो, मैं तो जनम जनम की चेली
दरश बिना खड़ी दोहेली, पिया तज गए हैं अकेली
किणु संग खेलूं होली...
Shrijirasik
तर्ज - आजा रे ओ मेरे दिलबर आजा
आजा रे - आजा रे ओ मेरे मोहन आजा ,
लोट के वापस आजा रे,
ओ मोहन - मोहन
तेरी राधा नीर बहाए , तुझको पास बुलाए,
जब से मोहन छोड़ गया तू , आंसू रोक न पाए,
आजा रे - आजा रे ओ मेरे मोहन आजा ,
लोट के वापस आजा रे,
ओ मोहन - मोहन
बृज की तुझको रज पुकारे, गोपियों का माखन ,
तेरी सखिया तुझको पुकारे, आजा मेरे मोहन ,
आजा रे - आजा रे ओ मेरे मोहन आजा ,
लोट के वापस आजा रे,
ओ मोहन - मोहन
गोकुल तेरा सुना पड़ा हैं , याद में तेरी मोहन ,
जैसे कोई छीन गया हो, उससे उसका बचपन ,
आजा रे - आजा रे ओ मेरे मोहन आजा ,
लोट के वापस आजा रे,
ओ मोहन - मोहन
मैया बुलाये तुझको कन्हैया , लल्ला मेरे आ रे,
माँ की लोरी , माँ का पलना , कान्हा तुझको पुकारे,
आजा रे - आजा रे ओ मेरे मोहन आजा ,
लोट के वापस आजा रे,
ओ मोहन - मोहन
Shrijirasik
भगत के वश में है भगवान,
भक्त बिना ये कुछ भी नहीं है,
भक्त है इसकी शान,
भगत मुरली वाले की रोज बृन्दावन डोले,
कृष्णा को लल्ला समझे, कृष्णा को लल्ला बोले,
श्याम के प्यार में पागल, हुई वो श्याम दीवानी ,
अगर भजनो में लागे, छोड़ दे दाना पानी,
प्यार कारन वो लागी उससे अपने पुत्र समान,
भगत के वश में है भगवान...
वो अपने कृष्णा लला को गले से लगा के रखे,
हमेशा सजा कर रखे की लाड लड़ा कर रखे ,
वो दिन में भाग के देखे, की रात में जाग के देखे,
कभी अपने कमरे से, श्याम को झांक के देखे,
अपनी जान से ज्यादा रखती अपने लला का ध्यान,
भगत के वश में है भगवान...
वो लल्ला लल्ला पुकारे हाय क्या जुल्म हुआ रे ,
बुढ़ापा बिगड़ गया जी लाल मेरा कैसे गिरा रे ,
जाओ डॉक्टर को लाओ लाल का हाल दिखाओ ,
अगर इसको कुछ हो गया मुझे भी मार गिराओ ,
रोते रोते पागल होगई घर वाले परेशान ,
भगत के वश में है भगवान...
नब्ज को टटोल के बोले, ये तेरा लाल सही है,
कसम खा के कहता हूँ कोई तकलीफ नहीं है,
वो माथा देख के बोले ये तेरा लाल सही है ,
माई चिंता मत करियो कोई तकलीफ नहीं है ,
जोहि सीने से लगाया पसीना जम कर आया ,
उसने कई बार लगाया और डॉक्टर चकराया ,
धड़क रहा सीना लल्ला का, मूर्ति में थे प्राण ,
भगत के वश में है भगवान...
देख तेरे लाल की माया बड़ा घबरा रहा हूँ,
जहाँ से तू लल्ला लाई वही पे जा रहा हूँ ,
लाल तेरा जुग जुग जिए बड़ा एहसान किया है,
आज से सारा जीवन उसी के नाम किया है,
बनवारी तेरी माँ नहीं पागल पागल सारा जहाँ,
भगत के वश में है भगवान...
Shrijirasik
तर्ज – चार दिनों का प्यार ओ रब्बा (लम्बी जुदाई)
( बिछड़े अभी तो हम बस कल परसों,
जिऊंगी मैं कैसे इस हाल में बरसों,
राधा पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए॥ )
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए......
एक तो श्याम मेरे पास नहीं रे,
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे,
उसपे ये सावन आया, हाय
उसपे ये सावन आया,
आग लगायी,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए......
चिठ्ठीये नी दर्द फ़िराक़ वालिये,
ले जा ले जा संदेशा सोहणे यार दा
तेनु वासता दिल दी पुकार दा
ले जा ले जा संदेशा सोहणे यार दा....
बाग उजड़ गए खिलने से पहले,
श्याम बिछड़ गए मिलने से पहले,
कोयल की कुक ने हुक लगाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए.....
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए,
देर लगाए,
भक्त पुकारे मेरे श्याम कन्हाई,
आजा देर लगाए,
ओ बंसीवाले सांवरा बड़ी देर लगाए.....
Shrijirasik
तर्ज – दिल दीवाने का डोला
मेरे इस टूटे दिल को आधार चाहिए,
मेरे इस पगले दिल को आधार चाहिए,
वो काली कमली वाला मेरा यार चाहिए.......
समझाना बड़ा मुश्किल है,
आखिर तो दरदे दिल है,
सच्चा दरबार लगा है,
ये कान्हा की महफ़िल है,
नैनो को बंसी वाले का हो ओ,
नैनो को बंसी वाले का,
नैनो को बंसी वाले का आधार चाहिए,
वो काली कमली वाला मेरा यार चाहिए......
कुछ कमी ना अरमानो की,
तेरे इन दीवानो की,
मुझको मदहोश बनाये,
ये कटार तेरे नैनो की,
दिल नाच उठे वो हो ओ,
दिल नाच उठे वो,
दिल नाच उठे वो सांवरिया सरकार चाहिए,
वो काली कमली वाला मेरा यार चाहिए......
जितना खिचाव चितवन में,
होता जो मेरे मन में,
फिर तो ये दिल दीवाना,
उड़ जाता निल गगन में,
हाथो में मेरे हो ओ,
हाथो में मेरे,
हाथो में मेरे यार की पतवार चाहिए,
वो काली कमली वाला मेरा यार चाहिए......
भक्तो के तुम प्यारे हो,
तुम जिगरी दिल वाले हो,
कितनो पर डोरे डाले,
तेरे ये मस्त नज़ारे,
यशोदा नंदन के हो ओ,
यशोदा नंदन के,
यशोदा नंदन के नैनो का दीदार चाहिए,
वो काली कमली वाला मेरा यार चाहिए.......
Shrijirasik
तुमने ठुकराया कान्हा तो कहां पर जाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा,
तुमने ठुकराया कान्हा तो कहां पर जाऊंगा.....
हे दयामय कर दया की भीख दो,
हाथ किसके दर पे जा फैलाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
जिंदगी पापो में सारी कट गई,
किस तरह मुंह आपको दिखलाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
मुझको ना तारो मुझे दो कुछ सजा,
पापियों में नाम मैं कर जाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
हे श्यामा मेरी खता सब माफ कर,
उम्र सारी गीत तेरे गाऊंगा,
नाम ले लेकर तेरा मर जाऊंगा......
Shrijirasik
तर्ज – थारे वास्ते रे ढोला थारे वास्ते
सांची सांची कह दे रे बाबा,
सांची सांची कह दे रे कान्हा,
कोण लागु मै तेरी कोण लागू,
तू मेरो कोण लागे,
तू मेरो कोण लागे.......
गिर जाऊं पकड़ उठावे,
भटकूँ तो राह दिखावे,
घबराऊ दौड्यो आवे,
हिवड़े ने धीर बंधावे,
दोड़्यो आवे, भाग्यो आवे,
काम बणावे, पर नजर ना आवे,
पीछे पीछे चलूँ तू तो,
चले आगे आगे रे मेरे,
चले आगे, तू मेरो कोण लागे......
अटक्योड़ा काम बणावे,
खर्चो यो कोण चलावे,
मैं तो गानो नही जाणु,
किरपा है तेरी तू गवावे,
तू ही जाणे तेरी माया,
तन्ने वेद समझ नही पावे,
में क्या जाणु तू ही जाणे,
सुत्या भाग जागे रे म्हारा,
भाग जागे, तू मेरो कोण लागे......
रक्षा करे हरदम तू मेरी,
छोडूंगी ना चोखट तेरी,
सेवा तेरी करती रहु में,
अभिलाषा है ये श्याम मेरी,
उमा लहरी शरण तुम्हारी,
पत राखो हे कृष्ण मुरारी,
साँवरा सलोना मेरा तू,
रहियो सागे सागे मेरे,
रहियो सागे, तू मेरो कोण लागे.........
सांची सांची कह दे रे बाबा,
सांची सांची कह दे रे कान्हा,
कोण लागु मै तेरी कोण लागू,
तू मेरो कौन लागे,
तू मेरो कोण लागे......
Shrijirasik
खींचे खींचे रे दुशासन मेरो चीर अरज सुनो गिरधारी
1. हस्तिनापुर में जाकर देखो, महफिल हो गई भारी
कौरव पांडव सभा बीच में, खड़ी द्रोपती नारी
उनके नैनों से बरस रहो नीर, सुनो गिरधारी
2. पांचो पांडव ऐसे बैठे, जैसे अबला नारी
द्रोपती अपने मन में सोचे, दुर्गति भाई हमारी
नहीं है, नहीं है रे धरैया कोई धीर, अरज सुनो गिरधारी
3. वो दिन याद करो कन्हैया, उंगली कटी तुम्हारी
दोनों हाथों पट्टी बांधी, चीर के अपनी साड़ी
आ गई आ गई रे, कन्हैया तेरी याद, अरज सुनो गिरधारी
4. राधा छोड़ी रुक्मण छोड़ी, छोड़ी गरुण सवारी
नंगे पैर कन्हैया आए, ऐसे प्रेम पुजारी
बच गई बच गई,द्रोपती जी की लाज,अरज सुनो गिरधारी
5. खींचत चीर दुशासन हारो, हार गयो बल धारी
दुर्योधन की सभा बीच में, चकित हुए नर-नारी
बढ़ गयो बढ गयो रे, हजारों गज चीर, अरज सुनो गिरधारी
6.साड़ी हैं कि नारी है,, कि नारी बीच साड़ी है
नारी ही की साड़ी है, कि साड़ी ही की नारी हैं
कैसे बढ़ गया रे, हजारों गज चीर, अरज सुनो गिरधारी
7.चीर बढ़न की कोई न जाने, जाने कृष्ण मुरारी
चीर के भीतर आप विराजे, बनके निर्मल साड़ी
ऐसे बढ़ गए रे, हजारों गज चीर, अरज सुनो गिरधारी
Shrijirasik
https://www.bhajanganga.com/bhajan/lyrics/id/33005/title/Gopal-Krishna-mere-kar-door-tu-andhere
गोपाल, कृष्ण मेरे, कर, दूर तूँ अँधेरे ॥
वस जायो, मन में मेरे ॥, दुखड़े, हरो तुम मेरे...
गोपाल, कृष्ण मेरे...
झूम झूम के, महिमा गाए, जो भी तेरे, दर पे आए l
सुँदर सूरत, देख के तेरी, राधा ने भी, तेरे गुण गाए ॥
बँसी वाले, मुरली मनोहर ॥, मेरे दिल में, लगा ले डेरे...
गोपाल, कृष्ण मेरे...
ऑंखे तेरी, मोतियन माला, सुँदर है मेरा, बृज गोपाला l
सूरत तेरी, इतनी प्यारी, सारे जगत से, है यह न्यारी ॥
तेरा ध्यान मैं, निस दिन ध्याऊँ ॥, आजा अब तो, पास तूँ मेरे...
गोपाल, कृष्ण मेरे...
सुने मन में, ज्योत जलाई, सारी दुनियाँ, तूने बनाई l
रोते हुए को, तूने हँसाया, तूने सब की, विगड़ी बनाई ॥
मेरी भी तो, विगड़ी बना दे ॥, आई आज मैं, द्वार पे तेरे...
गोपाल, कृष्ण मेरे...
Shrijirasik
बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा-2
दूर करो दुख मेरा, बिहारी जी,
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥
सुना है जो तेरे दर पे आए,उसके सब दुखड़े मिट जाए-2
आया शरण तिहारी रे-2 अब दूर करो दुख मेरा।
श्री बांके बिहारी.....2
जनम जनम का मैं हूँ भटका ,बेड़ा आज भवर में अटका-2
पार करो बनवारी रे-2 अब दूर करो दुख मेरा।
श्री बांके बिहारी....2
शबरी अहिल्या गणिका नारी,सब ही तुमने पार उतारी-2
आयी मेरी बारी रे-2,अब दूर करो दुख मेरा।
श्री बांके बिहारी....2
मोर मुकुट पीताम्बर धारी,संग में हो श्री राधा प्यारी-2
मेरे गिरवर धारी रे-2,अब दूर करो दुख मेरा।
श्री बांके बिहारी....2
बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा,
दूर करो दुख मेरा, बिहारी जी,
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥
Shrijirasik
श्याम मथुरा ना जा तेरी राधा रो रो पुकारे
हम जिएंगे किसके सहारे
गोपी ये रो रो के आहें भरे
तेरे बिना है कौन नटखट मेरे
श्याम मथुरा ना जा
तेरी गैईया रो रो पुकारे
हम जिएंगे किसके सहारे
किधर गई ओ तसली तेरी
रुल जायेगी जींद कली मेरी
श्याम मथुरा ना जा
यशोदा मैया ये रो रो पुकारे
हम जिएंगे किसके सहारे
तेरे बिना जिन्दा रहना नही
दर्द जुदाई का सेहना नही
तेरी गोपी ये रो रो पुकारे
हम जिएंगे किसके सहारे
Shrijirasik
वक्त की आंधी से,पत्थर भी पिघल जाते हैं
कह-कह फ़िर से,अश्कों में बिख़र जाते हैं
कौंन याद करता है,दुनिया में किसी को
वक्त के साथ साथ,हालात बदल जाते हैं
वक्त इन्सांन का,सम्मान करा देता है
वक्त इन्सांन का,अपम्मान करा देता है
वक्त पड़ने पर आया है समझ में मेरी
वक्त इन्सांन की पहचान करा देता है
कोई श्याम सा नहीं देखा,जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा
कोई श्याम...
ध्यान में योगियों के आता नहीं,
संग भगतों के नाचता देखा
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा,
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा
कोई श्याम...
किस तरह द्रोपदी नगंन होती,
श्याम साड़ी में ही छिपा देखा
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा,
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा
कोई श्याम...
कदंम-कदंम पे बचाता है अपनें भगतों को,
ऐसा परमात्मा नहीं देखा
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा,
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा
कोई श्याम...
मैं आया हूं अब तेरे दर पे,
जब कोई आसरा नहीं देखा
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा,
जो भी देखा वो बैवफा देखा
कोई श्याम सा नहीं देखा
कोई श्याम...
Shrijirasik
मथुरा को ना जाओ कन्हईया
मथुरा, को ना, जाओ कन्हईया,
तेरी रोवे, यशोदा मईया ॥
ओ तेरी रोवे, यशोदा मईया,
ओ तेरी रोवे, यशोदा मईया,
मथुरा, को ना, जाओ...
ओ तेरे, बिन राधा, कैसे रहेगी ।
ओ तेरी, यादों में, रो रो मरेगी ॥
कैसे, रहेंगे, ग्वाले भईया,
तेरी रोवे, यशोदा मईया ।
मथुरा, को ना, जाओ...
कौन खाएगा, चोरी चोरी माख्खन ।
कौन नाचेगा, नंद जी के आंगन ॥
कौन लाएगा, घेर घेर गईयां,
तेरी रोवे, यशोदा मईया ।
मथुरा, को ना, जाओ...
तेरे बिन, ब्रज में ना, कोई मेरा ।
एक, तूँ ही तो है, सहारा मेरा ॥
मेरा कोई ना, हाल पूछेईया,
तेरी रोवे, यशोदा मईया ।
मथुरा, को ना, जाओ...
तेरे बिन ब्रज में, कैसे रहेंगे ।
तेरी यादों में, रो रो मरेंगे ॥
अब तो, कोई ना, धीर धरेईया,
तेरी रोवे, यशोदा मईया ।
मथुरा, को ना, जाओ...
जय श्री कृष्णा
Shrijirasik
जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ।
तू बड़ा चोर है और बरजोर है ॥
प्रेम जो करेगा तुझसे, वो धोखा खायेगा ।
घर परिवार सब कुछ लुट जायेगा ॥
तू है लुटेरा कान्हा और चितचोर है ।
जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ॥
रूप को दिखाया जिसको, वो तेरा हो गया ।
तेरे नाम का दिवाना, बावरा वो हो गया ॥
होश ही नहीं है उसकों, कहाँ ? किस ओर है ?
जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ॥
नजरों से लूटता और, बंशी की तान से ।
टेढ़ी-मेढ़ी चाल और, लूटे मुस्कान से ॥
लीला कथा से लूटा, कान्त विभोर है ।
जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ॥
Shrijirasik
मुरली वाले आन कर...
मुरली वाले आन कर मुरली सुना
मन हुआ बेचैन, मुरली ध्वनि बिना ॥ टेर ॥
गोपियां हैं सुस्त और अंसुअन झड़ी
क्यों सताते हो श्याम खावो तरस
मुरली वाले...
राधे बौराई पुकारे सांवरे
प्रीति कर मैं फंस गई झूठे भरम
मुरली वाले...
मात यशुदा हो रही बेहाल हैं
पूत धोखा दे गया, फूटे करम
मुरली वाले...
उजड़ा मधुबन, झर गए सब पुष्प हैं
घास बिन, जाती नहीं गऊएं चरन
मुरली वाले...
कब मिलोगे मेरे श्याम सांवरे
आंखें राह तकती हैं तुम्हारी
रो रो के बुलाती हूं तुमको
क्यों नहीं आते हो प्यारे
वृंदावन की गलियां सूनी लगती हैं
तुम बिन यमुना का पानी रूखा लगता है
बंसी की धुन सुनाई नहीं देती
मेरा मन तड़प तड़प के रोता है
कृपा करो कन्हैया आ जाओ
दर्शन दे दो एक बार प्रभु
Shrijirasik
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे,
तुम बिन रह्यो न जाय, गोवर्धन वासी सांवरे….
बंक चिते मुसकाय के, सुंदर बदन दिखाय,
लोचन तड़पे मीन ज्यों, जुग भर धरी बिहाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
सप्तक स्वर बंधान सौं, मोहन वेणु बजाय,
सुरति सुहाई बांधिके, मधुर – मधुर गाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
रसिक रसीली बोली, गिरि चढ़ि गाय बुलाय,
गाय बुलाई दूधरी, ऊंची टेर सुनाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
दृष्टि पड़ी जा दोष ते, तब ते रुचे न आए,
रजनी नींद न आवरी, एहि बिसरे भोजन पान,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
दर्शन को नैना तपे, वचन सुनन को कान,
मिलिबे को हियरा तपे, हिय की जीवन प्राण,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
मन अभिलाषा यह रहे, लगे न नैन निमेष,
इक टक देखूं, नटवर नागर भेष,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
पूरन शशि मुख देख के, चित्त चोटयो वही ओर,
रूप सुधा रसपान को, जैसे चन्द्र चकोर,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
लोक लाज विधि वेद के, छाँड़े सबई विवेक,
कमल कली रवि ज्यों बढ़े, छिन – छिन प्रीति विशेष,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
मन मथ कोटिक वारिने, देखी डगमग चाल,
युवती जनमन फन्दना, अम्बुज नयन विशाल,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
कुंज भवन क्रीड़ा करो, सुख निधि मदन गोपाल,
हम वृंदावन मालती, तुम भोगी भ्रमर भूपाल,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
यह रट लागी लाडिले, जैसे चातक मोर,
प्रेम नीर वर्षा करो, नव घन नन्द किशोर,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
युग – युग अविचल राखिए, यह सुख शैल निवास,
श्री गोवर्धन रूप पे, बल जाय चतुर्भुज दास,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
तुम बिन रह्यो न जाय, तुम बिन रह्यो न जाय,
गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी सांवरे….
Shrijirasik
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
बनोगे राधा तो यह जानोगे, बनोगे राधा तो यह जानोगे,
के कैसा प्यार है मेरा,
बनोगे राधा तो यह जानोगे, के कैसा प्यार है मेरा,
बनोगे राधा तो यह जानोगे, बनोगे राधा तो यह जानोगे,
के कैसा प्यार है मेरा,
बनोगे राधा तो यह जानोगे, के कैसा प्यार है मेरा,
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
क्या होती प्रतीक्षा है, की पीड़ा होती है,
कितना जलता है दिल कब आँखे रोटी है,
बहेंगे आँसू, बहेंगे आँसू, तब यह जानोगे,
की कैसा प्यार है मेरा, की कैसा प्यार है मेरा,
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
जब कोई सुनेगा ना, जब कोई सुनेगा ना,
तेरे मान के दुखड़े जब ताने सुन सुन के होंगे दिल के टुकड़े,
सुनोगे ताने तब यह जानोगे, सुनोगे ताने तब यह जानोगे,
की कैसा प्यार है मेरा, की कैसा प्यार है मेरा,
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
पनघट मेी मधुबन मेी वो इंतेजर करना,
आए श्याम तेरी खातिर वो घुट घुट के मारना,
करोगे इंतजार जानोगे, करोगे इंतजार जानोगे,
की कैसा प्यार है मेरा, की कैसा प्यार है मेरा,
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
तुम याद ना आया करो, तुम याद ना आया करो,
याद आने से पहले तुम ना जया करो,
तुम याद ना आया करो, तुम याद ना आया करो,
अब एक तमन्ना है, गर फिर से जानम मिले,
मई श्याम बनू तेरा तू राधा बन के जिए,
बनोगे राधा तो यह जानोगे, बनोगे राधा तो यह जानोगे,
के कैसा प्यार है मेरा,
बनोगे राधा तो यह जानोगे, के कैसा प्यार है मेरा,
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
हो सावरे हो सावरे हो सावरे हो सावरे,
Shrijirasik
कुछ दो या ना दो श्याम, इस अपने दीवाने को
दो आँसुं तो दे-दे, चरणों में बहाने को
नरसी ने बहाये थे, मीरा ने बहाये थे
नरसी ने बहाये थे, मीरा ने बहाये थे
जब-जब भी कोई रोया, तुम दौड़ के आये थे
काफी है दो बुँदे, घनश्याम रिझाने को
दो आँसुं तो दे-दे, चरणों में बहाने को
आँसुं वो खजाना है, किस्मत से मिलता है
आँसुं वो खजाना है, किस्मत से मिलता है
इनके बह जाने से, मेरा श्याम पिघलता है
करुणा का तुं सागर है, अब छोड़ बहाने को
दो आँसुं तो दे-दे, चरणों में बहाने को
दुःख में बह जाते हैं, खुशियों में जरुरी हैं
आंसू के बिना राजू, हर बात अधूरी हैं
पूरा करते आँसुं, हर इक हर्जाने को
दो आँसुं तो दे-दे, चरणों में बहाने को
कुछ दो या ना दो श्याम, इस अपने दीवाने को
दो आँसुं तो दे-दे, चरणों में बहाने को
Shrijirasik
तरज़-थोड़ा सा प्यार हुआ है
तुझे हम ढूंढ रहे हैं,कहाँ हो मुरली वाले
या तो अब सामने आ,या हमें भी छुपाले
तुझे हम ढूंढ रहे है....
दर्द से अपना रिश्ता,पुराना हो गया है
तेरी चाहत में ये दिल ये,दीवाना हो गया है
सुन जरा धड़कनों को,हम है तेरे हवाले
या तो अब सामने आ,या हमें भी छुपाले
तुझे हम ढूंढ रहे हैं....
सफर में जिंदगी के,कुछ ऐसे मोड़आये
जिन्हें समझा था अपना,वही निकले पराये
इक तेरा है सहारा,गले से मुझे लगाले
या तो अब सामने आ, या हमें भी छुपाले
तुझे हम ढूंढ रहे हैं....
डोर साँसों की टूटे,जमाना चाहे रूठे
यही बस आरजू है,तेरा दामन ना छुटे
तड़पते है तेरे बिन,पास अपने बुलाले
या तो अब सामने आ,या हमें भी छुपाले
तुझे हम ढूंढ रहे हैं,कहाँ हो मुरली वाले
या तो अब सामने आ,या हमें भी छुपाले
तुझे हम ढूंढ रहे है....
Shrijirasik
हे बनवारी, हे गिरधारी, लाज रखो हे कृष्ण मुरारी
लाज रखो हे कृष्ण मुरारी,हे गिरधारी हे बनवारी
कहता है खुद को तू बलशाली,
खींच रहा अबला की साड़ी,
लाज रखों हे कृष्ण मुरारी,
हे गिरधारी हे बनवारी ॥
अब मैं समझी एक है अंधा,
यहाँ तो सारी सभा है अंधी
हे गिरधारी हे बनवारी,
लाज रखों हे कृष्ण मुरारी ॥
Shrijirasik
तर्ज-अगर श्यामा जू ना होती
तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा
इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है
तड़पती हूँ...
पल पल नाम जिवाह पे, मन तेरे ध्यान में खोया
लगी है आग तन मन में, ना जाने कब मिलन होगा
तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा
इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है
कहाँ जाऊं करूँ मैं क्या, समझ मुझे कुछ ना आता है
दर्द इतना बड़ा दिल में, ना जानें कब मिलन होगा
तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा
इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है
ये मन रूप रसका पागल है, धसका है धस्सा जाता
आख़री सांस है मेरी, ना जानें कब मिलन होगा
तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा
इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है
Shrijirasik
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है
चोट खायी है जो मैंने दिल में, वो दिखने के काबिल नहीं है
जबसे देखा है जलवा तुम्हारा, कोई आँखों को जचता नहीं है
यूं तो देखे है बहुत नूर वाले, सारे आलम में तुमसा नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है
तेरी सूरत पे क़ुर्बान जाऊ, तेरी आँखे है या मय के प्याले
जिनको नज़रो से तुमने पिलाई, होश आने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है
मैंने पूछा की अब कब मिलोगे, पहले मुस्काये फिर हंस के बोले
सबके दिल में समाये हुए है, आने जाने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है
Shrijirasik
सैर - पापी कंस को कृष्ण ने मारा,
दुःख से सब भक्तो को उबारा,
मात पिता को अपने छुड़ाए,
उग्रसेन का कष्ट मिटाये,
बन गये मथुरा के महाराजा,
बजने लगा खुशियों का बाजा,
कान्हा बन गए मथुरा वासी,
पर छा गई फिर ब्रज में उदासी,
गोकुल में छाई थी उदासी,
रोता था हर गोकुल वासी,
राधा विरह में बन गई पगली,
तड़पे जैसे जल बिन मछली,
बेबस अधिक वो जब होती थी,
ये कह कह के वो रोती थी।
याद मुझको कन्हैया तेरी आई,
याद मुझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे.....-2
तूने राधा की सुध क्यों भुलाई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मुझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मूझको कन्हैया तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे।।
ब्रज से नाता तोड़ गए तुम,
मुझको तड़पता छोड़ गए तुम,
जान ले लेगी तेरी जुदाई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मूझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे।।
तोड़ दिया है पाँव का पायल,
अब क्या नाचू हो गई घायल,
तेरी बंसी तो हो गई पराई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मूझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे।।
छोड़ चुकी हूँ जाना पनघट,
हो गया सुना बन गया मरघट,
रुत है पतझड़ की मधुबन में आई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मूझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे।।
प्रीत किये हो किशन कन्हैया,
दिल में बसे हो किशन कन्हैया,
दिप अँखियो में सूरत समाई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मूझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे।।
याद मुझको कन्हैया तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मुझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे,
तूने राधा की सुध क्यों भुलाई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मुझको ऐ श्याम तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे,
याद मूझको कन्हैया तेरी आई,
अखियों से नीर बरसे।।
Shrijirasik
काजल लागे किरकरो,
ओर सुरमो सयो नही जाय,
जिन नैना मोहन बसे,
तो दूजो किया रे समाय।
दर्द ना जाने कोई,
दर्द ना जाने कोई,
मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई,
मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।
दर्द की मारी वन वन डोलु,
दर्द की मारी वन वन डोलु,
वैद्य मिल्यो ना कोई,
वैद्य मिल्यो ना कोई,
मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।
हिरा री गत जोहारी जाने,
हिरा री गत जोहारी जाने,
जो कोई जोहारी होय,
जो कोई जोहारी होय,
मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।
सूली ऊपर सेज पिया की,
सूली ऊपर सेज पिया की,
ओ सोवनो किन विद होय,
सोवनो किन विद होय,
मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई।।
घायल की गत घायल जाने,
घायल की गत घायल जाने,
जो कोई घायल होय,
जो कोई घायल होय,
मायरी मेरो दर्द ना जाने कोई.....
Shrijirasik
जब याद तुम्हारी आती है ,मैं तेरे दर पर आता हूँ ,-2
अपने सुख दुःख को हे ठाकुर ,मैं रो रो कर मैं तुम्हें सुनाता हूँ।
जब याद तुम्हारी....
तुम मेरे हो मैं तेरा हूँ बस और नहीं कुछ याद मुझे -2
ये ध्यान सदा मेरे मन में रहे, ये विनय सुनाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी....
फूलों में तुम्हारी खुशबू है ,पत्तों में तुम्हारी हस्ती है -2
पर फूल नहीं है पास मेरे बस नैन चढ़ाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी....
तुम मेरे प्यारे सांवरिया मेरा तुमसे हमेशा नाता है -2
नहीं और मेरी कोई सुनता है मैं तुम्हें सुनाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी....
अपने सुख दुःख को हे ठाकुर ,मैं रो रो कर मैं तुम्हें सुनाता हूँ। -2
जगत के रंग क्या देखूं
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है।
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे तेरा दरबार काफी है॥
नहीं चाहिए ये दुनियां के निराले रंग ढंग मुझको,
निराले रंग ढंग मुझको
चली जाऊँ मैं वृंदावन
चली जाऊँ मैं वृंदावन तेरा श्रृंगार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
जगत के साज बाजों से हुए हैं कान अब बहरे
हुए हैं कान अब बहरे
कहाँ जाके सुनूँ बंशी
कहाँ जाके सुनूँ बंशी मधुर वो तान काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
जगत के रिश्तेदारों ने बिछाया जाल माया का
बिछाया जाल माया का
तेरे भक्तों से हो प्रीति
तेरे भक्तों से हो प्रीति श्याम परिवार काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
जगत की झूटी रौनक से हैं आँखें भर गयी मेरी
हैं आँखें भर गयी मेरी
चले आओ मेरे मोहन
चले आओ मेरे मोहन दरश की प्यास काफी है
जगत के रंग क्या देखूं तेरा दीदार काफी है
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे तेरा दरबार काफी है
Shrijirasik
दिल दार यार प्यारे, गलियों में मेरी आजा॥
नैना तरस रहे है मुखड़ा जरा दिखा या
सितम गरज तो मुझ को सताये चला जा,
पर मुखड़ा जरा सा दिखाये चला जा॥
नहीं पास आने को कहती हो तुझको,
पर अपना जरा सा बनाये चला जा,
दिल दार यार पियारे, गलियों में मेरी आजा,
की दम दा भरोसा है, गलियों में मेरी आजा,
मेरा यार बनके आजा,गलियों में मेरी आजा,
नैना तरस रहे है मुखड़ा जरा दिखा या
सब लोक लाज खोए, चुप चाप बैठ रोये
अपना नहीं है कोई,अपना मुझे बनाजा।
दिल दार................
कब तक बताओ पियारे, मन को रहो में मारे॥,
किस के रहो में सहारे, इतना मुझे बताजा।
दिल दार यार पियारे, गलियों में मेरी आजा,
इक वार देदो दर्शन दिल की है यह तमना॥,
कही दम निकल ना जाइए तेरा इंतजार करके॥
हरी जी मोरी अखियन आगे रहियो,
नाथ मोरी अँखियन आगे रहियो
नागनिया बन के डस गई मोहन तेरी बांसुरिया,
मेर गई कलेजा चीर मोहन तेरी बांसुरिया,
रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे चमकें बिजुरिया,
मैं कैसे आऊं श्याम मेरी तो भींगे चुनरिया,
नागरिया बन के डस गई.............
जमुना जल में भरन जाता है सिर पे गागरिया,
अरे ऐसी मारी काकुल मेरी फोड़ी गागरिया,
नागनिया बन के डस गई.........
सास भी सोये नन्द भी सोये जागें सांवरिया,
अरे मैं कैसे आऊं श्याम मेरी तो बाजे पायलिया,
नागनिया बन के डस गई..........
हम जमुना जल भरन जाता है मिल गये सांवरिया,
वे लेकर चीर क़दम चढ़ बेटे रह गई नागनिया,
नागनिया बन के डस गई मोहन तेरी बांसुरिया..........
Discover the same devotional mood
Experience different devotional moods