॥ राधे राधे ॥

अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता।
सफ़ीना डूबता अपना,
भंवर से पार ना होता,
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता॥
करो एक कोर करुणा की,
निभा लो जैसा भी हूँ मैं।
शरण में आता ना तेरी,
अगर विश्वास ना होता,
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता॥
बात गैरों की करें हम क्या,
हमें अपनों ने ठुकराया।
तेरी रहमत पे ज़िन्दा हूँ,
मैं कब का मर गया होता,
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता॥
ना जाने कौन सा मंज़र,
हमें बरसाना ले आया।
तेरा दरबार ना होता,
मैं भी सरकार ना होता,
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता॥
भला मैं और कहाँ जाता,
अगर तुम साथ ना होती।
अगर तुम भी ना अपनाती,
ये 'माधव' कहाँ गया होता,
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता॥
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता।
सफ़ीना डूबता अपना,
भंवर से पार ना होता,
अगर श्यामा जू ना होती,
तो हम जैसों का क्या होता॥
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