॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Ganesh - Energetic Bhav
गणेश - ऊर्जावान भाव
Bhajans (8)
Gouri Ka Lala Aaya
bhajanShrijirasik
गौरी का लाला आया
गौरी का, लाला आया ।
शंकर का, प्यारा आया ।
जयकारा, गूंजे, गली गली ॥
मैंने, गणपति का, आसन सजाया ॥
और, फ़ूल विछाए, गली गली ॥
गौरी का, लाला आया...
मैंने, वंदन, वार लगाए ॥
मोतियन, की सजाई, लड़ी लड़ी ॥
गौरी का, लाला आया...
गण, पति के, चरण पखारे ॥
अब, गंगा, बह रही, गली गली ॥
गौरी का, लाला आया...
गण, पति की, ज्योत जलाई ॥
अब, रोशन, हो गई, गली गली ॥
गौरी का, लाला आया...
मैंने, लड्डू का, भोग लगाया ॥
भंडारा, हो रहा, गली गली ॥
गौरी का, लाला आया...
गण, पति का, भजन / कीर्तन कराया ॥
उनकी, कृपा बरसे, गली गली ॥
गौरी का, लाला आया...
गण, पति का, दर्शन पाया ॥
अब, मंगल होए, गली गली ॥
गौरी का, लाला आया...
Aao Aao Goura Ke Lal Ho Lal
bhajanShrijirasik
आओ आओ गौरां के लाल
आओ आओ, गौरां के लाल, हो लाल,
तुम्हें, आज, बुलावा देते हैं ॥
तुम्हें, आज, बुलावा देते हैं ॥
आओ आओ, गौरां के लाल...
पहले प्रभु, पूजा, तुम्हारी हो ।
सम्मान, के तुम, अधिकारी हो ॥
भोले ने...जय हो ॥।दिया वरदान, हो वरदान,
तुम्हें, आज, बुलावा देते हैं...
आओ आओ, गौरां के लाल...
शुभ, मंगल, कीर्तन करना है ।
प्रभु, तेरा दर्शन, करना है ॥
दर्शन दो...जय हो ॥।करो निहाल, हो लाल,
तुम्हें, आज, बुलावा देते हैं...
आओ आओ, गौरां के लाल...
सरताज़, तुम्हीं, सब देवन के ।
संकट, हरते, सब भक्तन के ॥
अब ले लो...जय हो ॥।भव से निकाल, ओ लाल,
तुम्हें, आज, बुलावा देते हैं...
आओ आओ, गौरां के लाल...
रिद्धि, सिद्धि और, शुभ लाभ लाओ ।
प्रभु, भक्तन का मान, बढ़ा जाओ ॥
करो, भक्तन...जय हो ॥।को मालामाल, ओ लाल,
तुम्हें, आज, बुलावा देते हैं...
आओ आओ, गौरां के लाल..
Hui Ghar Mai Jay Jaykar Re
bhajanShrijirasik
हुई, घर घर में, जय जयकार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
ऊँचा, आसन लगाओ,
उस पे, देवा बिठाओ ॥
तेरी, सेवा में, सारा संसार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
पहलें, चरण धुलाओ, दीया ज्योत जगाओ ॥
केसर, रौली का, तिलक लगाओ रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
फ़ूल, माला चढ़ाओ,
लड्डू, भोग लगाओ ॥
रिद्धि, सिद्धि के, तुम करतार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
एक, दंत कहें, दयावन्त कहें ॥
आया, मूषक पे, हो के स्वर रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
मन्नत, पूर्ण करो, सबकी, झोली भरो ॥
सारे, जग के, तुम भर्तार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
नाची, मन में उमंग,
भरा, खुशियों ने रंग ॥
गूंजी, गण पत, तेरी जयकार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
शंख, अंकुश लिए आए,
कमल, पाश लिए आए ॥
आए, मूषक पे, हो के सवार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
शिव, फूले ना समाए,
गौरां, वारी वारी जाए ॥
आए, जग के, पालनहार रे,
आया, गण पति का, त्योहार रे ॥
हुई, घर घर में, जय जयकार रे...
Aanand Hi Aanand Chhaya Maharaj Gajanand Aaya
bhajanShrijirasik
आनंद ही आनंद छाया
आनंद ही, आनंद छाया,
महाँराज, गजानंद आया ॥
महाँराज, गजानंद आया,
महाँराज, गजानंद आया ॥
आनंद ही, आनंद...
शीश, मुकुट धरे, माथे तिलक सजे ॥
तन, पे पीतांबर सजाया,
महाँराज, गजानंद आया ।
आनंद ही, आनंद...
गले, वैजयंती माला, माता गौरां के लाला ॥
मोदक, का भोग लगाया,
महाँराज, गजानंद आया ।
आनंद ही, आनंद...
तेरी, ज्योति जलाऊँ, तुझे भेंट चढ़ाऊँ ॥
भक्तों, ने मंगल गाया,
महाँराज, गजानंद आया ।
आनंद ही, आनंद...
तेरे, दर पे मैं आऊँ, आ के शीश झुकाऊँ ॥
बप्पा, अमृत, रस बरसाया,
महाँराज, गजानंद आया ।
आनंद ही, आनंद...
तेरा आसन लगाया, देवा फूलों से सजाया ॥
भक्तों ने, दर्शन पाया,
महाँराज, गजानंद आया ।
आनंद ही, आनंद...
Ma Goura Ka Lal Bada Pyara
bhajanShrijirasik
माँ गौरा का लाल बड़ा प्यारा
माँ, गौरा का, लाल बड़ा प्यारा,
जो, हरता है, संकट हमारा ॥
जो, हरता है, संकट हमारा ॥
माँ, गौरा का, लाल बड़ा...
इनको, पान चढ़े, और फूल चढ़े ।
भक्त, करते हैं, इनके दर्शन बड़े ॥
इनको, लड्डुअन का, भोग लगे प्यारा,
जो, हरता है, संकट हमारा ।
माँ, गौरा का, लाल बड़ा...
यह, अंधन को, आँख है देते ।
और, कोढ़न को, काया भी देते ॥
बांझन को, पुत्र का, सहारा,
जो, हरता है, संकट हमारा ।
माँ, गौरा का, लाल बड़ा...
रिधि, सिद्धि के, हो बड़े प्यारे ।
शिव, गौरा के, आँखों के तारे ॥।
दीन, दुखियों को, तेरा सहारा,
जो, हरता है, संकट हमारा ।
माँ, गौरा का, लाल बड़ा...
Mandir Mai Biraje Bholenath
bhajanShrijirasik
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
काहे के गणपति बनाएं,
काहे की बनाए भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
गोबर की गणपति बनाएं,
चिकनी मिट्टी के बनाए भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
कोंन दिना गणपति मनाए,
कोन दिनां भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
बुधवार गणपति मनाए,
सोमवार भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
दूध घास गणपति पे चढ़ावे,
बेलपत्र भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
लड्डू का भोग गणपति को लगाएं,
भांग धतूरा भोलेनाथ, चढ़ा लो लोटा जल भरके,
मंदिर मंदिर में विराजे भोलेनाथ,
चढ़ा लो लोटा जल भर के....
Ganpati Ko Pratham Manana H Utsav Ko Safal Banana H
bhajanप्रथम मनाना है...
गणपति को प्रथम मनाना है, उत्सव को सफल बनाना है शिव पार्वती के प्यारे को, भक्तों के बीच बुलाना है
गणपति को प्रथम मनाने को, देवों ने रीत चलाई है तीनों लोकों में छोटे बड़े, सब करते इनकी बड़ाई हैं जो काम सभी करते आए, हमको भी वही दोहराना है गणपति को प्रथम मनाना है...
오
कोई घृत सिंदूर चढ़ाते हैं, कोई मोदक भोग लगाते हैं कोई मेवा थाल सजाते हैं, कोई छप्पन भोग बनाते हैं जिस भोग से खुश होते गणपति, हमको वही लगाना है गणपति को प्रथम मनाना है...
2
उत्सव में सभी पधारे हैं, बस इनका आना बाकी है भक्तो मंगलाचार करो, इन्होंने आने की हां की है गणपति का नाच बड़ा प्यारा, उत्सव में आज नचाना है गणपति को प्रथम मनाना है...
Shree Ganesh Panchratna Stotram
stotraश्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!
मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।
कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।
अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।
नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1
नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।
नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।
सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।
महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥
समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।
दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।
कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।
मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥
अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् ।
पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।
प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।
कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥
नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।
अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।
हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् ।
तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥
महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं ।
प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।
अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।
समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ 6 ॥
श्रीमत् शंकर भगित्पादकृत श्रीगणेशपञ्चरत्न स्तोत्रम् संपूणकम्।
श्री गणेश चालीसा
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