॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Mukh Dadhi Lep Kiye
मुख दधि लेप किए सोभित कर नवनीत लिए
Surdas Ji
Kavi: Surdas Ji
मुख दधि लेप किए
सोभित कर नवनीत लिए।
घुटुरुनि चलत रेनु तन मंडित मुख दधि लेप किए॥
चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए।
लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए॥
कठुला कंठ वज्र केहरि नख राजत रुचिर हिए।
धन्य सूर एकौ पल इहिं सुख का सत कल्प जिए॥
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