॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Mero Man Anat Kha Sukh Pave
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावे
Surdas Ji
Kavi: Surdas Ji
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावे ।
जैसे उड़ि जहाज को पंछी, फिरि जहाज पर आवे ॥
कमल-नैन को छाँड़ि महातम, और देव को ध्यावे ।
परम गंग को छाँड़ि पियासो, दुरमति कूप खनावे ॥
जिहिं मधुकर अंबुज-रस चाख्यो, क्यों करील-फल खावे ।
सूरदास प्रभु कामधेनु तजि, छेरी कौन दुहावे ॥
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