॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Akhiyan Hari Darshan Ki Pyaasi
अखियाँ हरि-दरसन की प्यासी
Surdas Ji
Kavi: Surdas Ji
अखियाँ हरि-दरसन की प्यासी ।
देख्यो चाहति कमल-नैन को, निसि-दिन रहति उदासी ॥
आए ऊधो फिरि गए आँगन, डारि गए गर फाँसी ।
केसर तिलक मोतिन की माला, वृंदावन के वासी ॥
सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस बिन, लेवत करवट फाँसी ॥
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