॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Ab Laun Nasani Ab Na Nasaihaun
अब लौं नसानी अब न नसैहौं
Tulsidas Ji
Kavi: Tulsidas Ji
अब लौं नसानी, अब न नसैहौं ।
राम-कृपा भव-निशा सिरानी, जागे फिरि न डसैहौं ॥
पायो नाम चारु चिंतामणि, उर-करतें न खसैहौं ।
स्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी, चित कंचनहिं कसैहौं ॥
परबस जानि हँस्यो इन इंद्रिन, निज बस है न हँसैहौं ।
मन मधुकर पन करि तुलसी रघुपति पद-कमल बसैहौं ॥
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