॥ राधानामस्मरणे नास्ति दुःखलेशस्य सम्भवः ॥
Sun Radhika Dulari
सुन राधिका दुलारी
Radhe - Vinti Bhav
Artist: Shrijirasik
सुन राधिका दुलारी,
तेरे द्वार का भिखारी॥
तेरे श्याम का पुजारी,
एक पीड़ा है हमारी॥
हमें श्याम न मिला,
हमें श्याम न मिला॥
हम सोचते थे कान्हा कहीं, कुंजन में होगा।
अभी तो मिलन का हमने, सुख नहीं भोगा॥
सुनके प्रेम की परिभाषा,
मन में बँधी थी जो आशा।
आशा हुई रे निराशा,
झूठा दे गया दिलासा॥
हमें श्याम न मिला,
हमें श्याम न मिला॥
देता है कन्हाई जिसे, प्रेम की दशा।
सब विधि उसकी लेता, है परीक्षा॥
कभी निकट बुलाए,
कभी दूरियाँ बढ़ाए।
कभी हँसाए-रुलाए,
छलिया हाथ नहीं आए॥
हमें श्याम न मिला,
हमें श्याम न मिला॥
ओ अपना यहाँ जिसे, कहे सब कोई।
उसके लिए मैं ही, दिन-रात रोई॥
नेह दुनिया से तोड़ा,
नाता साँवरे से जोड़ा।
उसने ऐसा मुख मोड़ा,
मुझे कहीं का न छोड़ा॥
हमें श्याम न मिला,
हमें श्याम न मिला॥
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