॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Ranaji Mhe To Govind Ka Gun Gansya
राणाजी म्हें तो गोविंद का गुण गास्याँ
Meera Bai Ji
Kavi: Meera Bai Ji
राणाजी म्हें तो गोविंद का गुण गास्याँ।
चरणामृत को नेम हमारो नित उठ दरसण जास्याँ॥
हरि मंदिर में निरत करास्याँ घुँघरियाँ घमकास्याँ।
राम नाम का झाँझ चलास्याँ भव सागर तर जास्याँ॥
यह संसार बाड़ का काँटा ज्याँ संगत नहिं जास्याँ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर निरख परख गुण गास्याँ॥
राणाजी, मैं तो गोविंद का गुण गाऊँगी। चरण-अमृत लेना मेरा दस्तूर है इसलिए हमेशा सवेरे उठकर दर्शन को जाऊँगी। हरि मंदिर में नाचूँगी और घुँघरू झनकाऊँगी। राम नाम झाँझ पर गाऊँगी और भवसागर से पार हो जाऊँगी। यह संसार अहाते का काँटा है, जिसको साथ नहीं ले जाऊँगी। मीरा के प्रभु गिरधर नागर जाँच-परखकर गुण गाऊँगी।
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