॥ राधे राधे ॥

मेरो तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई ।
जाके सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई ॥
तात-मात-भ्रात-बंधु, आपनो न कोई ।
छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई ॥
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोई ।
अब तो बात फैल गई, जाणत सब कोई ॥
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोई ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, जो होणी सो होई ॥
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