॥ राधे राधे ॥

श्रीराधे रानी दे डारो बाँसुरी मोरी।
जा बंसी में मेरी प्राण बसत है, सो बंसी गई चोरी॥
काहे से गाऊँ प्यारी काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गईयाँ फेरी।
मुख से गावो कान्हा हाथों से बजाओ, लकुटी से लाओ गईयाँ घेरी॥
हा हा करत तेरे पैयाँ परत हूँ, तरस खाओ प्यारी मोरी।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, बंसी लेकर छोरी॥
राधे रानी! मेरी बाँसुरी मुझे दे दो। जिस बाँसुरी में मेरी जान है वही बाँसुरी चोरी चली गई। अब मैं किससे गाऊँ, किससे बजाऊँ और गायों को कैसे वापस बुलाऊँ? कन्हैया, तुम मुँह से गाओ, हाथों से बजाओ और लाठी से गायों को वापस ले जाओ। मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूँ। तुम्हारे पाँव पड़ता हूँ। मेरी प्यारी मुझ पर तरस खाओ। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, मेरी बाँसुरी लेकर छीन लो।
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