॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Jogiya Ri Preetadi Hai Dukhda Ri Mul
जोगिया री प्रीतड़ी है दुखड़ा री मूल
Meera Bai Ji
Kavi: Meera Bai Ji
जोगिया री प्रीतड़ी है दुखड़ा री मूल।
हिलमिल बात बणावट मीठी पाछे जावत भूल॥
तोड़त जेज करत नहिं सजनी जैसे चमेली के मूल।
मीरा कहे प्रभु तुमरे दरस बिन लगत हिवड़ा में सूल॥
जोगी की प्रीति तमाम दु:खों की मूल है। जोगी पहले हिल-मिलकर मीठी-मीठी बातें बनाते हैं, और बाद में भूल जाते हैं। इस मुहब्बत को उतनी ही आसानी से तोड़ देते हैं जैसे चमेली का फूल। मीरा कहती है कि हे प्रभु! तुम्हारे दर्शन के बिना दिल में काँटे से चुभते हैं।
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