॥ राधे राधे ॥

हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय।
सूली ऊपर सेज हमारी, किस बिध सोना होय।
गगन मंडल पर सेज पिया की, किस बिध मिलना होय॥
घायल की गति घायल जानै, कि जिन लागी होय।
जौहरी की गति जौहरी जाने, कि जिन लागी होय॥
दरद की मारी बन बन डोलूँ वैद मिल्यो नहीं कोय।
मीरां की प्रभु पीर मिटै जब वैद सांवलया होय॥
ऐ सखी, मैं तो इश्क में दीवानी हो गई हूँ, मेरा दर्द कोई नहीं जानता। हमारी सेज सूली पर है, भला नींद कैसे आ सकती है! और मेरे महबूब की सेज आसमान पर है। आख़िर कैसे मुलाक़ात हो। घायल की हालत तो घायल ही जान सकता है, जिसने कभी जख़्म खाया हो; जौहरी के जौहर को जौहरी ही पहचान सकता है बशर्ते कि कोई जौहरी हो। दर्द से बेचैन होकर जंगल-जंगल मारी फिर रही हूँ और कोई मुआलिज मिलता नहीं मेरे मालिक। मीरा का दर्द तो उस वक़्त मिटेगा जब सलोने-साँवले कृष्ण इसका इलाज करेंगे
Discover more devotional songs