॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Uddhar Karo Bhagwan
उद्धार करो भगवान
सिया राम मय सब जग जानी
करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी।।
जपहि नाम जन आरत भारी
मिटाहि कुसंग होहि सुखारि।।
नाम लेत भव सिंधु सुखाही
करहु विचार सुजान मन माही।।
उद्धार करो भगवान तुम्हारी शरण पड़े
भव पार करो भगवान तुम्हारी शरण पड़े।।
सिया राम मये सब जग जानी
करहुँ प्रनाम जोड़ी जुग पानी
जपहि नाम जन आरत भारी
मिटहि कुसंग होहि सुखारी
नाम लेत भव सिन्दु सुखाही
करहु विचार सुजन मन माही
उद्धार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
भव-पार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्हारी शरण पड़े
कैसे तेरा नाम ध्याये
कैसे तुम्हारी लगन लगाए
हृदय जगादो ज्ञान
तुम्हारी शरण पड़े
भव-पार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
उद्धार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
पन्थ मतो सुन-सुन बातें
द्वार तेरे तक पहुँच ना पाते
भटके बीच जहाँ
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्हारी शरण पड़े
उद्धार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्ही श्यामल कृष्ण मुरारी राम
तुम्ही गणपति त्रिपुरी
तुम्ही बने हनुमान
तुम्हारी शरण पड़े
भव-पार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
उद्धार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
ऐसी अंतर ज्योत जगाना
हम दीनों को शरण लगाना
हे प्रभु दया निधान
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्हारी शरण पड़े
तुम्हारी शरण पड़े
उद्धार करो भगवान
तुम्हारी शरण पड़े
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