॥ राधे राधे ॥

हे राम रघुनंदन रामापति प्रार्थना सुन लीजिए,
हर पाप से संताप से उद्धार मेरा कीजिए।
तुम राम हो तुम श्याम हो,
सब भक्तों के तुम भगवान हो।
तुम हो सुखों के धाम मेरे,
आत्म के आधार हो।
तो हे पुरुषोत्तम तिलक रघुकुल,
भक्ति अपनी दीजिए।
हर पाप से संताप से उद्धार मेरा कीजिए,
हे राम रघुनंदन रामापति प्रार्थना सुन लीजिए।
तुम जन्म भी तुम मरण हो,
तुम कार्य भी तुम कारण हो।
सब सत्य सुख आनंद उसके,
जो तुम्हारी शरण हो।
तो हाथ करुणाकर प्रभु,
सर पर मेरे धर दीजिए।
हर पाप से संताप से उद्धार मेरा कीजिए,
हे राम रघुनंदन रामापति प्रार्थना सुन लीजिए।
तुम कर्म और फल कर्म हो,
तुम ध्यान भी और धर्म हो।
तुम शास्त्र हो तुम शस्त्र भी,
तुम आत्मा तुम चर्म भी।
तो हे अकिंचन आत्मस्वामी,
आत्म को बल दीजिए।
हर पाप से संताप से उद्धार मेरा कीजिए,
हे राम रघुनंदन रामापति प्रार्थना सुन लीजिए।
तुम आदि हो तुम अंत हो,
ज्ञानी गुणी और संत हो।
इस जीव का अस्तित्व क्या,
तुम तो कृपा अनंत हो।
तो हे दयानिधि दीनबंधु,
इस दीन पर अब रीझिए।
हर पाप से संताप से उद्धार मेरा कीजिए,
हे राम रघुनंदन रामापति प्रार्थना सुन लीजिए।
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