॥ राधापदाब्जसेवायां मोक्षोऽपि लघुतां गतः ॥
Shiv Ji Banke Nar Se Nari
Mahadev - Joyful Bhav
Artist: Shrijirasik
तर्ज़- हो ले के पहला पहला प्यार
शिव जी बन कर नर से नार,
हो कर सज धज कर त्यार,
चल दिए गौरां के संग में, लम्बा सा घूँघट डार...
देखने को रास लीला, मदन मुरार की,
बना कर छवि वोह चले, देखो नर से नर की ।
अपना छोड़ के सब श्रृंगार, पहने जेवर बड़े अपार,
चलते ऐसे जैसे हो कोई नई नवेली नार ।
शिव जी बनकर नर से नार...
महाँ रास में सब सखियाँ, देख बतलाई हैं,
कहाँ की सख़ी है यह जो, घूँघट में आई है ।
मुस्काए तब कृष्ण मुरार, समझ गए हैं यह त्रिपुरार,
ऐसी बंसी बजाई, कान्हा ने उन्हें निहार ।
शिव जी बनकर नर से नार...
बँसी की धुन पे मगन हुए जटाधारी हैं,
झूमकर वो नाचे उत्तरी सर से वो सारी है ।
देख के शरमाई बृज नार, ऐसा हुआ है पहली बार,
मोहन भी मोहित है करके उन पे जाते बलिहार ।
शिव जी बनकर नर से नार...
हर हर महाँदेव
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