॥ राधे राधे ॥

प्रभु चाह में चाह मिलाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
आँखों से झलकते आँसू हों, अधरों पे सदा मुस्कान रहे।
एक संग में रोने गाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
ना शिकवा हो किस्मत से कोई, ना दुनिया की कोई आस रहे।
मिल जाए जो संतोष करे, हर पल प्रभु का ही ध्यान धरे॥
हर हाल में शुक्र मनाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
ना मंदिर की दीवारों में, ना पत्थरों के आकारों में।
हर धड़कन में वो बसता है, भक्तों की करुण पुकारों में॥
दिल में ही प्रभु को पाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
जहाँ 'मैं' मिटकर 'तू' बन जाए, जहाँ बूँद समंदर हो जाए।
अभिमान हृदय से मिट जाए, मन श्याम चरण में खो जाए॥
प्रभु रंग में खुद रंग जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
दुख आए तो मुस्काना है, सुख आए तो झुक जाना है।
कैसा भी समय हो जीवन का, हर पल उसका गुण गाना है॥
प्रभु हाथ में डोर थमाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं।
बस जीते जी मर जाने को, भगवान की भक्ति कहते हैं॥
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