॥ राधापदं विना ज्ञानं शुष्कमेव हि निश्चितम् ॥
dar par tumhare aaya
दर पर तुम्हारे आया
Krishna - Vinti Bhav
Artist: Shrijirasik
दर पर तुम्हारे आया ठुकराओ या उठा लो,
करुणा की सिंधु मैया अपनी बिरद बचा लो,
दर पर तुम्हारे आया....
मीरा या शबरी जैसा पाया हृदय ना मैंने,
जो है दिया तुम्हारा लो अब इसे सम्भालो,
दर पर तुम्हारे आया....
दिन रात अपना-अपना करके बहुत फसाया,
कोई हुआ ना अपना अब अपना मुझे बना लो,
दर पर तुम्हारे आया....
दोषी हूँ मैं या सारा ये खेल तुम्हारा,
जो हूँ समर्थ हो तुम चाहे गजब जुठालो,
दर पर तुम्हारे आया....
बस याद अपनी देदो सब कुछ भले ही ले लो,
विषमय करील पर अब करुणा की दृष्टि डालो,
दर पर तुम्हारे आया...
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