॥ राधे राधे ॥

कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
नित भोर भये मैं बाट निहारूँ तुम्हारी,
पलकों से प्रभु जी राह बुहारूँ तुम्हारी।
रघुनाथ प्राण निधि पर जीवन बलिहारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम दीन हितकारी...
तुम दीनबंधु हो जग के पालनहारे,
भवसागर में हैं एक तुम्हारे सहारे।
अँखियाँ तरसें अब सुध लो अवध बिहारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
घायल जटायु को गोद में अपनी सुलाया,
भक्ति की खातिर नैनों से नीर बहाया।
क्या मेरे आँसू दिखते नहीं गिरधारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
शबरी के जैसे बेर चखे नहिं कोई,
मैं तो बिरह में सुध-बुध अपनी खोई।
झूठे बेरों की मीठी आस हमारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
केवट के घाट पे खुद ही चल कर आए,
हँस-हँस के अपने कोमल चरण धुलाए।
मुझसे ही अब तुम क्यों रूठे त्रिपुरारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
पत्थर की अहिल्या ने कब तुमको पुकारा,
बिन बोले ही तुमने जा के उसको तारा।
मैं रो-रो हारा सुन लो अवध बिहारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
पंछी, पाषाण और केवट को तुमने तारा,
क्या मैं ही प्रभु जी द्वार पे रहूँ बेसहारा।
अब तो आ जाओ जानकी नाथ बिहारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
सबके द्वारे तुम खुद ही चल कर जाओ,
मैं नाम पुकारूँ फिर भी पास न आओ।
अब ना आए तो बात बिगड़ जाए सारी,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
अब उमर ढली और साँसें रुकने लागीं,
तेरे दर्श बिना ये अँखियाँ रातों जागीं।
अंतिम वेला में लाज रखो रघुराई,
रस्ता देखत अब मेरी उमर गई सारी।
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी...
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