॥ राधे राधे ॥

सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा।
गले में तुलसी मुख में राम,
हृदय विराजे राधे श्याम।
सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा।
गोविंद गोविंद गाओगे,
प्रेम पदारथ पाओगे।
जो गोविंद नाम बिसारोगे,
फिर जीते नरक पधारोगे।
सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा...
जय जय गोपी जय जय ग्वाल,
जय जय अवध बिहारी श्याम।
राम कृष्ण भजो बारंबार,
चक्र सुदर्शन हैं रखवार।
सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा...
कभी अवध की गलियों डोलूँ,
कभी वृंदावन राधे बोलूँ।
सरयू यमुना एक ही धारा,
राम-श्याम ही प्राण हमारा।
सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा...
भवसागर से पार लगा दो,
चरणों का अब दास बना लो।
जनम-जनम की प्यास बुझा दो,
सोए हुए अब भाग जगा दो।
सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा...
माथे तिलक विराजे चंदन,
करो प्रभु के चरणन वंदन।
अंखियों में बस जाएँ मोहन,
काटें जन्म-मरण के बंधन।
सिया हरि नारायण गोविंदा,
भजो रामा कृष्णा गोविंदा...
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