॥ राधे राधे ॥

दीनों के दीनदयाल हो, भजो राधे गोविंदा।
मुरली मनोहर घनश्याम हो, भजो राधे गोविंदा॥
माथे मोर मुकुट तुम साजे,
अधरन मधुर ये मुरली बाजे।
ब्रज के प्यारे नंदलाल हो, भजो राधे गोविंदा॥
पीताम्बर तन पर लहराए,
कानन कुंडल शोभा पाए।
तीनों लोकों के शृंगार हो, भजो राधे गोविंदा॥
राधा रानी संग मुस्काओ,
प्रेम की मधुर सुधा बरसाओ।
राधा के तुम प्राणाधार हो, भजो राधे गोविंदा॥
नन्हे कर से गिरि उठाओ,
ब्रजवासिन की लाज बचाओ।
गिरिधर तुम रखवाल हो, भजो राधे गोविंदा॥
यमुना तट पर धेनु चराओ,
मीठी मीठी बंसी बजाओ।
गोकुल के तुम गोपाल हो, भजो राधे गोविंदा॥
मीरा प्रेम के गीत सुनाए,
सुध-बुध खोकर श्याम रिझाए।
मीरा के गिरिधर गोपाल हो, भजो राधे गोविंदा॥
चरणों में तेरे शीश झुकाएँ,
जनम जनम तेरा गुण गाएँ।
हम सबके पालनहार हो, भजो राधे गोविंदा॥
दीनों के दीनदयाल हो, भजो राधे गोविंदा।
मुरली मनोहर घनश्याम हो, भजो राधे गोविंदा॥
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