॥ राधे राधे ॥

जगन्नाथ नाथों के नाथ,
दर्शन देकर करिए सनाथ।
जग कहता तुम पतित उधार,
फिर क्यों मुझसे विमुख हो यार?
तारा है तुमने सारा संसार,
मैं आया तेरी शरण में नाथ।
जगन्नाथ नाथों के नाथ...
जगन्नाथ हैं दीनानाथ,
वही हैं एक अनाथों के नाथ।
तुम बिन मेरा कौन है नाथ,
रख लो चरणों में दीनानाथ।
जगन्नाथ नाथों के नाथ...
जगन्नाथ दीनों के साथ,
धरहु माथ मम आपुन हाथ।
भवसागर से तारो नाथ,
थामे रहना मेरा हाथ।
जगन्नाथ नाथों के नाथ...
जगन्नाथ तुम सम नहिं नाथ,
मोहु सम नहिं कोउ अनाथ।
शरण पड़ा हूँ सुन लो नाथ,
भक्ति का दो अमृत साथ।
जगन्नाथ नाथों के नाथ...
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