॥ राधाभक्तिः परा शक्तिः कृष्णानन्दप्रदायिनी ॥
Jai Jai Radhaavallabh Lal Man Rakhiyo Apne Charnan Mein
जय जय राधावल्लभ लाल मन रखियो अपने चरनन में
श्री बांके बिहारी लाल गोपाल मन रखियो अपने चरनन में
मन रखियो अपने चरनन में मन रखियो श्री वृन्दावन में
न ब्रह्म सो काम कछु हमको,
वैकुंठ की राह ना जानी है।
ब्रज की रज में रज हो के मिलूं,
यही प्रीत की रीत निभानी है।
वन वल्लभ गाय चराया करूं,
सुन ग्वालिन की है बाल की।
नंद नंदन की लहरी पेज से,
हमें कर्म की रेखा मिटानी है।
तेरे शीश पे मुकुट विराज रहा
कानो में कुण्डल साज रहा
तेरे गल वैजन्ती माल, गोपाल
मन रखियो अपने चरनन में
तेरे नैनो में सुरमा साज रहा
तेरे मुख में वीणा राज रहा
तेरी थोडी में हिरा लाल, गोपाल
मन रखियो अपने चरनन में
तेरे हाथ लटुकिया साज रही,
पैरो में पजनियाँ बाज रही
तेरी मुरली करे निहाल,गोपाल
मन रखियो अपने चरनन में
जय जय राधावल्लभ लाल मन रखियो अपने चरनन में
मन रखियो अपने चरनन में मन रखियो श्री वृन्दावन में
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