॥ राधे राधे ॥

हो बृज की महिमा है जग में निराली
श्याम श्याम बोलो चाहे बांके बिहारी
श्याम श्याम बोलो चाहे बाके बिहारि
चंदन है ब्रज की माटी भक्ति का वास है
बांके बिहारी जी का होता महारास है
गया ना निराश जो भी लेकर आया आश है
ज्ञान बैरागी भक्ति पधारी श्याम श्याम बोलो चाहे बांके बिहारी
संत और गाय सेवा ब्रज ने ही पाई है
यही ब्रिज की माटी मेरे कान्हा ने खाई है
गईया चराई याने बांसुरी बजाई है
कल कल करती है कालिंदी काली
श्याम श्याम बोलो चाहे बांके बिहारी
चारों धामों से मेरा बृज यह निराला है
दुनिया बनाने वाला बना नंदलाला है
प्रेमी रसिक फेरे इनकी ही माला है
इनके चरणों में दुनिया है सारी
श्याम श्याम बोलो चाहे बांके बिहारी
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