॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Shiv Shakti - Vivah Bhav
शिव शक्ति - विवाह भाव
Bhajans (10)
Sunder Sa Lag Raha Hai
bhajanShrijirasik
तर्ज » ( मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा )
सज रहा है ये भोला सुंदर सा लग रहा है
टीका लगाओ बाबा क्या खूब लग रहा है
चंदा से खूबसूरत चमके है तेरा चेहरा
आंखों के आगे मेरे लगता है तेरा पहरा
ऊपर से तेरा बाबा मुस्कुराना सा लग रहा है
टीका लगाओ बाबा क्या खूब लग रहा है
जंटा से तेरे शंकर बहती है गंग धारा
भक्तों को तूने बाबा पल भर में है उबारा
डमरू बजाना तेरा क्या खूब लग रहा है
टीका लगाओ बाबा क्या खूब लग रहा है
लकी के दिल में भोले तू ही तो बस गया है
वह तो मेरे बाबा तेरे नैनो में फस गया है
कीर्तन में मेरा अब तो मन सा लग रहा है
टीका लगाओ बाबा क्या खूब लग रहा है
Bhole Ji Ka Vyah
bhajanShrijirasik
शंकर जी का विवाह
(सहेलियों का पहला टोली)
ओ गौरा का दूल्हा, जिसकी गरज गरज दहाड़ा।
गले पड़ गया फंदा, काम हुआ बड़ा माड़ा।
गौरां, ऐसा वर तुझे, मिला नहीं कोई और, मिला ही ना।
तू भोले के साथ जचती नहीं, न तेरा, न उनका जोर।
ओ गौरा का दूल्हा, जिसकी गरज गरज दहाड़ा।।
(सहेलियों का दूसरा टोली)
ओ बैठा, मलकर भस्म, (सुन गौरा)।
नी ये बातें नहीं झूठी, (सुन गौरा)।
गले में सांप लिपटाए हैं, (सुन गौरा)।
श्मशान में डेरा लगाए हैं, (सुन गौरा)।
नी ये बातें नहीं झूठी, (सुन गौरा)।
ओ बैठा, मलकर भस्म, (सुन गौरा)।।
ओ गले में नागों की माला है, (सुन गौरा)।
बैठा बैल पर सवार है, (सुन गौरा)।
बाबुल ने जुल्म कमाया है, (सुन गौरा)।
बूढ़े से तेरा ब्याह रचाया है, (सुन गौरा)।
नी ये बातें नहीं झूठी, (सुन गौरा)।
ओ बैठा, मलकर भस्म, (सुन गौरा)।।
संग दो बच्चे आए हैं, (सुन गौरा)।
वे दोनों भिक्षा मांगने वाले हैं, (सुन गौरा)।
संग शुक्र और शनि हैं, (सुन गौरा)।
उनको खाने की है फिक्र, (सुन गौरा)।
नी ये बातें नहीं झूठी, (सुन गौरा)।
ओ बैठा, मलकर भस्म, (सुन गौरा)।।
(सहेलियों का तीसरा टोली)
सुन नी गौरा, गौरा नी अड़ीए।।
बूढ़ा तेरा वर नहीं,
जिसके साथ तेरा ब्याह होना नहीं।।
न वो लंबा, न वो मध्यम,
न वो लगता बौना,
जिसके साथ तेरा ब्याह होना नहीं।।
(शंकर जी के उदास दिल की हूक)
जिस वक्त मैं तुझे स्मरण करूं, उस वक्त मेरे पास।।
ओ लोगो, तोड़ मत देना, (गौरा से मेरा नाता)।।
किधर से आईं काली कोयलें,
किधर से आए मोर।।
ओ लोगो, तोड़ मत देना, गौरा से मेरा नाता।।
(गौरा की माँ के उदास दिल की हूक)
जिस वक्त मैं तुम्हें स्मरण करूं, उस वक्त मेरे पास।।
ओ लोगो, तोड़ मत देना, भोले से मेरा नाता।।
उत्तर से आईं काली कोयलें,
पश्चिम से आए मोर।।
ओ लोगो, तोड़ मत देना, प्यार वाली डोर।।
ओ लोगो, तोड़ मत देना, भोले से मेरा नाता।।
(गौरा के घर सहेलियों के व्यंग्य)
हमारे आंगन में ढोलक बजती है,
हमने सुना, दूल्हा भंगी और पोसती।।
ये बात जचती नहीं,
वे जीजा, ये बात जचती नहीं।।
हमारे आंगन में पीतल के बर्तन,
हमारी गौरा की ऊंची है जात।।
तेरी कोई जात नहीं,
वे जीजा, ये बात जचती नहीं।।
हमारे आंगन में घी भरा पड़ा,
ना तेरी माँ ने लाड़ दिखाया, ना तेरा बाप।।
ये बात जचती नहीं,
वे जीजा, ये बात जचती नहीं।।
(फेरों के बाद भोले जी के छंद)
सुन जीजा, हमें छंद सुना कर जाओ।।
आ बैठ जाओ, सालियों नी, तुम्हें छंद सुना कर जाऊं।।
छंद परागे, आईए जाईए, छंद परागे कंध।।
छंद मैं तुम्हें फिर सुनाऊं, पहले रगड़ो मेरी भांग,
ओ बैठ जाओ, सालियो नी, तुम्हें छंद सुना कर जाऊं।।
छंद परागे, आईए जाईए, छंद परागे कुल्फा।।
छंद मैं तुम्हें फिर सुनाऊं, पहले भर दो मेरा सुल्फा,
ओ बैठ जाओ, सालियो नी, तुम्हें छंद सुना कर जाऊं।।
छंद परागे, आईए जाईए, छंद परागे तर।।
तुमने तो जोर लगाया बहुत,
पर संयोग ज़ोरावर,
ओ बैठ जाओ, सालियो नी, तुम्हें छंद सुना कर जाऊं।।
(डोली विदाई के समय)
हमारा, चिड़ियों का झुंड रे, बाबुल, हम उड़ जाएंगे।
हमारी, लंबी उड़ान रे, कौनसे देश जाएंगे।
तेरे, महलों के बीच में, बाबुल डोला नहीं गुजरता।
एक, ईंट हटा दे माँ, बेटी अपने घर जा।
हमारा, चिड़ियों का झुंड रे, बाबुल, हम उड़ जाएंगे।।
(बरातियों की खुशी)
ले जाएंगे, ले जाएंगे, सापों वाले, गौरा को ले जाएंगे।।
ले जाएंगे, ले जाएंगे, भोलेनाथ, गौरा को ले जाएंगे।।
ले जाएंगे, ले जाएंगे, कैलाश वाले, गौरा को ले जाएंगे।।
कैलाश वाले, गौरा को ले जाएंगे।।
Dekho Lada Goura Da
bhajanShrijirasik
लाड़ा गौरा का
सखियों देखो, बड़ा निराला, लाड़ा गौरा का॥
पहनता गले, सर्पों की माला, लाड़ा गौरा का॥
घोड़ी भी ना, मिली है इसको, चढ़ के बैल पे आया है,
बंदे भी ना, मिले बाराती, भूत-चुड़ैलें लाया है॥
लगता, बड़ा ही, भोला-भाला॥
लाड़ा गौरा का,
पहनता गले, सर्पों की माला, लाड़ा गौरा का॥
तन पे, भस्म रमाई उसने, हाथ त्रिशूल सजाया है,
ना पगड़ी ना, सेहरा उसने, जोड़ा भी ना सजाया है॥
आया, पहन के, मृगचर्म का शाला॥
लाड़ा गौरा का,
पहनता गले, सर्पों की माला, लाड़ा गौरा का॥
रोटी छीन-छीन, खाते बाराती, सब्र भी करना सीखा नहीं,
राशन सारा, चट कर डाला, पेट फिर भी भरा नहीं॥
ऊपर से, मांगता, भांग का प्याला॥
लाड़ा गौरा का,
पहनता गले, सर्पों की माला, लाड़ा गौरा का॥
अजब-गजब है, शादी का सागर, किसने मिलाई ये राशि है,
राजा की है, बेटी गौरा, और वह पर्वत का वासी है॥
अब तो, रब ही, है रखवाला॥
लाड़ा गौरा का,
पहनता गले, सर्पों की माला, लाड़ा गौरा का॥
Dulha Bane Hai Bhole Nath Jodi Ka Javab Nahi
bhajanShrijirasik
दूल्हा बने हैं भोलेनाथ
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं ll
जोड़ी का, जवाब नहीं, ll
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, मेरी, महलों वाली ll
पर्वत पे, वस्ते, भोलेनाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, मेरी, गोरी गोरी ll
श्याम, वर्ण, भोलेनाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, खावे, लड्डू पेड़ा ll
भांग, पीवे, भांग, भोलेनाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, ओढे, लाल चुनरिया ll
बाघंबर, ओढ़े, भोले नाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, करती, सोलह श्रृंगार ll
भोले के, गले में, सरप हार,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, पहने, बजनी पयलिया ll
घुंघरू, पहने हैं, भोले नाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, के दर बाजे, ढोल छैने ll
डमरु, बजावे, भोले नाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
गौरां, मेरी, डोली में बैठीं ll
नंदी, पे बैठे, भोलेनाथ,
जोड़ी का, जवाब नहीं l
दूल्हा, बने हैं, भोलेनाथ...
हर हर महादेव
Bhole Baba Ne Damru Bajaya
bhajanShrijirasik
भोले बाबा ने डमरू बजाया
भोले, बाबा ने, डमरू वजय,
गौरा को ब्याहने आया ll
तिलक, चढ़ने लगा, लड्डू बटने लगे ll
घर घर में, संदेशा, भिजवाया,
गौरां को, ब्याहने आया l
भोले, बाबा ने, डमरू...
सखियाँ, आने लगी, मंगल गाने लगी ll
भोले को, खूब नचाया,
गौरां को, ब्याहने आया l
भोले, बाबा ने, डमरू...
मंगल, गाने लगी, ढोलक बजने लगे ll
भोले को, खूब सजाया,
गौरां को, ब्याहने आया l
भोले, बाबा ने, डमरू...
मंडप, सजने लगा, फ़ेरे होने लगे ll
ब्रह्मा ने, ब्याह रचवाया,
गौरां को, ब्याहने आया l
भोले, बाबा ने, डमरू...
डोली, सजने लगी, गौरां रोने लगी ll
माता ने, गले से लगाया,
गौरां को, ब्याहने आया l
भोले, बाबा ने, डमरू...
हर हर महादेव
Phulon Or Kaliyon Mai Bahar Aa Gayi
bhajanShrijirasik
फूलों और कलियों में बहार आ गई,
देख गौरा तेरी बारात आ गई,
फूलों और कलियों में बहार……
शीश पे उनके गंगा की मौरी,माथे पे उनके
चंदा की रोरी,नन्दी पे भोले की सवारी आ
गई,देख गौरा तेरी बारात आ गई…….
गले भोले के सरपों की माला,कानों में उनके
बिच्छू का बाला,भाग धतूरे की बौछार हो
गई,देख गौरा तेरी बारात आ गई…….
हाथों में भोले के डमरू का बाजा,तन पे है
उनके भस्मी का जामा,डोल नगाडों की
झंकार हो गई,देख गौरा तेरी……..
करके अगवानी नारद जी आये,देवों को लेके
ब्रम्हा भी आये,भूतों के संग बारात आ गई,
देख गौरा तेरी बारात आ गई……..
Lakh Lakh Hon Badhaiyan Aaj Meri Goura Ko
bhajanShrijirasik
ओ लख-लख, हों बधाइयाँ,
आज मेरी गौरा को॥
ओ सारे नाच-नाच, दें बधाइयाँ,
आज मेरी गौरा को॥
गौरा ब्याहने, भोले जी आए,
भूत-प्रेतों को साथ लाए॥
ओ हो के बैल सवार, आज मेरी गौरा को॥
ओ लख-लख, हों बधाइयाँ...
बधाई देने, राम जी आए,
सीता, हनुमत को साथ लाए॥
हो नाच-नाच, दें बधाइयाँ, आज मेरी गौरा को॥
ओ लख-लख, हों बधाइयाँ...
बैठ बैकुंठ धाम से, विष्णु जी आए,
लक्ष्मी, नारद को साथ लाए॥
ओ हो के गरुड़ सवार, आज मेरी गौरा को॥
ओ लख-लख, हों बधाइयाँ...
बधाई देने, ब्रह्मा जी आए,
सरस्वती माँ को साथ लाए॥
ऋषि-मुनि संग सभी, आज मेरी गौरा को॥
ओ लख-लख, हों बधाइयाँ...
रथ में बैठ के, कान्हा जी आए,
राधा, रुक्मिणी को साथ लाए॥
ओ रास रचाएँ आप, आज मेरी गौरा को॥
ओ लख-लख, हों बधाइयाँ...
दूर से चल कर, मंडली आई,
सब सखियों को संग लाई॥
ओ फूलों के हार लिए, आज मेरी गौरा के॥
ओ फूल बरसाते आप, आज मेरी गौरा के॥
ओ करते जय-जयकार, आज मेरी गौरा के॥
ओ नाचते-गाते साथ, आज मेरी गौरा के॥
Bhole Ki Aai Hai Baarat
bhajanShrijirasik
भोले की आई है बारात
भोले की, आई है बारात, सब को बधाई हो ll
आई है, गौरां जी के द्वार, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
क्या कुछ, पहना, दूल्हे ने सखियों ll
गौरा ये, पूछ रही आज, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
भस्म, रमाए गले, सर्पों की माला ll
जटा में है, गंगा साथ, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
कैसा, है मुखड़ा, दूल्हे का सखियों ll
दिल क्यों ये, धड़के बार बार, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
मुखड़ा, क्या पूछे गौरां, बुढ्ढा सो साल का ll
ना मुंह में, दांत ना ही आंत, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
कौन-कौन, बाराती, आए ससुराल से ll
शगुन में, लाए क्या साथ, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
भूत, प्रेत आए, सारे बराती ll
सर्पों की, गूंजे फुंकार, सब को बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
हाथ जोड़, कहे गौरां, सुनो भोले नाथ जी ll
शादी तो, दूर की है बात, होगी जग हंसाई हो l
भोले की, आई है बारात,
रूप, बनाया सुंदर, उम्र सौलह की ll
फूलों की, हुई बरसात, सबको बधाई हो l
भोले की, आई है बारात,
हर हर महांदेव
Shiv Ji Bihane Chale Palki Sajaike
bhajanShrijirasik
शिव जी बिहाने चले,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम,
संग संग बाराती चले,
ढोलवा बजाई के,
घोड़वा दौड़ाई के हो राम,
शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
हिमगिरि ने गौरा के ब्याह की,
लगन पत्रिका लिखवाई,
नारद जी के हाँथ वो चिट्ठी,
ब्रह्मा जी तक पहुचाई,
ब्रह्मा जी ने लगन पत्रिका,
सबको बाँच सुनाई थी,
शंकर की बारात चलेंगे,
सबने खुशी मनाई थी,
देवता करें तैयारी,
अपनी अपनी असवारी,
लेके कैलाश चले,
शंख बजाए के,
खुशियां मनाए के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
विष्णु और लक्ष्मी जी दोंनो,
गरुड़ के ऊपर चढ़ आए,
दाढ़ी वाले बूढ़े ब्रह्मा,
हंस सवारी ले आए,
बड़ी शान से इंदर आए,
ऐरावत लेके हाँथी,
भैंसे पर यमराज विराजे,
और यमदूत सभी साथी,
मस्ती में हरि गुण गाते,
नारद जी खुशी मनाते,
शंकर के बने बराती,
वीणा बजाई के,
तारों को सजाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
शंकर के गण हुए इक्कट्ठे,
बाबा को परणाम किया,
हार श्रृंगार बनाने वाला,
तब सारा सामान लिया,
राख मँगाकर शमशानों से,
उसकी लेप बनाई थी,
जय बम भोले कहके उनके,
तन पे भभूत चढाई थी,
बूढ़े में कुंडल वाला,
बैठा था फणीयर काला,
मस्ती में झूम रहा,
फणवा घुमाई के,
जिह्वा हिलाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चले,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
मस्तक पे थे त्रैलोचन और,
दूध का चंद्र विराज रहा,
डम डम डमरू बाजे और,
त्रिशूल हाँथ में साज रहा,
भोले बाबा को पहनाई,
नर मुंडो की इक माला,
बाग़म्बर की खाल ओढाई,
और कंधे पर मृगछाला,
गंगा की धारा बहती,
कलकल कल करके कहती,
बुरी नजर से इन्हें,
रखना बचाई के,
मुखड़ा छुपाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
नंदी गण से कह बाबा ने,
अपने सब गण बुलवाए,
शंकर की बारात चढ़ेंगे,
खुशी मनाके सब आए,
यक्षों और पिशाचों के संग,
भूत परेतों के टोले,
नाचे कूदे शोर मचावे,
जय भोले बम बम भोले,
कोई पतला कोई मोटा,
कोई लंबा कोई छोटा,
काले और नीले पीले,
टोलियां बनाई के,
सजके सजाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
किसी की आँखे तीन तीन और,
किसी के माथे एक लगी,
एक टांग पे चले कोई और,
किसी के टांग अनेक लगी,
मुँह किसी का लगा पेट में,
और किसी का छाती में,
कोई ऊँचा आसमान सा,
कोई रेंगता धरती में,
लंबा चौड़ा मुँह खोले,
बोली भयंकर बोले,
धरती गगन भर डाला,
बभूति उड़ाई के,
धूम मचाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
गरुड़ के ऊपर विष्णु निकले,
ब्रह्मा हंस को साथ चले,
ऐरावत पर इंदर बैठे,
भैंसे पर यमराज चले,
बाकी देवता भी ले चल रहें,
अपनी अपनी असवारी,
भोले शंकर ने देखा,
हो गई बारात की तैयारी,
नंदी पर आप विराजे,
डमरू त्रिशूल को साजे,
खुशियों में नंदी नाचे,
सिंगवा हिलाइके,
पूँछवा घुमाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
आगे आगे शंकर बाबा,
पीछे भूत परेत चले,
ब्रह्मा विष्णु धर्मराज और,
इंदर गरुड़ समेत चले,
ढोल नगाड़े शंख बजे और,
बाज रही थी शहनाई,
चलते चलते शंकर की बारात,
नगर के पास आई,
सुंदर स्थान निहारा,
शिवजी ने किया इशारा,
देवता नाचन लागे,
झंडे उठाइके,
बाजे बजाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
हिमगिर ने जब शोर सुना,
पंचायत आपनी बुलवाई,
मिलजुल कर सब करे स्वागत,
गौरा की बारात आई,
चले उधर पंचायत वाले,
स्वागत गीत सुनाते थे,
उनसे भी आगे कुछ बच्चे,
भागे दौड़े जाते थे,
दूल्हे के देखे नैना,
भूतों प्रेतों की सेना,
बालक तो घर को भागे,
होश भुलाइके,
सांस फुलाईके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
मात पिता सों बालक बोले,
ये कैसी बारात आई,
लगता है के नर्क छोड़,
यमदूतों की जामात आई,
जो इस ब्याह को देखेगा वो,
बड़ा भाग्यशाली होगा,
पर हम कहते हैं कि सारा,
नगर आज खाली होगा,
माता पिता समझावे,
बच्चों को पास बुलावें,
डर को छोड़ो तुम खेलो,
खुशियाँ मनाई के,
राघवेंद्र गाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
हिमगिर ने सबके स्वागत में,
अपने नैन बिछाए थे,
कर विनती सम्मान सभी को,
जनवासे में लाए थे,
इंद्रपुरी से जनवासा था,
जहाँ उन्हें ठहराया था,
दास दासियों ने आकर,
सबको जलपान कराया था,
ब्रह्मा और इंदर आए,
देखके सब हरषाए,
विष्णु को माथा टेके,
शीश झुकाई के,
हरि गुण गाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
इतने में गौरा की सखियाँ,
सोने की थाली लाई,
महादेव शंकर दूल्हे की,
आरती करने को आई,
उन सबने नारद से पूछा,
दूल्हा कौन है बतलाओ,
बैठा है जिस जगह वही पे,
हम सबको भी पहुँचाओ,
नारद की निकले हाँसी,
बोले तब खाँस के खाँसी,
संग गणों को भेजा,
रास्ता दिखाइके,
जरा मुस्कुराइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
सखियों ने देखा बारात ये,
नही परेतों की टोली,
भांत भाँत के रूप बनावे,
तरह तरह बोले बोली,
कोई तो पीवे सूखा गाँजा,
कई घोटते भाँग रहे,
छीना झपटी करते हैं,
कई इक दूजे से माँग रहे,
मस्ती में झूम रहे हैं,
नशे में घूम रहे हैं,
भाँग को लागे रगड़ा,
सोटवा घुमाइके,
घोटवा लगाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
सखियों ने दूल्हे को देखा,
लंबी दाढ़ी वाला है,
हाँथ में जिसके खप्पर डमरू,
गले सांप की माला है,
जटाजूट बांधे और तन पे,
जिसने राख चढ़ाई है,
बाग़म्बर की खाल ओढ़ने,
ते मृगछाल बिछाई है,
सखियाँ जब करे इशारे,
नंदी जी खड़े निहारे,
सखियों के पीछे पड़ गए,
पूछनी घुमाइके,
सिंगवा हिलाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
जनवासे से बाहर निकली,
सब सखियाँ घबराई थी,
गौरा तेरी किस्मत फूटी,
उसे बताने आई थी,
पार्वती से आकर बोली,
तेरा दूल्हा देख लिया,
तेरे पिता ने बस यूं समझो,
तुझे नर्क में भेज दिया,
है वो शमशान का वासी,
है कोई जोगी सन्यासी,
मस्ती में डूबा रहे,
भाँग चढ़ाई के,
धतूरा चबाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
पार्वती ने उत्तर ऐसे,
दिया सभी की बोली का,
मेरा और शंकर का रिश्ता,
है दामन और चोली का,
जनम जनम की लगन यही है,
माँ अपनी से कह दूंगी,
व्याह होगा तो शंकर से,
अन्यथा कंवारी रह लुंगी,
गौरा की सुनकर वाणी,
खुश हो गई सखी सयानी,
चलने लगी दोनो की,
जय जय बुलाई के,
गीत गुनगुनाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
उधर गणों ने मिलकर के,
शिव बाबा को तैयार किया,
इधर गौरी की सखियों ने था,
गौरा का श्रृंगार किया,
महलों के प्रांगण में वेदी,
सुंदर एक बनाई थी,
मंडप जब तैयार हुआ तो,
फिर बारात बुलवाई थी,
देवता बाजे बजावे,
शंकर डमरू खड़कावे,
भूतों की सेना चली,
नाच दिखाई के,
धूम मचाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
गलियों और बारातों में थी,
सचमुच भीड़ लगी भारी,
अपने अपने घर के आगे,
खड़ी हो हो देखे नारी,
ब्रह्मा विष्णु इंद्र आदि को,
देख सभी हरषाई थी,
पर शंकर को देख नारियाँ,
घर की भीतर भागी थी,
धक धक दिल धड़कन लागे,
अंग सब फड़कन लागे,
नन्हे नन्हे बच्चों को,
गोद मे उठाइके,
गले से लगाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
गौरा की माँ ने हिमगिर को,
अपने पास बुलाया था,
साखियों ने जो हाल कहा था,
सब उनको समझाया था,
बोली मैं अपनी बेटी को,
तबाह नही होने दूंगी,
कुँए में गिरके मर जाउंगी,
ब्याह नही होने दूंगी,
इतने में हरि गुण गाते,
नारद जी वीण बजाते,
पिछले जनम की कथा,
बोले समझाई के,
सबको सुनाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
मण्डप में जब पहुँचे शंकर,
आसन देके बिठलाया,
पहले उनकी पूजा करी फिर,
पार्वती को बुलवाया,
बड़े प्रेम से हिमगिर ने,
गिरजा का कन्यादान किया,
शंकर सहित बराती जितने,
सबका ही सम्मान किया,
शंकर और पार्वती की,
सुंदर सी जोड़ी देखी,
देवता खुश हुए,
फूल बरसाइके,
जय जय बुलाई के हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
गले लगाकर बेटी को,
हिमगिर मैना ने विदा किया,
पार्वती को शंकर ने,
नंदी की पीठ पर बिठा लिया,
सोमनाथ की इस गाथा को,
सुने वा इसका गान करें,
संकट सारे मिट जाए,
शिव जी उनका कल्याण करें,
लेकर के पार्वती को,
शंकर कैलाशपति को,
नंदी मस्ती में भागे,
सिंगवा हिलाइके,
पूँछवा घुमाइके हो राम,
ए भैया शिव जी बिहाने चलें,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
शिव जी बिहाने चले,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम,
संग संग बाराती चले,
ढोलवा बजाई के,
घोड़वा दौड़ाई के हो राम,
शिव जी बिहाने चले,
पालकी सजाई के,
भभूति रमाई के हो राम ॥
Nando Pe Chali Hai Barat Bhole Ki
bhajanShrijirasik
नंदी पे चली है बारात भोले की
सबसे अलग है यो बात भोले की
अरे शूकर नाचे शनिचर नाचे
संग में भूत पुशाचर नाचे
देख ले तू गोरां यो ठाठ भोले की
चले हैं शिव जैसे मस्ट मलंगा
गले में सर्प जटा में गंगा
हाथ में डम डम डमरू बाजे
माथे चंदा कितना साजे
आज दिन है भोले का
और रात भोले की
नंदी पे चली……
गोरां नगरी थर थर काँपे
भूत पिशाचर देख झाँके
गले में है नर मुंडों की माला
शोर मचावे अजब निराला
तू जीत है गोरा
तू मात भोले की
नंदी पे चली है……
फेरों पर जब आयी गोरा
शरमाए देखो कैसे भोला
सात फेरे संग लगाके
वर माला ली सर को झुका के
हो गई है गोरां
देखो आज भोले की
नंदी पे चली है……
फूल देखो गगन से बरसे
देवता सब उतरे स्वर्ग से
शिव मिलन की बेला आयी
देने आये सब शिव को बधाई
कलम प्रकाश की और बात भोले की
ख़ुशी गाती है महिमा दिन रात भोले की
नंदी पे चली है……
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