॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Teri Galiyon Ki Jogan M Jabse Bani Jindagi Din V Din Vo Sanvarti Rhi
तेरी गलियों की जोगन मैं जबसे बनी,
ज़िंदगी दिन व दिन संवरती रही,
हुई करुणा की ऐसी नजर सांवरे के कदर इस ज़माने में बढ़ती रही.
दर बदर से मैं कोई कीमत न थी,
श्याम की होके कीमत मेरी बढ़ गई,
इतने एहसान मुझपे किये श्याम ने की कर्जदार उनकी मैं हो गई,
गम ख़ुशी में मेरे सब बदल ते गये,
खाली झोली मेरी रोज भर्ती गई,
हुई करुणा की ऐसी नजर सांवरे,
के कदर इस ज़माने में बढ़ती गई,
तेरी गलियों की जोगन मैं जबसे बनी
शुकरियाँ रेहमतो का मैं अगर कर सकू,
श्याम बाबा इतनी न औकात है,
तेरे दरबार की एक मंगती हु मैं,
पूछ जग में तुम्हरी बड़ी बात है,
मेरे दोषो को भी तुम निभाते रहे,
मैं भले ही गुन्हा रोज करती रही,.
हुई करुणा की ऐसी नजर सांवरे,
के कदर इस ज़माने में बढ़ती गई,
तेरी गलियों की जोगन मैं जबसे बनी
तेरी महिमा का गुणगान करती रहु,
श्याम बाबा सदा ये करना दया,
सोते जगते तुम्हारा ही ध्यान हो मुख से श्याम कहु जब भी खुलू जुबा,
आज जो कुछ भी हु तेरी किरपा से हु,
नाम तेरा लेकर चलती रही,
हुई करुणा की ऐसी नजर सांवरे,
के कदर इस ज़माने में बढ़ती गई,
तेरी गलियों की जोगन मैं जबसे बनी
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