॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Teri Galiyon Ka Hu Ashiq Tu Ek Nagina H
तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,
तेरी नजरो से सँवारे जाम पीना है,
तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,
मेरे हरदम मेरे साथी मेरे साथी हमदम,
तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी तेरा गम मेरा गम,
तू लाहु है तू जान है तू ही पसीना है,
तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,
तेरे सिवा कोई दूसरा नहीं मेरा,
छोड़ो नहीं कस के पकड़ा ये दामन तेरा,
तू ही मका तू ही काबा तू ही मदीना,
तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,
चाहे दो जखम चाहे जन्नत में पोहचंदे मुझको,
या डुबो दे या पार लगा दे मुझको,
तू ही दरिया तू ही साहिल तू ही सफीना है,
तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,
तेरे बिना एक पल मैं जी नहीं सकता,
ये जुदाई के दर्द को मैं पी नहीं सकता,
तेरी गलियों में सँवारे मरना जीना है,
तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है,
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