॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Tera Shyam Kahan Hai
तेरा श्याम कहा है
बदले हुए से क्यों लग रहे हो
श्याम पराये से क्यों लग रहे हो
पहले दरबार आता देखकर तुम मुस्काते
सामने अब आया जो देख नजरे चुराते
कुछ तो बोलो क्यूँ बदले हो इतना बता दो श्याम
इतना बता दो श्याम
रोते हुए मैं जाता दर से श्याम ये कैसे देख रहे हो।
सोचा था बाबा आकर देगा मुझको सहारा
बताओ सांवरिया क्यू किया मुझसे किनारा
लुट रही है लाज ये मेरी तेरे होते श्याम
हा तेरे होते श्याम
गैरों को जैसे तुम भी बाबा बैठे बैठे हंसने लगे हो।
पहले क्यू प्रीत लगाकर प्रेम तुमने बढ़ाया
बुलाकर दर पे मुझको काहे मुखड़ा घुमाया
मांगने कुछ ना आता तुमसे आता मिलने श्याम
मैं आता मिलने श्याम
देख यूँ मुझको सामने अपने श्याम पसीना बहाने लगे हो।
ये दुनिया मुझसे पूछे कि तेरा श्याम कहा है
मैं छाती ठोक के कहता कि मेरा श्याम यहाँ है
रंग बदलती दुनिया में क्या तुम बदलोगे श्याम
क्या तुम बदलोगे श्याम
कृष्णा तुम्हीं तो अपने सनी का जन्मों से साथ निभाते रहे हो।
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