॥ राधानामामृतं पीत्वा विस्मरन्ति भवक्लमम् ॥
Saras Kishori Vayas Ki Thori
सरस किशोरी, वयस की थोरी
Radhe - Vinti Bhav
Artist: Shrijirasik
सरस किशोरी, वयस की थोरी,
रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
साधन हीन, दीन मैं राधे, तुम करुणामई प्रेम-अगाधे,
काके द्वारे, जाय पुकारे, कौन निहारे, दीन दुखी की ओर।
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
करत अघन नहिं नेकु उघाऊँ, भरत उदर ज्यों शूकर धावूँ,
करी बरजोरी, लखि निज ओरी, तुम बिनु मोरी, कौन सुधारे दोर।
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
भलो बुरो जैसो हूँ तिहारो, तुम बिनु कोउ न हितु हमारो,
भानुदुलारी, सुधि लो हमारी, शरण तिहारी, हौं पतितन सिरमोर।
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
गोपी-प्रेम की भिक्षा दीजै, कैसेहुँ मोहिं अपनी करी लीजै,
तव गुण गावत, दिवस बितावत, दृग झरि लावत, ह्वैहैं प्रेम-विभोर।
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
पाय तिहारो प्रेम किशोरी!, छके प्रेमरस ब्रज की खोरी,
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