॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Prabhu Mai Puchh Raha Ek Baat
Krishna - Vinti Bhav
Artist: Shrijirasik
प्रभु मैं पूछ रहा एक बात ।
बैठा है तू सबके अन्दर, फिर क्यों हो जाता पाप ।। प्रभु मैं....
गजब तमाशा नित्य करे तू , दिन करता फिर रात ।
एक ही साँचे में सब ढलते, फिर क्यों भेद दिखात ।। प्रभु मैं....
जहाँ पाप तहाँ पुण्य बसा है, जहाँ पुण्य तहाँ पाप ।
दीपक ऊपर करे रोशनी, नीचे अन्ध समात ।।
प्रभु मैं....
फूल बनाया शूल बनाया, विस्तृत सागर शान्त ।
संचालक नाटक का नटवर, फिर विचलित क्यों कान्त ।। प्रभु मैं ....
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