॥ राधे राधे ॥

मेरे मन मधुबन में आ ओ वृंदावन रहन वालया
मीठी मुरली की तान सुना ओ वृंदावन रहन वालेया
तुम्हे देखने को मेरे नैन भए बावरे ओ नैन भए बावरे।
बोलो रे बोलो कब आओगे सांवरे ओ आओगे सांवरे।
इन नैनों की प्यास बुझा वृंदावन रहने वालेया
मेरे मन मधुबन में.......
फागुन बसंत और सावन बिताए ने हां सावन बिताए ने
तेरे देखने को कई सपने सजाए ने हां सपने सजाए ने
बैठी कब से मैं आस लगा ओ वृंदावन रहने वालेया
मेरे मन मधुबन में......
प्रेम का तू पुजारी है अनोखी रसधार है हां अनोखी रसधार है।
रस पान करने को जिया बेकरार है हां जिया बेकरार है।
मुझे रस की वो बूंद पिला ओ वृंदावन रहन वालया
मेरे मन मधुबन में
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