॥ राधे राधे ॥

हनुमान जी के भक्त निडर होते है
सदा प्रसन्न रहते है
।।सीता राम।।
मंगल की मूरत हो तुम,
सबका करते हो शुभ मंगल।
जो भी नाम राम का लेता,
उसके तुम हरते संकट।
दीन-दुखियों के दुख-भंजन,
हो करुणा के सागर अविरल।
जो भी नाम राम का लेता,
उसके तुम हरते संकट।
राम के तुम हो सखा,
शिव के तुम हो स्वरूप।
अंजनी सुत भगवन,
शक्ति से हो परिपूर्ण।
स्वीकारो अब मेरा प्रणाम,
कष्टों को तुम हर लो भगवान।
स्वीकारो ये प्रणाम,
भक्त की सुन लो पुकार, हनुमान।
जय हनुमान, जय हनुमान,
कष्टों से दो निदान।
जय हनुमान, जय हनुमान,
स्वीकारो ये प्रणाम।
सौ योजन के सागर को,
क्षण में पार किया।
जिसने सुमिरा नाम तुम्हारा,
उसको तार दिया।
आए हैं हम शरण तिहारे,
नयन तुम्हारी राह निहारे।
दर्शन दो भगवान,
दर्शन दो भगवान।
जय हनुमान, जय हनुमान,
कष्टों से दो निदान।
जय हनुमान, जय हनुमान,
स्वीकारो ये प्रणाम।
।।सीता राम।।
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