॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Fag Khelan Barsane Aaye H Natawar Nandkishor
फाग खेलन बरसाने आए हैं, नटवर नन्दकिशोर
नटवर नन्दकिशोर, नटवर नन्दकिशोर,
फाग खेलन.........
घेर लई सब गली रंगीली,
छाय रही है छटा छवि छवीली,
डम ढोल, डम ढोल,
आज डम ढोल मृदंग बजाए हैं, बंसी की घनघोर,
फाग खेलन.........
जुल-मिल के सब सखियाँ आईं,
उमड़ घटा अम्बर पे छाई,
ये तो अबीर, ये तो अबीर,
आज ये तो अबीर, गुलाल उड़ाए हैं, मारत भर-भर झोर,
फाग खेलन.........
भई अबीर घोर अँधियारी,
दीखत नाहिं कोई नर और नारी,
राधे दिन, राधे दिन,
आज राधे दिन, सैन चलाए हैं, पकरे माखन-चोर,
फाग खेलन.........
जो लाला घर जानो चाहो,
तो होरी को फगुआ लाओ,
फिर श्याम ने, फिर श्याम ने,
आज फिर श्याम ने, सखा बुलाए हैं, नाचत कर-कर शोर,
फाग खेलन..........
राधे जू की हा-हा खाओ,
मेरी श्यामा जू की हा-हा खाओ,
सब सखियन को घर पहुँचाओ
मेरे घासीराम, मेरे घासीराम पथ गाए हैं, लगी श्याम से डोर।
फाग खेलन........
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