॥ राधाया हृदये कृष्णः कृष्णस्य हृदि राधिका ॥
Chandi Ki Divaar Ko Toda Meera Ne Ghar Chhod Diya
चांदी की दीवार...
चांदी की दीवार को तोड़ा, मीरा ने घर छोड़ दिया
इक धनवान की बेटी ने, गिरधर से नाता जोड़ लिया चांदी की दीवार...
नाचे गाए मीराबाई, लेकर मन का इक तारा
पग में घुंघरू, गल में माला, भेष जोगिया धारा
राणा कुल की आन बान को, मीरा जी ने तोड़ दिया चांदी की दीवार...
भक्ति ज्ञान था इकतारा में, हर घुंघरू में नाद भरा
हर गायन में बसे कन्हैया, भक्ति भाव का स्वाद भरा ज्योति से ज्योति मिला ली उसने, सबसे नाता तोड़ दिया चांदी की दीवार...
सास कहे कुल नासी मीरा, लागे गले में फांसी रे
कैसे जीना होगा मेरा, जग करता है हांसी रे
मन के पिया जोगनियां ने, तन के पिया को छोड़ दिया चांदी की दीवार...
सांप पिटारा राणा भेजा, हार मौत के सूलों का
हंसकर के मीरा ने पहना, हार बन गया फूलों का
प्रेम दीवानी मीरा देखो, मोह का बंधन तोड़ दिया चांदी की दीवार...
पी गई मीराबाई देखो, राणा के विष का प्याला
कौन बिगाड़ सका उसका, जिसका गिरधर रखवाला गिरधर के रंग में मीरा ने, जग से नाता तोड़ दिया
चांदी की दीवार...
श्याम शरण में जो जाते हैं, श्याम के वो बन जाते हैं भक्त दयालु ईश भजन में मीरा के गुण गाते हैं
भवसागर से तर गई मीरा, देह का बंधन तोड़ दिया
चांदी की दीवार...
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